John Wick 4 Review: वीडियो गेम सी दुनिया के कियानू रीव्स फिर चैंपियन, चौथे चैप्टर में चार गुना ज्यादा हिंसा
किसी फिल्म का टिकट खिड़की पर चलना, न चलना अब बहुत कुछ इस बात पर निर्भर करने लगा है कि फिल्म की रिलीज से पहले उसे लेकर दर्शकों में उत्सुकता कितनी है, और फिल्म की इस लिहाज से एडवांस बुकिंग कैसी है? एक्शन फिल्म सीरीज ‘जॉन विक’ की चौथी कड़ी इस मायने में भारतीय सिनेमा को भविष्य की दिशा दिखा सकती है। एक्शन फिल्मों का कारोबार दुनिया भर में लगातार बढ़ता जा रहा है। हिंदी में रिलीज हालिया फिल्म ‘पठान’ की कामयाबी भी ये साबित करती है कि कोरोना काल के अवसाद में जीते रहे दर्शक अब बड़े परदे पर बड़े धमाके होते देखना चाहते हैं बशर्ते इन कहानियों का नायक उनका अपना पसंदीदा चेहरा हो और एक्शन दृश्यों में ताजगी हो। फिल्म ‘जॉन विक 4’ अपने लक्षित दर्शकों की इस कसौटी पर खरी उतरती है। वीडियो गेम्स जैसे हिंसक दृश्यों से भरपूर ये फिल्म युवाओं की इस महीने की सबसे पसंदीदा फिल्म रिलीज से पहले रही है और आश्चर्य नहीं होना चाहिए अगर फिल्म ‘जॉन विक 4’ भारत में अब तक रिलीज इसकी पहले की सभी कड़ियों को मिलाकर हुआ पूरा कारोबार इस बार पहले हफ्ते में पार कर जाए।
युवाओं की पसंद का सिनेमा
बड़े बजट की फिल्मों की रिलीज के एक दिन पहले महंगी टिकट दरों पर होने वाले उनके प्रिव्यू शोज भी फिल्म की लोकप्रियता नापने का सबसे सही पैमाना होते हैं। गुरुवार की रात 10.40 बजे के हाउसफुल आईमैक्स शो में इस सीरीज को लेकर दर्शकों की उत्सुकता की पहली बानगी दिखी। रात दो बजे के करीब शो खत्म होने के बाद सिनेमाघरों से निकलते दर्शकों में कोई भी फिल्म को लेकर अफसोस करता भी नहीं नजर आया। सिनेमा की किसी सीरीज में ब्रांडिंग का यही चमत्कार है। कियानू रीव्स ने इस भाड़े के हत्यारे का चोला पहली बार इस सीरीज की पहली फिल्म ‘जॉन विक’ में साल 2014 में पहना। तब कहानी बस इतनी सी थी कि अपराध की दुनिया से दूर हो चुके इस सनकी जैसे हत्यारे को अपनी दिवंगत बीवी से मिले पिल्ले को कुछ अपराधी मार देते हैं और उसकी पसंदीदा कार चुका ले जाते हैं। वह वापस अपनी पुरानी दुनिया में लौटता है और कोहराम मचा देता है। सीरीज की दूसरी और तीसरी कड़ी उसे अपराध की इस दुनिया के शीर्षस्थ संगठन हाई टेबल के सामने ला खड़ा करती है। चौथी कड़ी में सीरीज की कहानी अमेरिका से जापान होती हुई फ्रांस पहुंची है। फिल्म में इस बार भी एक कुत्ता है, लेकिन उसका साथी कोई और है।
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आजादी के लिए खूनी खेल
फिल्म ‘जॉन विक 4’ की शुरुआत वहां से होती है जहां पिछली फिल्म में उसे गुलाम बनाकर अपने काम कराने वाले के सामने अपनी स्वामिभक्त साबित करने को जॉन विक अपनी उंगली काटकर भेंट चढ़ा देता है। हाईटेबल से भी वरिष्ठ इस सरगना को मारकर जॉन विक सीरीज की चौथी फिल्म में यलगार का एलान करता है। उधर, हाईटेबल का एक प्रतिनिधि न्यूयॉर्क के उस होटल को तहस नहस कर देता है जिसका मैनेजर पिछली फिल्म में जॉन विक को मारने से चूक गया था। मैनेजर का साथी इस दौरान मारा जाता है (ये किरदार निभाने वाले लैंस रेडिक का हाल ही में देहांत हो चुका है)। जॉन विक अपने जिस मित्र के यहां शरण लेता है, हाईटेबल के लोग वहां भी पहुंच जाते हैं। उसका ये साथी भी मारा जाता है हालांकि उसकी बेटी बच जाती है। मामला आमने सामने की लड़ाई तक पहुंचता है और इसमें शामिल होने के लिए जॉन विक को अपने कबीलाई अपराधी परिवार की सदस्यता भी फिर से हासिल करनी होती है। इस जंग में इस बार जॉन विक को मारने निकले दो नामचीन अपराधी बाद में उसके साथी बनते दिखते हैं। फिल्म हालांकि जहां खत्म होती है, वहां से जॉन विक के इस सीरीज के अगले अध्याय में दिखने न दिखने को लेकर सवाल खड़ा होता दिखता है लेकिन कहानी का आखिरी सिरा बताता है कि ये कहानी अभी बाकी है।
अपराध की रोचक काल्पनिक दुनिया
निर्देशक चैड स्टाहेल्स्की ने जॉन विक को लेकर पहली से लेकर चौथी फिल्म तक जो दुनिया गढ़ी है, वह उन लोगों को बहुत पसंद आती है जिनको वीडियो गेम्स में खून खराबा पसंद रहा है। ये दुनिया सिर्फ अपराध की दुनिया है। यहां आम लोगों और कानून के रखवालों का कोई काम नहीं है। बस इस दुनिया के एक से बढ़कर एक दुर्दांत और क्रूर चेहरे हैं। उनके काम करने के तरीके कमजोर दिलवालों के देखने लायक नहीं है। फिल्म ये सिर्फ वयस्कों के लिए हैं और ऐसे वयस्कों के लिए है, जो परदे पर लगातार चलती रहने वाले हिंसा के अतिरेक से घबराते नहीं हैं। पिछली तीनों फिल्मों की तरह ही चैड ने फिल्म ‘जॉन विक 4’ में भी हिंसा के दृश्यों को बहुत ही चतुराई और कुशलता से रचा है। खासतौर से क्लाइमेक्स के ठीक पहले एक मकान के भीतर हमलावरों से घिरे जॉन विक का बचने की कोशिश करने वाला दृश्य बहुत ही रोचक है। इस दौरान कैमरा आसमान की तरफ रहता है और एक कमरे से दूसरे कमरे, दो दीवारों के इधर उधर और कोनों व गलियारों में चलती इस गोलीबारी को बहुत ही दिलचस्प तरीके से दिखाता है।
निर्देशक और अभिनेता की जबर्दस्त जुगलबंदी
फिल्म ‘जॉन विक 4’ एक तरह से देखा जाए तो एक निर्देशक का अपनी कहानी पर भरोसा, एक कलाकार का अपने निर्देशक के नजरिये पर खरा उतरने की पूरी कोशिश करना और तमाम सहायक कलाकारों का दिए गए किरदारों के हिसाब से कैमरे के सामने अपने अभिनय में पूरी जान डाल देने का संगम है। कियानू रीव्स तो खैर जैसे लगता है कि जॉन विक का किरदार करने के लिए ही बने हैं। उनकी कद काठी एक भाड़े के हत्यारे के लिए बिल्कुल फिट दिखती है। आधुनिक तरीके के कपड़ों (बुलेटप्रूफ) से बने उनके शानदार सूट उनकी शख्सियत को और निखारते हैं। चैड अपने हीरो को ढाई किलो के हाथ वाला हीरो तो बनाते हैं लेकिन उसकी पिटाई भी बार बार कराते हैं। हमलावरों के बीच फंसकर जॉन विक जितना लहूलुहान होता है, बाद में उसका उससे भी ज्यादा वीभत्स तरीके से अपने इन्हीं दुश्मनों का सफाया करना फिर परदे पर जायज लगने लगता है। सीरीज की अगली कड़ी बननी है, ये तो इस फिल्म को देखकर तय लगता है लेकिन इसमें जॉन विक का किरदार अगर लौटेगा तो कैसे लौटेगा, ये देखना दिलचस्प रहेगा।
बिल, डॉनी और एंडरसन भी चमके
कियानू रीव्स के अलावा फिल्म ‘जॉन विक 4’ को इस सीरीज में पहली बार खलनायक का किरदार कर रहे बिल स्कार्सगार्ड की शख्सियत से भी काफी मदद मिलती है। रईसी की अति के करीब पहुंच चुके हाइटेबल के सदस्य मार्किस विंसेट डि गॉरमॉन्ट के रूप में बिल जब भी परदे पर आते हैं तो दर्शकों को एक अजीब सी सिहरन महसूस होती है। दृष्टिहीन हत्यारे केन के रूप में डॉनी येन ने बहुत शानदार काम किया है। हमलावरों को पहचानने के लिए आवाज करने वाले उपकरण लगाकर उनका शिकार करने वाला दृश्य तो रोचक है ही, उनके बाकी एक्शन दृश्य भी काफी हैरतअंगेज हैं। मिस्टर नोबडी के किरदार में शैमियर एंडरसन ने भी काफी प्रभावित किया। बाउरी किंग बने लॉरेंस फिशबर्न हालांकि फिल्म में ज्यादा देर नहीं दिखते लेकिन जब भी वह परदे पर आते हैं, जॉन विक को नया जीवनदान दे जाते हैं। विंस्टन के किरदार में इयान मैकशेन एक बार फिर अपनी आभा से दर्शकों को प्रभावित करने में सफल रहते हैं।
दिलचस्प एडल्ट एक्शन फिल्म
अपने लेखकों शे हेटन और माइकल फिंच के साथ मिलकर निर्देशक चैड स्टाहेल्स्की ने फिल्म ‘जॉन विक 4’ में इस सीरीज की दुनिया को अमेरिका से बाहर का विस्तार दिया है। ये कोशिश अपराध की इस काल्पनिक दुनिया को विस्तारित करने की भी दिखती है। इसी के चलते इस बार फिल्म में तमाम नए किरदार और नए स्थान हैं। पेरिस के व्यस्ततम इलाके में रफ्तार से भागती कारों के बीच फिल्माया गया फिल्म का एक्शन सीन चैड की बेहतरीन कल्पनाशक्ति का नमूना है। फिल्म हालांकि इस सीरीज की दूसरी फिल्मों से सबसे ज्यादा अवधि (करीब दो घंटे 50 मिनट) की है लेकिन इसके बावजूद ये फिल्म कहीं बोर नहीं करती है। तेज रफ्तार एक्शन दृश्य और बार बार होने वाले खूनखराबे को हर बार एक नए तरीके से फिल्माने में फिल्म की एक्शन टीम ने काबिले तारीफ काम किया है। खासतौर से चलते डिस्कोथेक में फिल्माया गया एक्शन सीन सांसें रोक देने वाला है। फिल्म का बैकग्राउंड म्यूजिक जॉन विक की फितरत के साथ सही जुगलबंदी करता है और फिल्म की सिनेमैटोग्राफी और संपादन भी अपना असर छोड़ने में कामयाब हैं।