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ऐंटमैन एंड द वास्प: इन 5 वजहों से देखें नन्हें सुपरहीरोज की यह फिल्म

Sat, 14 Jul 2018 01:58 PM IST
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Updated Sat, 14 Jul 2018 01:58 PM IST
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Five Reasons To Watch Marvel Studios Film Ant Man and The Wasp
अवेंजर सीरीज में शामिल हुआ ऐंटमैंन

अगर आपकी कल्पना इस हद तक जा सकती है जहां इमारत और इंसान एक चीटीं से भी छोटी दिखने लगे, तो कुर्सी की पेटी बांध लीजिए। मार्वेल स्टूडियोज की एक और सुपरहीरो वाली फिल्म 'ऐंटमैन एंड द वास्प' भारतीय सिनेमाघरों की चौखट पर दस्तक दे चुकी है। वैसे तो मारवल कॉमिक्स पर आधारित हर फिल्म की कहानी में एक्शन की छौंक और कॉमेडी का तड़का होता है। मगर इन नन्हें और ताकतवर सुपरहीरोज की फिल्म कई वजहों से आपको इसे देखने पर मजबूर कर सकती है।

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दिलचस्प है कहानी

फिल्म 'ऐंटमैन एंड द वास्प' फिल्म 'ऐंटमैन' का सीक्वेल है। फिल्म के तीन मुख्य पात्र हैं- स्कॉट लैंग उर्फ ऐंटमैन (पॉल रूड), डॉक्टर हैंक पेम (माइकल डगलस) और उनकी बेटी होप उर्फ वास्प (इवेंजलाइन लिली)। कहानी ऐंटमैन की नजरबंदी से शुरू होती है। अमेरिकी खूफिया एजेंसी ने स्कॉट लैंग यानि ऐंटमैन को कैद कर रखा है। उधर एक अन्य वास्प जैनेट वैन (जो होप की मां है) क्वॉन्टम फील्ड में बंद है। सोवियत मिसाइल को नाकाम करते वक्त वह वहां कैद हो गई थी। जैनेट के पति और बेटी को लगता है कि वह मर चुकी है। मगर जब जैनेट एंटमैन को संपर्क करती है, तो वह उसके परिवार के साथ मिलकर उसे बचाने निकलता है। ये तीनों जैनेट को बचा पाते हैं या नहीं, यही इस फिल्म की कहानी है।

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ऐंटमैन बना अवेंजर

अब ऐंटमैन भी अवेंजर बन चुका है। साल 2019 में आने वाली सीरीज की फिल्म में ऐंटमैन अहम किरदार निभाते दिखेगा। इसका इशारा फिल्म 'ऐंटमैन एंड द वास्प' के क्रेडिट स्क्रोल के दौरान ही दे दिया गया गया है।

मजेदार सीन
एक कहावत है 'जहां मिले पांच माली, वहां बाग हमेशा खाली।' फिल्म 'ऐंटमैन एंड द वास्प' के साथ भी ऐसा ही कुछ हुआ है। छह लेखकों ने मिलकर इस फिल्म की पटकथा तैयार की है। मगर इस फिल्म की रफ्तार वैसी नहीं है जितनी एक सुपरहीरो वाली फिल्म की होनी चाहिए। फिल्म के पहले भाग की तुलना में भी यह इस मामले में कमजोर लगती है। मगर इसके सीन्स फिल्म की धीमी स्क्रिप्ट पर बखूबी पर्दा डालते हैं। एक बड़ी इमारत को कार में रखना हो या फिर चींटी का विशालकाय हो जाना या फिर चींटी सेना की जांबाजी हो, फिल्म में कई सीन्स ऐसे हैं जो लॉजिक से परे लगते हैं, मगर दूसरी ही तरह मनोरंजक भी हैं। 

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डबिंग
आमतौर पर सिने दर्शकों को इस बात की तकलीफ होती है कि हॉलीवुड फिल्मों की हिन्दी में डबिंग हास्यास्पद होती है। मगर इस मामले में 'ऐंटमैन ऐंड द वास्प' राहत देती है। कम से कम फिल्म 'डेडपूल-2' की डबिंग की तुलना में तो यह बहुत बढ़िया है। फिल्म के डायलॉग्स गुदगुदाते हैं, थ्रीडी में एक्शन भी बांधे रखते हैं। 

नोट: फिल्म को देखने के बाद चींटियों के प्रति नजरिया बदल सकता है, शायद आप हाथी और चींटी वाले जोक्स को भी गंभीरता से लेने लगें!!
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