'इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ श्रीगंगानगर' जनवरी में, जानिए इसके बारे में सबकुछ
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फिल्म फेस्टिवल का मतलब ?
कमर्शियल सिनेमा के अलावा अच्छे सिनेमा को प्रोत्साहित करने के लिए फिल्म फेस्टिवल आयोजित होते हैं, जहां आर्ट और नए तरह के सिनेमा पर फोकस होता है, फिल्में दिखाई जाती हैं, फिल्मों के प्रीमियर होते हैं, फिल्मों पर चर्चा होती हैं, डिस्कशन होते हैं, फेस्टिवल में शामिल फिल्मों में से जूरी श्रेष्ठ फिल्मों और उनके कलाकारों और टीम को अवॉर्ड देती हैं।
गंगानगर में क्या- क्या होगा?
राजस्थान सरकार से पंजीकृत ट्रस्ट के बैनर पर आयोजित होने वाले 5 दिन के इस आयोजन में विश्व भर से फीचर फिल्में, शॉर्ट फिल्में, डॉक्यूमेंट्री फिल्में दिखाई जाएगी। दुनिया भर से फिल्ममेकर आएंगे। एक्टिंग वर्कशॉप होगी। डॉक्युमेंट्री फिल्म मेकिंग पर एक दिन की सेमिनार होगी। एक संगीतमय शाम होगी। आखिरी दिन अवार्ड सेरेमनी होगी।
कौन हैं इसके पीछे?
फाउंडर डायरेक्टर्स हैं: सुभाष सिंगठिया और डॉ. दुष्यंत। सुभाष सिंगठिया शहर के जाने माने लेखक और वरिष्ठ पत्रकार हैं, कवि तथा साहित्यिक पत्रिका 'पूर्वकथन' के संपादक के रूप में हिंदी साहित्य में उनकी बड़ी प्रतिष्ठा है। वहीं, दुष्यंत मूलतः इसी इलाके के रहने वाले हैं, इतिहास में डॉक्टरेट हैं और बेस्टसेलर लेखक हैं। उनकी 6 किताबें पेंगुइन और राजकमल जैसे चोटी के प्रकाशकों ने छापी है। इन दिनों मुम्बई में फ़िल्म लेखन से जुड़े हैं।
इन दोनों के अलावा देश- विदेश के अनेक फिल्म निर्देशक और फ़िल्म प्रोफेशनल यानी निर्माता, लेखक, गीतकार, सिनेमेटोग्राफर, संगीतकार, गायक और फिल्म पत्रकार इस फेस्टिवल से सलाहकार के तौर पर जुड़े हैं और जुड़ते जा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि श्रीगंगानगर के इस पहले फिल्म फेस्टिवल को जयपुर इंटरनेशनल फ़िल्म फेस्टिवल (यानी जिफ) टेक्निकल सपोर्ट कर रहा है, वहीं झारखंड का नेतरहाट फिल्म इंस्टिट्यूट इसका क्रिएटिव पार्टनर है।
शहर और इलाके को फायदा?
सुभाष सिंगठिया ने बताया कि यह आयोजन इलाके में एक नई घटना है, जिससे यह इलाक़ा दुनिया के सांस्कृतिक नक्शे पर अपनी जगह बनाएगा, इलाके की प्रतिभाओं को फिल्मी दुनिया की इंटरनेशनल शख्सियतों को करीब से देखने, बात करने और जुड़ने के मौके मिलेंगे। शहर के पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, देशी ही नहीं विदेशी फिल्मकारों के आने से शहर को बिजनेस के लिहाज से फायदा होगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस फेस्टिवल से इलाके की कहानियों पर फ़िल्म बनने के रास्ते खुलेंगे और लोकल टैलेंट फ़िल्म संसार के अलग -अलग कामों के लिए आगे आ पाएँगे, फेस्टिवल से उन्हें प्रेरणा, मार्गदर्शन और मौका मिलेगा।
छोटे शहर में क्यों?
मुम्बई से शहर आए हुए डॉ दुष्यंत ने कहा कि ऐसे आयोजन बड़े शहरों में होते हैं क्योंकि वहां करना आसान होता है, पर हमें लगता है कि चुनौतीपूर्ण भले ही हो पर छोटे शहरों में ऐसे आयोजनों की सार्थकता और ज़रूरत ज्यादा है, दुनिया में कई ऐसे शहर या छोटी जगहें है, जिन्हें किसी न किसी फेस्टिवल के कारण ही दुनिया में जाना गया, जैसे कान फिल्म फेस्टिवल। और हमारे इलाके की मिट्टी में तहज़ीब घुली हुई है, हमें उस तहज़ीब पर भरोसा है, उसे आगे लेकर जाना है।
नोजगे स्कूल होगा वेन्यू पार्टनर
विशेष फोकस
फेस्टिवल में पंजाबी सिनेमा और बच्चों के सिनेमा पर अलग सेक्शन होगा। यानी पंजाबी और बच्चों की फिल्में दिखाई जाएगी, उनसे जुड़े कलाकारों से मिलने का अवसर मिलेगा।
प्रवेश कैसे होगा?
फिल्मों की स्क्रीनिंग में एंट्री नि:शुल्क यानी 'पहले आओ, पहले पाओ' के आधार पर होगी परन्तु सुरक्षा और व्यवस्था कारणों से रजिस्ट्रेशन करवाना होगा जो ऑनलाइन और ऑन द स्पॉट दोनों रहेगा, रजिस्ट्रेशन भी निःशुल्क ही होगा। म्यूजिकल इवनिंग, ओपनिंग और क्लोजिंग सेरेमनी का प्रवेश विशेष पास से होगा।