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Dolly Singh: ‘ये दांत थोड़े ठीक करा लो’, डॉली ने बताया शक्ल-सूरत के चलते फिल्मों में नहीं मिलता है काम

Mon, 29 Sep 2025 12:42 PM IST
आराध्य त्रिपाठी एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: आराध्य त्रिपाठी Updated Mon, 29 Sep 2025 12:42 PM IST
सार

Dolly Singh On Rejection And Industry: इन्फ्लुएंसर से एक्ट्रेस बनीं डॉली सिंह ने इंडस्ट्री को लेकर बात की। उन्होंने बताया कि शक्ल और सूरत के आधार पर कैसे लोगों को काम मिलता है।

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Dolly Singh On Rejections Over Body Face And Skin Color Says No Offers After Doing Thank You For Coming
डॉली सिंह - फोटो : इंस्टाग्राम-@dollysingh

विस्तार

इन्फ्लुएंसर से फिल्मों में कदम रखने वाली डॉली सिंह ने ‘थैंक्यू फॉर कमिंग’ के बाद फिल्मों में काम न मिलने को लेकर बात की। साथ ही उन्होंने बॉडी शेमिंग को लेकर भी बात की और बताया कि शक्ल-सूरत के चलते उन्हें ताने मिले। फिल्मों के लिए शक्ल सूरत कितनी मायने रखती है।

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कई बार लोग आपके मुंह पर नहीं कहते, ‘आप पतले हो’
बॉलीवुड बबल के साथ बातचीत के दौरान डॉली ने बताया कि कोई भी आपको सीधे तौर पर यह नहीं बताता कि आपका शरीर, स्किन या रूप-रंग के कारण आपको मना किया जा रहा है। लेकिन ऐसा हो सकता है। कभी-कभी, निर्देशक और लेखक किसी भूमिका के लिए एक विशिष्ट रूप-रंग को ध्यान में रखते हैं और अगर आप उसमें फिट नहीं बैठते, तो आपका चयन नहीं होता। कोई तुम्हारे मुंह पर शायद ये न कहे कि 'अरे तुम ज्यादा पतली हो तो हम तुम्हें नहीं ले सकते'। कहीं-कहीं ये ठीक भी है। मुझे भी लगता है कि एक खास रोल के लिए या सीन के लिए निर्देशक-राइटर ऐसा सोचते हैं, तो ठीक है। तब आप कह सकते हैं कि आप इस रोल के लिए फिट नहीं बैठते हैं।

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जब निर्देशक ने डॉली के दांतों को लेकर बोला
अभिनेत्री ने आगे कहा कि एक बार, एक निर्देशक ने मुझे बोला था कि 'यार, ये दांत थोड़े, ठीक करा लो'। उस दिन उसने मेरे मुंह पे बोल दिया। लेकिन जहां पर मैं मौजूद नहीं हूं, वहां तो निश्चित ही ये होता ही होगा। सिर्फ मेरे लिए ही नहीं बल्कि सबके ही साथ ये होता होगा। ‘ये थोड़ा ज्यादा मोटा है' या 'ये थोड़ा ज्यादा पतली है'। इसलिए इसको नहीं ले सकते। तो जो मैं फील करती हूं, हर बार जरूरी नहीं है कि वो चीज चले। क्योंकि कुछ भूमिकाओं में वो फैक्टर मायने नहीं रखता, जब तक कोई व्यक्ति उस किरदार को निभा सकता है। मुझे लगता है कि वास्तव में ऐसा होना चाहिए।

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इन्फ्लुएंसर्स को लेकर बना है स्टीरियोटाइप
डॉली ने भूमि पेडनेकर के साथ 'थैंक यू फॉर कमिंग' से बॉलीवुड में डेब्यू करने के बाद काम न मिलने के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा कि कंटेंट क्रिएशन और एक्टिंग के साथ, यह एक दोधारी तलवार है, कि हमें भूमिकाएं मिल तो जाती हैं, पर वही दो मिनट के रोल मिलेंगे। इनमें आपको वही करना होगा जो आप आमतौर पर अपने इंस्टाग्राम पर करते हैं, वही किरदार। फिर आपको प्रमोशन के लिए बुलाया जाएगा और फिर आपकी फॉलोइंग को पुश करा जाएगा। वे कहेंगे कि 'आओ, फिल्म का प्रमोशन करो।'
तो एक थोड़ा इस्तेमाल होता है। और ये भी लगता है कि 'यार, ठीक है, इसमें मुझे मजा आया।' पर अब मुझे एक्टिंग में कुछ बड़ा भी करना है न। मुझे और चीजों को एक्सप्लोर करना है, पर वो करने को नहीं मिलता है। 'थैंक यू फॉर कमिंग' के बाद भी मेरी जिंदगी में कोई खास बदलाव नहीं आया। न ही मेरे पास ऑफर की लाइन लग गई। क्योंकि इन्फ्लुएंसर को लेकर एक स्टीरियोटाइप बन गया है कि ये यह काम ही कर सकता है।

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