विश्व फोटोग्राफी दिवस 2020: यहां देखिए मशहूर फोटोग्राफर संदेश कडूर की बेहतरीन तस्वीरें और उनके संस्मरण
विश्व फोटोग्राफी दिवस पर सोनी बीबीसी अर्थ के प्रतिष्ठित भारतीय वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर्स से अमर उजाला ने बातचीत की और उनसे हासिल कीं कुछ बेहतरीन तस्वीरें, जो उनके कैमरे के जरिए प्रकृति की सबसे रहस्यमयी कहानियां बयां करती हैं। इसकी पहली कड़ी में बात संदेश कडूर से। संदेश कडूर ने सोनी बीबीसी अर्थ पर प्लैनेट अर्थ 2 और डायनेस्टीज जैसे शो बनाने के लिए योगदान दिया है। वह एक वाइल्ड लाइफ फिल्ममेकर और कन्जर्वेशन फोटोग्राफर हैं।
अपने ‘सबसे बेहतरीन फोटोग्राफी क्षण’ और उसके पीछे की कहानी के बारे में बताते हुए संदेश कहते हैं, “मुश्किलें जितनी ज्यादा होती है उतनी ही गहरी उस क्षण से जुड़ी भावनाएं होती हैं, क्योंकि एक सफल तस्वीर के साथ आप उस लम्हे को सालों तक बार बार जी सकते हैं और इसे कई लोगों के साथ साझा कर सकते हैं। जब हम बीबीसी के प्लैनेट अर्थ 2 के लिए काजीरंगा नेशनल पार्क में फिल्मांकन कर रहे थे, तो घास के मैदान में एक बाघ का कैमरा ट्रैप शॉट हासिल करने में लगातार विफल हो रहे थे या तो हाथियों, गैंडों, जंगली भैसों, भालूओं के कारण या फिर केवल नमी से हमारी हर कोशिश नाकाम हो रही थी।”
फिर इसके लिए क्या प्लानिंग की? इस सवाल के जवाब में संदेश कहते हैं, “एक दिन, जब हमने नए सिरे से एक बार फिर सारी योजना बनाई तो सबकुछ एकदम सही रहा और जैसे ही मैंने कैमरा ट्रैप बॉक्स खोला और हमें घास पर चलते हुए एक बाघ की तस्वीर मिल गई। यही वो चीज थी, वो क्षण था जिसका हम इंतज़ार कर रहे थे और यह क्षण हमेशा के लिए कैमरे में कैद कर लिया गया था। जब भी मैं उस तस्वीर को देखता हूं, तो इससे मुझे उस एक शॉट हासिल करने के लिए उन तमाम विफलताओं की याद आ जाती हैं जिनसे हमें गुजरना पड़ा था।”
तो संदेश ने क्या कभी अपनी यात्रा के दौरान अपनी जान पर खतरा महसूस किया? वह बताते हैं, “यदि जंगल से तुलना करें तो हाइवे पर गाड़ी चलाते वक्त या अपने शहर में सड़क पार करते वक्त जान के लिए खतरे वाली घटनाएं ज़्यादा होती हैं। चाहे यहां हो या वहां हर किसी को सभी जरूरी सावधानियां बरतनी चाहिए और हालांकि हम इस तरह की स्थितियों से बचने की कोशिश करते हैं लेकिन फिर भी ऐसी स्थितियां कभी कभी खड़ी हो ही जाती हैं।”
अपनी बात आगे बढ़ाते हुए वह कहते हैं, “क्लाउडेड लेपर्ड से जुड़ी एक स्टोरी पर काम करते समय मुझ पर एक मच्छर द्वारा हमला हुआ, जिसके कारण मुझे सेरीब्रल मलेरिया हो गया। यह मेरे द्वारा अनुभव किया गया मौत के सबसे करीब होने का एहसास था और मैं सभी को सबसे छोटे जंगली जीवों से भी सुरक्षित रहने की सावधानी बरतने के लिए कहूंगा और अक्सर वो सबसे छोटी चीज़ें ही हैं जिनका असर सबसे ज्यादा होता है।”