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Girish Kasaravalli : नेशनल अवॉर्ड जीत चुकी 'द्वीपा' का हुआ ऐसा हाल, नहीं थे फिल्म को बचाने के लिए इतने रुपये
Sat, 09 Mar 2024 11:30 AM IST
गरिमा शर्मा
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Published by: गरिमा शर्मा
Updated Sat, 09 Mar 2024 11:30 AM IST
सार
हैरत की बात है कि दो बार राष्ट्रीय पुरस्कार जीतने वाली फिल्म के कैमरा नेगेटिव को एक समय पर खराब होने के लिए छोड़ दिया गया।
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Girish Kasaravalli
- फोटो : instagram
विस्तार
फिल्म चाहे शाॅर्ट ड्यूरेशन की डाॅक्युमेंट्री हो या फिर कोई तीन घंटे की फिल्म, इसे बनाने के लिए पूरी मेहनत, पैसा और समय लगता है, लेकिन हैरत की बात है कि दो बार राष्ट्रीय पुरस्कार जीतने वाली फिल्म के कैमरा नेगेटिव को एक समय पर खराब होने के लिए छोड़ दिया गया। क्या है पूरा मामला यह जानने के लिए पढ़ें पूरी खबर।
जब नहीं थे इतने पैसे
यह बात है कन्नड़ फिल्म निर्माता गिरीश कासरवल्ली की फिल्म ‘द्वीपा’ की, जो 2002 में आई थी। जब निर्माता के पास 30,000 रुपये नहीं थे, तो इस फिल्म के नेगेटिव्स को छह साल तक के लिए यूं ही खराब होने के लिए छोड़ना पड़ा। यह कोई साधारण फिल्म नहीं है, बल्कि दो बार राष्ट्रीय पुरस्कार जीत चुकी फिल्म है। खास बात यह है कि इसमें तेलुगू सुपरस्टार सौंदर्या ने अभिनय किया था। इन्होंने फिल्म को प्रोड्यूस भी किया था। फिल्म के कैमरा नेगेटिव्स को एक ऐसी लैब में ले जाया गया जो वातानुकूलित नहीं थी और इसके अभाव में नेगेटिव खराब हो जाते हैं। लैब ने नेगेटिव्स फिल्ममेकर को देने के लिए एकमुश्त शुल्क 30,000 रुपये मांगा।
यह भी पढ़ें: Anurag Kashyap: सिनेमा की वजह से बेटी से अपने रिश्ते खराब कर बैठे थे अनुराग, बाल मनोवैज्ञानिक से ली थी मदद
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पहले शुल्क भुगतान को कहा गया
फिल्म निर्माता कसारवल्ली ने इस बारे में बताया, ‘जब वह लैब बंद हो गई, तो पहले शुल्क का भुगतान करने को कहा और फिर नेगेटिव्स देने की बात कहीं। उस समय ऐसा करना इसलिए मुश्किल हो गया था क्योंकि फिल्म की निर्माता सौंदर्या और उनके भाई अमरनाथ की 2004 में विमान हादसे में मौत हो गई। सौंदर्या के पति जी एस रघु फिल्म लाइन से नहीं थे। दुविधा यह भी थी कि नेशनल फिल्म आर्काइव ऑफ इंडिया ने फिल्मों को स्टोर करना बंद कर दिया था क्योंकि यह बंद होने वाला था और इसका विलय होने वाला था। नेगेटिव्स मिल भी जाते, तो रखने के लिए कोई जगह नहीं थी। निजी अभिलेखागार भी मासिका किराया बहुत लेते थे।'
यह भी पढ़ें: पहले गुपचुप रचाया निकाह, अब नई दुल्हन संग रोमांटिक हुए आदिल
रिलीज करने को तैयार हुआ लैब
हालांकि, फिल्म के लिए खुशी का मौका आया। इसके बाद 4 मार्च को 15वें बेंगलुरु इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में 'द्वीपा' पर एक मास्टर क्लास सेशन हुआ, जिसमें जाने-माने सिनेमेटोग्राफर जी एस भास्कर, जिन्होंने 'गांधी' जैसी फिल्मों पर कसारवल्ली के साथ काम किया था, ने बताया था कि प्रसाद लैब अब फिल्म रिलीज करने के लिए राजी हो गए हैं। भास्कर ने कहा,‘मुझे अभी इस बारे में बताया गया है। मुझे लगता है कि सभी औपचारिकताएं पूरी होने में दो हफ्तों का समय लगेगा। देखना होगा कि नेगेटिव को कितना नुकसान पहुंचा है।’
यह भी पढ़ें: Aamir Khan: फैन ने आमिर से की पठान जैसी फिल्में बनाने की गुजारिश, अभिनेता ने की लापता लेडीज देखने की रिक्वेस्ट
आ सकता है 5 लाख तक का खर्च
फिलहाल मुंबई स्थित फिल्म हेरिटेज फाउंडेशन है, जहां ऐसे खराब हुई फिल्मों को दोबारा ठीक करने का काम किया जाता है। जब एफएचएफ के डायरेक्टर शिवेंद्र सिंह से बात की गई, तो उनका कहना था कि अगर द्वीपा उनके पास आती है, तो वह इसे रिस्टोर करने का काम जरूर करेंगे। कसारवल्ली ने बताया कि अगर इसका आधा भाग भी रिस्टोर किया गया, तो करीब 5 लाख रुपये तक का खर्च आ सकता है। अब इतना तो तय है कि जो भी 'द्वीपा' को रिस्टोर करने के लिए काम करता है, यह सिनेमा के प्रति उसका प्यार ही दर्शाएगा।
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जब नहीं थे इतने पैसे
यह बात है कन्नड़ फिल्म निर्माता गिरीश कासरवल्ली की फिल्म ‘द्वीपा’ की, जो 2002 में आई थी। जब निर्माता के पास 30,000 रुपये नहीं थे, तो इस फिल्म के नेगेटिव्स को छह साल तक के लिए यूं ही खराब होने के लिए छोड़ना पड़ा। यह कोई साधारण फिल्म नहीं है, बल्कि दो बार राष्ट्रीय पुरस्कार जीत चुकी फिल्म है। खास बात यह है कि इसमें तेलुगू सुपरस्टार सौंदर्या ने अभिनय किया था। इन्होंने फिल्म को प्रोड्यूस भी किया था। फिल्म के कैमरा नेगेटिव्स को एक ऐसी लैब में ले जाया गया जो वातानुकूलित नहीं थी और इसके अभाव में नेगेटिव खराब हो जाते हैं। लैब ने नेगेटिव्स फिल्ममेकर को देने के लिए एकमुश्त शुल्क 30,000 रुपये मांगा।
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पहले शुल्क भुगतान को कहा गया
फिल्म निर्माता कसारवल्ली ने इस बारे में बताया, ‘जब वह लैब बंद हो गई, तो पहले शुल्क का भुगतान करने को कहा और फिर नेगेटिव्स देने की बात कहीं। उस समय ऐसा करना इसलिए मुश्किल हो गया था क्योंकि फिल्म की निर्माता सौंदर्या और उनके भाई अमरनाथ की 2004 में विमान हादसे में मौत हो गई। सौंदर्या के पति जी एस रघु फिल्म लाइन से नहीं थे। दुविधा यह भी थी कि नेशनल फिल्म आर्काइव ऑफ इंडिया ने फिल्मों को स्टोर करना बंद कर दिया था क्योंकि यह बंद होने वाला था और इसका विलय होने वाला था। नेगेटिव्स मिल भी जाते, तो रखने के लिए कोई जगह नहीं थी। निजी अभिलेखागार भी मासिका किराया बहुत लेते थे।'
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रिलीज करने को तैयार हुआ लैब
हालांकि, फिल्म के लिए खुशी का मौका आया। इसके बाद 4 मार्च को 15वें बेंगलुरु इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में 'द्वीपा' पर एक मास्टर क्लास सेशन हुआ, जिसमें जाने-माने सिनेमेटोग्राफर जी एस भास्कर, जिन्होंने 'गांधी' जैसी फिल्मों पर कसारवल्ली के साथ काम किया था, ने बताया था कि प्रसाद लैब अब फिल्म रिलीज करने के लिए राजी हो गए हैं। भास्कर ने कहा,‘मुझे अभी इस बारे में बताया गया है। मुझे लगता है कि सभी औपचारिकताएं पूरी होने में दो हफ्तों का समय लगेगा। देखना होगा कि नेगेटिव को कितना नुकसान पहुंचा है।’
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आ सकता है 5 लाख तक का खर्च
फिलहाल मुंबई स्थित फिल्म हेरिटेज फाउंडेशन है, जहां ऐसे खराब हुई फिल्मों को दोबारा ठीक करने का काम किया जाता है। जब एफएचएफ के डायरेक्टर शिवेंद्र सिंह से बात की गई, तो उनका कहना था कि अगर द्वीपा उनके पास आती है, तो वह इसे रिस्टोर करने का काम जरूर करेंगे। कसारवल्ली ने बताया कि अगर इसका आधा भाग भी रिस्टोर किया गया, तो करीब 5 लाख रुपये तक का खर्च आ सकता है। अब इतना तो तय है कि जो भी 'द्वीपा' को रिस्टोर करने के लिए काम करता है, यह सिनेमा के प्रति उसका प्यार ही दर्शाएगा।