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'हैदर' के बाद कश्मीर पर विशाल भारद्वाज की एक और फिल्म

Sun, 25 Jan 2015 08:37 AM IST
Updated Sun, 25 Jan 2015 08:37 AM IST
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Vishal Bhardwaj's another film on Kashmir and Haider

पिछले साल की सबसे चर्चित फिल्म 'हैदर' बनाने वाले विशाल भारद्वाज कश्मीर पर एक और फिल्म बनाना चाहते हैं। जयपुर साहित्य उत्सव में विशाल भारद्वाज ने अपनी चर्चित फ़िल्म 'हैदर' में सिर्फ़ एक पक्षीय हक़ीक़त दिखाए जाने के आरोप का जवाब देते हुए इस बात का खुलासा किया। उन्होंने कहा कि वे कश्मीरी पंडितों के निर्वासन की पीड़ा पर भी फ़िल्म बनाना चाहते हैं।

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'हैदर' पर आधारित सत्र में खचाखच भरे पंडाल में यह सवाल छाया रहा कि उनकी फ़िल्म विलियम शेक्सपियर के प्रसिद्ध नाटक 'हैमलेट' के कितनी क़रीब है और भारद्वाज इसके माध्यम से क्या वैसा ही सशक्त राजनीतिक संदेश देना चाह रहे थे?

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कश्मीर की मानव त्रासदी दिखाना चाहते हैं विशाल

Vishal Bhardwaj's another film on Kashmir and Haider

विशाल ने एकतरफ़ा फ़िल्म बनाने के आरोपों को दरकिनार करते हुए उन्होंने कहा कि वह 'सिर्फ़ कश्मीर की मानव त्रासदी' को रेखांकित करना चाहते थे। "एक फ़िल्म निर्माता के रूप में हम इतने महत्वपूर्ण मुद्दे को कैसे अनदेखा कर सकते हैं?"

सत्र में अधिकतर सवालों के जवाब फ़िल्म के सह-लेखक बशारत पीर ने दिए जो स्वयं कश्मीर से संबंध रखते हैं और उनकी पुस्तक में भी कश्मीर के दर्द को उकेरा गया है। साथ ही विशाल का कहना था कि कश्मीरी पंडितों की त्रासदी छोटी नहीं है लेकिन 'हैदर' में यह दिखाना संभव नहीं था।

'हैदर' में भारतीय सेना पर पूछे सवाल पर जताई नाराजगी

Vishal Bhardwaj's another film on Kashmir and Haider

फ़िल्म हैदर में भारतीय सेना की बहुत अच्छी छवि नहीं दिखाने के सवाल पर पीर ने नाराज़गी ज़ाहिर की और कहा कि उन्होंने जो दिखाया वह नया नहीं है और बहुत बार अख़बारों की सुर्ख़ियों में रह चुका है।

उन्होंने कहा कि वह कश्मीरी पंडितों के दर्द को फ़िल्म में थोड़ा सा दिखाकर ख़ानापूर्ति नहीं करना चाहते थे। भारद्वाज ने कहा कि उन्हें ख़ुशी है कि उनकी फ़िल्म सफल रही, सराही गई और ज़िन्दगी में पहली बार अच्छी आय भी हुई।

उन्होंने वर्ष 2000 में 'मिशन कश्मीर' फ़िल्म बनाने वाले विधु विनोद चोपड़ा पर सवाल किया कि वे ख़ुद कश्मीर से हैं फिर उन्होंने अब तक कश्मीरियों के दर्द पर फ़िल्म नहीं बनाई। उनसे तो कोई सवाल नहीं पूछता और सिर्फ़ उन्हें ही दोषी ठहराया जा रहा है?
कहां से लाएं दूसरा फ़ैज़?

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कहां से लाएं फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

Vishal Bhardwaj's another film on Kashmir and Haider

इस मौके पर श्रोता के रूप में उपस्थित फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ की बेटी ने पूछा कि आपने इस फ़िल्म में फ़ैज़ को ही क्यों चुना तो भारद्वाज का जवाब था, "आज के नाम और आज के ग़म के नाम, गुलों में रंग भरे, बादे नौबहार चले'' कहाँ से लिखा जाएगा? फ़ैज़ होते तो पूरी फ़िल्म भी वही लिखते और गाने भी। कहां से लाएं दूसरा फ़ैज़ हम?"

इस मौके पर प्रसिद्ध अभिनेता गिरीश कर्नाड ने कहा कि फिल्म में आख़िरी 20 मिनट में कश्मीर फ़िल्म से कहीं दूर चला जाता है और सिर्फ़ हैमलेट रह जाता है। उनके हिसाब से यही बात फ़िल्म के अंत को कमज़ोर बनाती है।

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