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Hindi News ›   Entertainment ›   Bollywood ›   Top 10 Highlights Of Irffan Khan And Saba Qamar Film 'Hindi Medium'

इन 10 प्वाइंट्स में जानें कैसी है 'हिंदी मीडियम'

Sun, 21 May 2017 01:29 PM IST
रवि बुले
रवि बुले Updated Sun, 21 May 2017 01:29 PM IST
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Top 10 Highlights Of Irffan Khan And Saba Qamar Film 'Hindi Medium'
'हिंदी मीडियम' फिल्म रिव्यू
इस शुक्रवार को इरफान खान और पाकिस्तानी एक्ट्रेस सबा कमर की फिल्म 'हिंदी मीडियम' रिलीज हुई है। भारत में हिंदी-अंग्रेजी के अंतर को दर्शाती इस फिल्म को क्रिटिक्स से भी ठीक-ठाक रिव्यू मिले हैं। अगर आपने भी फिल्म देखने का मन बनाया है तो उससे पहले फिल्म के बारे में ये 10 बाते पढ़ लेंं-
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1. हिंदी के बारे में अच्छी बातें करना सबको अच्छा लगता है। परंतु सच यही है कि हिंदी घर की मुर्गी है। भारत को अब रोटी-कपड़ा-मकान चाहिए तो उसे इंडिया की भाषा अंग्रेजी जाननी पड़ेगी।
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2. फिल्म की नायिका कहती है, ‘इस देश में अंग्रेजी जुबान नहीं है, क्लास (वर्ग) है क्लास...।’ यह कड़वा सच है। बच्चों का भविष्य मां-बाप को डराता है। सरकारी स्कूल में पढ़ेंगे तो अंग्रेजी नहीं सीख पाएंगे। कोई अंग्रेजी में बात करेगा तो उनकी रूह कांप जाएगी। मां-बाप का हिंदी पर से भरोसा उठ गया है। इसलिए बच्चों को फिरंग बनाने की ट्रेनिंग बचपन से जरूरी है।
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3. निर्देशक साकेत चौधरी की फिल्म इन्हीं बातों को सामने लाने की कोशिश है। वह सरकार के शिक्षा के अधिकार (आरटीई) के जरिये गरीबों को भी इंग्लिश मीडियम में पढ़ाने के प्रयास भी बताती है परंतु फिल्म में हकीकत कम और हल्का-फुल्कापन ज्यादा है।

4. चौधरी ने कॉमिक अंदाज में बात की है मगर वह 'थ्री इडियट्स' जैसी तार्कितता और 'तारे जमीन पर' वाली संवेदना को नहीं छू पाते। बहुत पीछे रह जाते हैं।

5. 'हिंदी मीडियम' में मुद्दों की संजीदगी कम और ग्लैमर का दिखावा ज्यादा है। पूरा मध्यमवर्ग, जो वास्तव में हिंदी-अंग्रेजी के द्वंद्व और महंगी शिक्षा के पाटों में बुरी तरह पिस रहा है, वह कहीं नहीं है।

6. कहानी और किरदार कहीं-कहीं नकली लगने लगते हैं। स्कूलों का असली-नकली कोई चेहरा सामने नहीं आता। स्कूलों के अंदर और स्कूलों को लेकर होने वाली राजनीति भी नहीं दिखती।

7. एक अच्छे विषय को गहराई से रिसर्च किए बिना पेश किया गया है। फिल्म ऐसी कोई बात नहीं कहती जो पहले से आपको न पता हो।

8. जो बात 'हिंदी मीडियम' को बचाती है वह तीनों कलाकारों का अभिनय है। इरफान हमेशा की तरह बढ़िया हैं और अपने अंदाज से बांधते हैं। पाकिस्तानी एक्ट्रेस सबा कमर इरफान को अंगुलियों पर नचाने वाली बीवी बनी हैं और इस काम को उन्होंने खूबसूरती से अंजाम दिया है। दीपक डोबरियाल को 'तनु वेड्स मनु' के बाद फिर से उल्लेखनीय भूमिका मिली, जिसमें वह अपनी प्रतिभा से न्याय करते हैं।

9. एडमीशन की दौड़ में मदद करने वाले काउंसलर की भूमिका में तिलोत्तमा शोम उपस्थिति दर्ज कराती हैं। अमृता सिंह, नेहा धूपिया और संजय सूरी खानापूर्ति टाइप की भूमिकाओं में हैं।


10. अगर आप 'हिंदी मीडियम' को लेकर गंभीर न हों और हिंदी तथा हिंदीवालों की समस्याओं के बहाने थोड़ा खुद को गुदगुदाना चाहें तो फिल्म देख सकते हैं।
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