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जाने-माने थियेटर कलाकार शुक्राचार्य का 41 की उम्र में निधन, गांव में गुजार रहे थे दिन
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Updated Sat, 09 Jun 2018 01:13 PM IST
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Sukracharya Rabha
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थियेटर के जाने माने कलाकार शुक्राचार्या रभा हमारे बीच नहीं रहे। 41 साल के शुक्राचार्या रभा का निधन कार्डियक अरेस्ट की वजह से शुक्रवार देर रात हुआ। जानकारी के मुताबिक जिस वक्त उनका निधन हुआ वह अपने गांव में थे जो कि गोलपाला जिले में है। शुक्राचार्य रभा अपने ओपन एयर थियेटर फेस्टिवल के लिए जाने जाते हैं।
शुक्राचार्य रभा ने ग्रामीण आधारित थियेरटर ग्रुप 'बदुंगदुप्पा' की स्थापना की थी। यह थियेटर उनके गांव रामपुर में ही था। साल 1998 में शुक्राचार्य ने कई सारे नाटकों को डायरेक्ट किया। खास बात यह है कि यह सारे नाटक अलग-अलग भाषाओं में थे जिसमें बोडो और नेपाली भाषा शामिल हैं।
इसके साथ ही शुक्राचार्य हर साल ओपन एयर थियेटर फेस्टिवल आयोजित करते थे। जिसे 'अंडर द सल थियेटर' नाम से जानते हैं। इस फेस्टिवल के जरिए उनका मकसद देश और दुनिया के सभी रंगमंच प्रेमियों को सुदूर ग्रामीण इलाकों तक पहुंचाना था।
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शुक्राचार्य के मशहूर नाटक टिखर, चनकॉय, रूपालिम, लोवित, पोईडॉम, मदए मुची, दंगाई, दमाकुची हैं। शुक्राचार्य अपने पीछे पत्नी और दो बच्चों को छोड़ गए हैं।
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शुक्राचार्य रभा ने ग्रामीण आधारित थियेरटर ग्रुप 'बदुंगदुप्पा' की स्थापना की थी। यह थियेटर उनके गांव रामपुर में ही था। साल 1998 में शुक्राचार्य ने कई सारे नाटकों को डायरेक्ट किया। खास बात यह है कि यह सारे नाटक अलग-अलग भाषाओं में थे जिसमें बोडो और नेपाली भाषा शामिल हैं।
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इसके साथ ही शुक्राचार्य हर साल ओपन एयर थियेटर फेस्टिवल आयोजित करते थे। जिसे 'अंडर द सल थियेटर' नाम से जानते हैं। इस फेस्टिवल के जरिए उनका मकसद देश और दुनिया के सभी रंगमंच प्रेमियों को सुदूर ग्रामीण इलाकों तक पहुंचाना था।
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शुक्राचार्य के मशहूर नाटक टिखर, चनकॉय, रूपालिम, लोवित, पोईडॉम, मदए मुची, दंगाई, दमाकुची हैं। शुक्राचार्य अपने पीछे पत्नी और दो बच्चों को छोड़ गए हैं।