बाल ठाकरे के जीवन पर बनी फिल्म ठाकरे में उनकी पत्नी मीना ठाकरे का किरदार करने के बाद से अमृता राव का आत्मविश्वास काफी बढ़ा हुआ दिखने लगा है। जिन सवालों पर पहले वह अक्सर कन्नी काट जाया करती थीं, अब उन सवालों के न सिर्फ वह खुलकर जवाब देती हैं बल्कि उनको परेशान करते रहे मुद्दों पर भी वह बेबाकी से राय रखने लगी हैं।
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- फोटो : file photo
ठाकरे की कामयाबी का जश्न मनातीं अमृता राव से जब हिंदी सिनेमा में स्टार किड्स को ही ज्यादा मौका मिलने की बात चलीं तो उन्होंने पहले तो थोड़ा संभलकर जवाब दिया लेकिन जैसे-जैसे बात आगे बढ़ी वह बेबाक होती गई। अमृता बोलीं, ‘हिंदी फिल्म इंडस्ट्री हो या कोई दूसरी इंडस्ट्री बिना काबिलियत के आपका आगे बढ़ना नामुमकिन है लेकिन हां स्टार किड्स इस मामले में दूसरों से बहुत आगे हैं।'
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अमृता ने आगे कहा कि 'वे खुद को बेहतर तरीके से प्रमोट कर सकते हैं। उनकी नेटवर्किंग जिस स्तर पर होती हैं, वहां तक पहुंचना ही बाहर से आए किसी कलाकार के लिए असंभव है। ये लोग चांदी का क्या सोने का चम्मच मुंह में लेकर पैदा होते हैं और हम जैसे लोगों के लिए इनसे मुकाबले करने का बस एक ही जरिया बचता है और वह है हमारा हुनर।'
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तो क्या सोशल मीडिया के आने से अमृता जैसे कलाकारों का भी हौसला बढ़ा है, इस बारे में खुलकर अपनी राय रखने का? इस सवाल के जवाब में अमृता ने बेबाकी से अपनी राय रखी, ‘हां, जिन मुद्दों पर हमें पहले परेशानी होती थी और हम चुप रहते थे, सोशल मीडिया के आने से अपनी बात अपने चाहने वालों तक पहुंचाना आसान हो गया है। नेपोटिज्म (वंशवाद) का तो मुझे खुद बहुत कड़वा अनुभव है।'
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अमृता ने बताया कि 'एक फिल्म मैं कर रही थी। मेरा नाम भी फाइनल हो गया लेकिन तभी एक स्टार पिता ने प्रोजेक्ट में दखल दिया और मैं बाहर हो गई क्योंकि वह अपने रिश्तेदार को उस फिल्म में कास्ट कराना चाहते थे। ऐसा हुआ भी। मुझे फिल्म से बाहर होने का अफसोस नहीं हुआ। अफसोस हुआ जिस तरीके से मुझे बाहर किया गया। कम से कम फिल्म के निर्देशक तो मुझे फोन करके ये बात बतानी चाहिए थी। मैं इंतजार करती रही और फिल्म उस स्टार किड के साथ शुरू भी हो गई।’