{"_id":"593b7a164f1c1b00399c88f3","slug":"sushant-singh-rajput-and-kriti-sanon-film-raabta-review-in-10-points","type":"story","status":"publish","title_hn":"'राब्ता' देखने जा रहे हैं तो जान ले ये 10 बातें, इरादा बदल जाएगा","category":{"title":"Bollywood","title_hn":"बॉलीवुड","slug":"bollywood"}}
'राब्ता' देखने जा रहे हैं तो जान ले ये 10 बातें, इरादा बदल जाएगा
रवि बुले
Updated Sat, 10 Jun 2017 10:41 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सुशांत सिंह राजपूत और कृति सेनन की फिल्म 'राब्ता' का दर्शकों को काफी समय से इंतजार था। दिनेश विजन के निर्देशन में बनी इस फिल्म को बेहद खराब रिव्यू मिले हैं। अगर इस वीकेंड आपने भी ये फिल्म देखने का मन बनाया है तो ये 10 बातें जरूर पढ़ लें, आपका इरादा बदल जाएगा-
1. पिछले साल ही दर्शकों ने पुनर्जन्म वाली 'मिर्जिया' को हवा में उड़ा दिया था मगर 'राब्ता' को सुशांत-कृति का रोमांस, कुछ हठीली-कॉमिक बातें और बुडापेस्ट के लोकेशन बचाते हैं। फिर भी फिल्म कहीं-कहीं दादा-परदादा के जमाने की लगती है आप उससे कनेक्ट नहीं कर पाते।
2. फिल्मों का भी पुनर्जन्म होता है। वही कहानी, वही सीन, वही काले-गहरे रहस्य और अंत में वही ट्विस्ट। देखा-सुना सब लौट-लौट कर आता है। आप नयापन ढूंढते रह जाते हैं। 'राब्ता' का मामला ऐसा ही है। अगर आपको सुशांत सिंह राजपूत पसंद नहीं तो फिल्म देखना भारी लगेगा।
विज्ञापन
3. राजाओं के जमाने की शताब्दियों पुरानी बातें तो मॉडर्न जमाने के हंगरी में भारतीय हीरो-हीरोइन-खलनायक। सब चुंचु का मुरब्बा बन जाता है। पुनर्जन्म की कहानी के 21वीं सदी से कनेक्शन में कई बातें तर्कहीन लगती हैं।
4. जिम सारभ 'नीरजा' में जितने फिट थे, यहां उतने ही कहानी और संदर्भों से बाहर हैं। इन सबके बीच दीपिका पादुकोण की झलक में चमक नहीं दिखती। निर्देशक के रूप में दिनेश विजन की यह पहली फिल्म है। यहां उनकी दृष्टि उतनी नहीं उभरती जितनी तकनीक, कैमरे और लोकेशन का कमाल।
5. पुनर्जन्म के कथानकों वाली 'मधुमति', 'महल', 'नील कमल', 'कुदरत', 'कर्ज' और 'करन-अर्जुन' जैसी फिल्मों से 'राब्ता' कहीं पीछे है। सुशांत अच्छे ऐक्टर हैं परंतु कृति को सहज होने के लिए कोशिशें करनी पड़ी है।
7. भयंकर युद्ध में प्यार बलिदान मांगता है और सदियों बाद उसकी रंगत फिर नए जमाने में बिखरती है। क्लाइमेक्स समेत आप कुछ तर्कहीन बातें पचा सकें और सिर्फ सुशांत-कृति की कैमेस्ट्री से काम चला सकें तो 'राब्ता' आपके लिए है।
8. हमेशा बकबक करने वाले शिव (सुशांत सिंह राजपूत) का दावा है, ‘लड़की तो मैं ही ले जाऊंगा।’ उसे लगता है कि हर लड़की उससे फ्लर्ट करने के लिए बनी है। इसी सोच के साथ दिलफेंक अंदाज में बढ़ते-बतियाते उसे बुडापेस्ट में सायरा (कृति सैनन) मिलती है और देखते-देखते दोनों में प्यार हो जाता है।
9. यह रोमांस और चुबचुबली बातें सरल रेखा-सी आगे बढ़ रही होती हैं कि खलनायक (जिम सारभ) की एंट्री होती है। अकूत संपत्ति का मालिक शराब कारोबारी। जो अक्सर हेलीकॉप्टर में उड़ता है। अचानक आप पाते हैं कि रोमांस की जगह खलनायक की दीवानगी ने ले ली और नायिका का अपहरण कर लिया। तब पुनर्जन्म का ट्रेक शुरू हो जाता है और एक जांबाज योद्धा को एक बहादुर राजकुमारी से प्यार हो जाता है। परंतु योद्धा के लिए राजकुमारी को पाना आसान नहीं।
10. अभी तक मिले फिल्म के रिव्यू में ये ही बताया जा रहा है कि इस फिल्म को देखना समय की बर्बादी है तो अगर आप अपना समय बचाना चाहते हैं तो इस फिल्म को न ही देखें तो बेहतर होगा।
विज्ञापन
1. पिछले साल ही दर्शकों ने पुनर्जन्म वाली 'मिर्जिया' को हवा में उड़ा दिया था मगर 'राब्ता' को सुशांत-कृति का रोमांस, कुछ हठीली-कॉमिक बातें और बुडापेस्ट के लोकेशन बचाते हैं। फिर भी फिल्म कहीं-कहीं दादा-परदादा के जमाने की लगती है आप उससे कनेक्ट नहीं कर पाते।
विज्ञापन
2. फिल्मों का भी पुनर्जन्म होता है। वही कहानी, वही सीन, वही काले-गहरे रहस्य और अंत में वही ट्विस्ट। देखा-सुना सब लौट-लौट कर आता है। आप नयापन ढूंढते रह जाते हैं। 'राब्ता' का मामला ऐसा ही है। अगर आपको सुशांत सिंह राजपूत पसंद नहीं तो फिल्म देखना भारी लगेगा।
विज्ञापन
3. राजाओं के जमाने की शताब्दियों पुरानी बातें तो मॉडर्न जमाने के हंगरी में भारतीय हीरो-हीरोइन-खलनायक। सब चुंचु का मुरब्बा बन जाता है। पुनर्जन्म की कहानी के 21वीं सदी से कनेक्शन में कई बातें तर्कहीन लगती हैं।
4. जिम सारभ 'नीरजा' में जितने फिट थे, यहां उतने ही कहानी और संदर्भों से बाहर हैं। इन सबके बीच दीपिका पादुकोण की झलक में चमक नहीं दिखती। निर्देशक के रूप में दिनेश विजन की यह पहली फिल्म है। यहां उनकी दृष्टि उतनी नहीं उभरती जितनी तकनीक, कैमरे और लोकेशन का कमाल।
5. पुनर्जन्म के कथानकों वाली 'मधुमति', 'महल', 'नील कमल', 'कुदरत', 'कर्ज' और 'करन-अर्जुन' जैसी फिल्मों से 'राब्ता' कहीं पीछे है। सुशांत अच्छे ऐक्टर हैं परंतु कृति को सहज होने के लिए कोशिशें करनी पड़ी है।
7. भयंकर युद्ध में प्यार बलिदान मांगता है और सदियों बाद उसकी रंगत फिर नए जमाने में बिखरती है। क्लाइमेक्स समेत आप कुछ तर्कहीन बातें पचा सकें और सिर्फ सुशांत-कृति की कैमेस्ट्री से काम चला सकें तो 'राब्ता' आपके लिए है।
8. हमेशा बकबक करने वाले शिव (सुशांत सिंह राजपूत) का दावा है, ‘लड़की तो मैं ही ले जाऊंगा।’ उसे लगता है कि हर लड़की उससे फ्लर्ट करने के लिए बनी है। इसी सोच के साथ दिलफेंक अंदाज में बढ़ते-बतियाते उसे बुडापेस्ट में सायरा (कृति सैनन) मिलती है और देखते-देखते दोनों में प्यार हो जाता है।
9. यह रोमांस और चुबचुबली बातें सरल रेखा-सी आगे बढ़ रही होती हैं कि खलनायक (जिम सारभ) की एंट्री होती है। अकूत संपत्ति का मालिक शराब कारोबारी। जो अक्सर हेलीकॉप्टर में उड़ता है। अचानक आप पाते हैं कि रोमांस की जगह खलनायक की दीवानगी ने ले ली और नायिका का अपहरण कर लिया। तब पुनर्जन्म का ट्रेक शुरू हो जाता है और एक जांबाज योद्धा को एक बहादुर राजकुमारी से प्यार हो जाता है। परंतु योद्धा के लिए राजकुमारी को पाना आसान नहीं।
10. अभी तक मिले फिल्म के रिव्यू में ये ही बताया जा रहा है कि इस फिल्म को देखना समय की बर्बादी है तो अगर आप अपना समय बचाना चाहते हैं तो इस फिल्म को न ही देखें तो बेहतर होगा।