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बदलते भारतीय सिनेमा की 10 बेहतरीन शॉर्ट फिल्में
जनार्दन पांडेय/अमर उजाला, दिल्ली
Updated Sun, 10 Apr 2016 10:22 AM IST
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बीते कुछ महीनों से बॉलीवुड के बड़े निर्माता-निर्देशक-अभिनेता तेजी से शॉर्ट फिल्मों (लघु सिनेमा) का रुख कर रहे हैं। इसकी शुरुआती प्रतिक्रिया यह कि शॉर्ट फिल्मों पर सेंसर बोर्ड की कैंची का डर नहीं रहता। निर्देशक अपनी कल्पना अनुरूप फिल्म गढ़ने को स्वछंद होता है।
हालिया रिलीज और खूब चर्चा पा रही शॉर्ट फिल्म 'इंडिया टुमारो' के निर्देशक इम्तियाज अली कहते हैं, 'सेंसरशिप दृश्यों और भाषा दोनों की होती है। यहां फिल्म मेकर को उससे आजादी है। हर मेकर फिल्म के अलावा भी कुछ बनाना चाहता है और वेब का कंटेंट उसे वह आजादी देता है। अगर वह पूरी तरह से अपने मन की फिल्म वेब के लिए बना पाता है तो बड़े पर्दे के लिए बनने वाला सिनेमा धीरे-धीरे प्योर हो जाएगा।'
कुछ दिनों पहले ही रामगोपाल वर्मा ने अपनी एक शॉर्ट फिल्म का पोस्टर रिलीज कर के हंगमा मचा दिया था। साथ ही उन्होंने सेंसरबोर्ड को चिढ़ाया भी था। उन्होंने एक के बाद एक ट्वीट करके जताया था कि सेंसरबोर्ड जिसकी अनुमति नहीं देता, शॉर्ट फिल्मों में वो मौका मिल सकता है। 'सिंगल एक्स' नाम की उनकी फिल्म के अब तक आए सभी पोस्टर बेहद कामुक हैं।
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इस मुद्दे पर जब हमने इम्तियाज अली से बात की और पूछा कि वेब के लिए हमारे यहां तैयार हो रहा कंटेंट (लघु सिनेमा) ज्यादार सेक्स विषयक है। मेकर सोचते हैं कि इससे जल्दी और ज्यादा हिट मिलेंगे। क्योंकि उनकी फिल्म भी रेडलाइट एरिया पर आधारित है। इस पर इम्तियाज का कहना था कि यह शुरुआत है और शायद इसलिए ऐसा हो रहा है। दूसरों का नहीं कह सकता लेकिन मेरी फिल्म में मैंने सेक्स तो नहीं दिखाया है।
पिछले दिनों यशराज फिल्म्स के बैनर तले वाई फिल्म्स ने छह शॉर्ट फिल्मों के एक पैकेज की जानकारी दी। इसके तहत प्रेम से संबंधित छह शॉर्ट फिल्में पेश की जाएंगी,जिनमें सुपरिचित कलाकार काम करेंगे। इनमें से कुछ आ भी गई। लेकिन उतनी चर्चा का विषय नहीं बनी।
दरअसल,शॉर्ट फिल्में युवा और नई प्रतिभाओं का सामूहिक प्रयास होती हैं। शॉर्ट फिल्मों की वर्तमान लोकप्रियता के पहले युवा निर्देशकों को टीवी ऐसा प्लेटफॉर्म दे रहा था। लेकिन अब ज्यादातर पॉपुलर निर्देशकों के इसी रास्ते पर आने की वजह से युवा प्रतिभाओं थोड़ी निराशा भी है। हालांकि शॉर्ट फिल्मों की लोकप्रियता से एक और फायदा होगा कि छोटे शरों और कस्बों की कहानियां भी ग्लोबल स्तर पर देखी जा सकेंगी। उनमें से जो बेहतर होंगी,वे बाद में फीचर फिल्म का भी रूप ले सकती हैं।
इस क्रम में हम आज आपके सामने कुछ पॉपुलर निर्देशकों और कुछ युवा चेहरों की बेहतरीन शॉर्ट फिल्में लेकर आएं हैं। आप स्वयं तय करें कि यह चलन आने वाले दिनों में किनता सफल हो पाएगा।
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हालिया रिलीज और खूब चर्चा पा रही शॉर्ट फिल्म 'इंडिया टुमारो' के निर्देशक इम्तियाज अली कहते हैं, 'सेंसरशिप दृश्यों और भाषा दोनों की होती है। यहां फिल्म मेकर को उससे आजादी है। हर मेकर फिल्म के अलावा भी कुछ बनाना चाहता है और वेब का कंटेंट उसे वह आजादी देता है। अगर वह पूरी तरह से अपने मन की फिल्म वेब के लिए बना पाता है तो बड़े पर्दे के लिए बनने वाला सिनेमा धीरे-धीरे प्योर हो जाएगा।'
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कुछ दिनों पहले ही रामगोपाल वर्मा ने अपनी एक शॉर्ट फिल्म का पोस्टर रिलीज कर के हंगमा मचा दिया था। साथ ही उन्होंने सेंसरबोर्ड को चिढ़ाया भी था। उन्होंने एक के बाद एक ट्वीट करके जताया था कि सेंसरबोर्ड जिसकी अनुमति नहीं देता, शॉर्ट फिल्मों में वो मौका मिल सकता है। 'सिंगल एक्स' नाम की उनकी फिल्म के अब तक आए सभी पोस्टर बेहद कामुक हैं।
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I am going to dedicate my #RGVtalkies release debut film "Single X" to the Censor Board pic.twitter.com/Fy2KoJn1bU
— Ram Gopal Varma (@RGVzoomin) February 8, 2016
इस मुद्दे पर जब हमने इम्तियाज अली से बात की और पूछा कि वेब के लिए हमारे यहां तैयार हो रहा कंटेंट (लघु सिनेमा) ज्यादार सेक्स विषयक है। मेकर सोचते हैं कि इससे जल्दी और ज्यादा हिट मिलेंगे। क्योंकि उनकी फिल्म भी रेडलाइट एरिया पर आधारित है। इस पर इम्तियाज का कहना था कि यह शुरुआत है और शायद इसलिए ऐसा हो रहा है। दूसरों का नहीं कह सकता लेकिन मेरी फिल्म में मैंने सेक्स तो नहीं दिखाया है।
पिछले दिनों यशराज फिल्म्स के बैनर तले वाई फिल्म्स ने छह शॉर्ट फिल्मों के एक पैकेज की जानकारी दी। इसके तहत प्रेम से संबंधित छह शॉर्ट फिल्में पेश की जाएंगी,जिनमें सुपरिचित कलाकार काम करेंगे। इनमें से कुछ आ भी गई। लेकिन उतनी चर्चा का विषय नहीं बनी।
दरअसल,शॉर्ट फिल्में युवा और नई प्रतिभाओं का सामूहिक प्रयास होती हैं। शॉर्ट फिल्मों की वर्तमान लोकप्रियता के पहले युवा निर्देशकों को टीवी ऐसा प्लेटफॉर्म दे रहा था। लेकिन अब ज्यादातर पॉपुलर निर्देशकों के इसी रास्ते पर आने की वजह से युवा प्रतिभाओं थोड़ी निराशा भी है। हालांकि शॉर्ट फिल्मों की लोकप्रियता से एक और फायदा होगा कि छोटे शरों और कस्बों की कहानियां भी ग्लोबल स्तर पर देखी जा सकेंगी। उनमें से जो बेहतर होंगी,वे बाद में फीचर फिल्म का भी रूप ले सकती हैं।
इस क्रम में हम आज आपके सामने कुछ पॉपुलर निर्देशकों और कुछ युवा चेहरों की बेहतरीन शॉर्ट फिल्में लेकर आएं हैं। आप स्वयं तय करें कि यह चलन आने वाले दिनों में किनता सफल हो पाएगा।
'इंडिया टुमारो' जमकर हो रही है पॉपुलर
बीते एक दशक में शॉर्ट फिल्मों के अनेक प्लेटफॉर्म वजूद में आए हैं। यू ट्यूब और अन्य वीडियों प्लेटफॉर्म इसमें भारी मददगार हो रहे हैं। लव आजकल, जव वी मेट, रॉकस्टार, हाईवे, तमाशा जैसी फिल्में बना चुके इम्तियाज अली का ध्यान अब इस प्लेटफॉर्म की ओर पड़ा है, तो वह यहां 'इंडिया टुमारो' लेकर आए हैं।
'सेक्सोहॉलिक' ने मचाया था हंगामा, समा सिंकदर ने की थी वापसी
सेक्स एडिक्ट एक महिला की जिंदगी पर आधारित यह शॉर्ट फिल्म 'सेक्सोहॉलिक' पिछले महीने सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बनी। कभी टीवी धारावाहिकों में पूरी साड़ी में लिपटी दिखने वाली समा सिकंदर ने इसमें कामुक दृश्यों को नई उचाइयां दीं। शैलेंद्र सिंह निर्देशित इस फिल्म को अकेले यू-ट्यूब पर अब तक 2,899,342 लोग देख चुके हैं।
मैडली लव में साथ आए थे छह देशों के दिग्गज
अनुराग कश्यप समेत दुनियाभर के छह दिग्गज निर्देशकों की यह फिल्म 'मैडली लव' भारत में उतनी सफल तो नहीं रही। लेकिन इसके जरिए भारतीय सिनेमा की एक झलक दुनियाभर के लोगों में पहुंची। यही नहीं भारत में काम करने के लिए लोगों को प्रेरित भी किया। फिल्म देखने लिए राधिका आप्टे के ट्वीट में लिंक लगा हुआ है। इसे यू-ट्यूब पर रिलीज नहीं किया गया था।
Finally!!! This amazing trailer of our film #Madly is out! @anuragkashyap72 @satyadeepmisra http://t.co/bHwhhAGVIZ
— Radhika Apte (@radhika_apte) September 21, 2015
'अहल्या' के बाद छिड़ गई थी नई बहस
साल के शुरुआत में आई राधिका आप्टे फेम शॉर्ट फिल्म 'अहल्या' का असर इतना बढ़ा कि इसके बाद एक बहस छिड़ गई। फिल्म में एक सावल था कि गलतियों के लिए हर बार अहिल्या ही पत्थर क्यों बने। यह फिल्म पौराणिक कथा गौतम ऋषि के श्राप से उनकी पत्नी के पत्थर बनने को फिर से जीवंत किया गया था। हां, इस बार गैर मर्द के साथ संबंध बनाने वाली स्त्री नहीं, पुरुष पत्थर बना करते हैं। सुजोय घोष निर्देशित इस फिल्म को अब तक 5,707,050 लोग देख चुके हैं।
तांडव में मनोज वाजपेयी ने हिला दिया था
एक पुलिसवाले की मानसिक हालत पर आधारित इस फिल्म 'तांडव' में मनोज वाजपेयी ने कमाल का अभिनय किया था। वह कहते हैं कि वह आगे भी ऐसी फिल्में लगातार करना चाहेंगे।
लिटिल टेरेरिस्ट हुई ऑस्कर के लिए नामांकित
भारत के शॉर्ट फिल्म के इतिहास में 'लिटिल टेरिरिस्ट' वह फिल्म है, जिसने भारत में इस विधा को स्थापित किया। अश्विन कुमार की यह फिल्म ऑस्कर अवार्ड के लिए नामांकित की गई थी। एक दस वर्षीय पाकिस्तानी बच्चे के भूलवश भारत सीमा में प्रवेश व उसके बाद उसे वापस उसके देश भेजने की कहानी पर आधारित इस फिल्म को एक बार जरूर देखनी चाहिए। ढूंढकर देखनी चाहिए। हम यहां उपलब्ध फिल्म की मेकिंग और ट्रेलर लगा रहे हैं।
'द डे आफ्टर एवरीडे' से अनुराग ने खूब बटोरी थी सुर्खियां
अनुराग कश्यप उन सफल निर्देशकों में से एक हैं, जो शॉर्ट फिल्मों को फीचर फिल्मों से अधिक प्रभावी मानते हैं। हालांकि वह स्वीकार करते हैं कि यहां से प्रत्यक्ष आमदनी नहीं होती। लेकिन हमेशा उनका ध्यान इस माध्यम पर रहा है। उनकी 'द डे ऑफ्टर एवरीडे' खूब मशहूर हुई थी।
फरहान का सबसे शानदार काम 'पॉजीटिव' में है
फरहान अख्तर की जिंदगी का सबसे अच्छा काम उनकी शॉर्ट फिल्म 'पॉजीटिव' है। वह खुद भी कई मौकों पर मानते हैं कि इस फिल्म को बनाने के लिए उन्होंने खूब मेहनत की थी।
'मोमबत्ती' में दिखी थी शॉर्ट फिल्म की सार्थकता
पुनीत प्रकाश की शॉर्ट फिल्म 'मोमबत्ती' नक्सल क्षत्र में काम करने वाले पुलिस वालों के घरेलू हालात बयां करती एक शानदार फिल्म है। एक बार इसे जरूर देखनी चाहिए। साल 2012 में बनाई गई यह फिल्म शॉर्ट फिल्मों की महत्ता को दर्शाती है।
बाईपास ने दो महान कलाकारों को मौका दिया था
असल में जो सफल फिल्मकार और अभिनेता हैं, उनके लिए खुला आसमान है। वह कई क्षेत्रों में बेहतरीन काम कर सकते हैं। लेकिन जिनमें प्रतिभा है और उन्हें फ्लेटफॉर्म नहीं मिल रही है, तो शॉर्ट फिल्म उनके लिए वरदान साबित हो सकती हैं। बाईपास ऐसी ही एक शॉर्ट फिल्म है। इसमें नवाजुद्दीन सिद्दकी और इरफान को साथ काम करते पहली बार देखा गया था।