Saurabh Shukla: राम गोपाल वर्मा की 'सत्या' के बाद अभिनय नहीं करना चाहते थे सौरभ शुक्ला, खुद किया वजह का खुलासा
सत्या के बाद सौरभ शुक्ला ने अपने कंप्यूटर पर अनगिनत घंटे बिताए और अभिनय भूमिकाओं की तलाश करने के बजाय एक लेखक के रूप में अपने काम में डूबे रहे।
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राम गोपाल वर्मा की फिल्म 'सत्या' में 'कल्लू मामा' के रूप में अपनी बेहतरीन भूमिका के लिए मशहूर सौरभ शुक्ला ने हाल ही में अपने करियर के एक आश्चर्यजनक दौर के बारे में बात की। 1998 की कल्ट क्लासिक में अपनी भूमिका के बाद मिली लोकप्रियता के बावजूद सौरभ शुक्ला ने कबूल किया कि वह लगभग अभिनय से दूर हो गए थे। हाल ही में अपनी अभिनय यात्रा के बारे में बात करते हुए उन्होंने साझा किया कि कैसे 'सत्या' की सफलता ने उन्हें अपेक्षित अवसर या भुगतान नहीं दिया, जिससे उनका ध्यान अभिनय से हटने लगा।
सौरभ को पंसद नहीं आ रही थीं भूमिकाएं
सत्या के बाद सौरभ शुक्ला ने अपने कंप्यूटर पर अनगिनत घंटे बिताए, अभिनय भूमिकाओं की तलाश करने के बजाय एक लेखक के रूप में अपने काम में डूबे रहे। उन्होंने बताया, 'छह साल का एक ऐसा दौर था जब मैं लोगों से कहता था कि मैं अभिनेता नहीं हूं, मैं लेखक हूं। मैं अभिनय नहीं करना चाहता था, क्योंकि मुझे जो भूमिकाएं दी जा रही थीं, वे मुझे पसंद नहीं आ रही थीं।'
सत्या ने मनोज बाजपेयी को दिलाई लोकप्रियता
हालांकि 'सत्या' ने उन्हें और उनके सह-कलाकार मनोज बाजपेयी को लोकप्रियता दिलाई, लेकिन सौरभ इस अवधि को स्टारडम का भ्रम बताते हैं। उन्होंने मजाकिया अंदाज में अपनी उम्मीदों को याद करते हुए कहा कि खुद को साबित करने के बाद उनका पारिश्रमिक बढ़ जाएगा। उन्होंने कहा, 'पैसे उतने नहीं मिलते जितना आपको लगता है।'
ऐसी फिल्में रोज नहीं बनतीं
सौरभ शुक्ल ने 'सत्या' के प्रभाव को याद करते हुए इसे सिनेमा में एक दुर्लभ रत्न बताया। उन्होंने कहा, 'सत्या जैसी फिल्में रोज नहीं बनतीं। आपको कल्लू मामा जैसे किरदार अक्सर देखने को नहीं मिलते।' राम गोपाल वर्मा की प्रशंसित गैंगस्टर ट्रायोलॉजी का हिस्सा यह फिल्म मुंबई के अंडरवर्ल्ड के अपने दमदार चित्रण के लिए मशहूर है। सौरभ शुक्ला और अनुराग कश्यप द्वारा सह-लिखित इस फिल्म में जेडी चक्रवर्ती, उर्मिला मातोंडकर ने भी अहम भूमिकाएं निभाईं।