33 साल बाद ‘खलनायक रिटर्न्स’, संजय दत्त ने की नई फिल्म की घोषणा; मेकर्स ने जारी किया फर्स्ट लुक वीडियो
Khalnayak Returns: संजय दत्त 33 साल बाद अपनी सुपरहिट फिल्म खलनायक का सीक्वल लेकर आ रहे हैं। जानिए फर्स्ट लुक में किस अंदाज में दिखे संजू…
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33 साल पहले आई संजय दत्त की आईकॉनिक फिल्म ‘खलनायक’ आज भी लोगों को याद है। लेकिन अब 33 साल बाद खलनायक फिर लौट आया है। साल 1993 की सुपरहिट फिल्म ‘खलनायक’ के सीक्वल की आज घोषणा कर दी गई है। मेकर्स ने फिल्म का फर्स्ट लुक भी जारी कर दिया है।
फर्स्ट लुक में क्या है?
मेकर्स और संजय दत्त ने अपने इंस्टाग्राम पर ‘खलनायक रिटर्न्स’ की घोषणा करते हुए फिल्म का पहला पोस्टर और फर्स्ट लुक जारी किया है। फर्स्ट लुक वीडियो में संजय दत्त बड़े बालों वाले लुक में नजर आ रहे हैं। इस वीडियो में दिखता है कि कई लोग घायल अवस्था में पड़े हैं। तभी संजय दत्त वहां पहुंचते हैं, एक इंसान उनसे रहम की भीख मांगता है।
वो हाथ से जमीन पर पड़े खून और ज्वलनशील पदार्थ से अपनी सिगरेट जलाते हैं। इसके बाद वो कहते हैं, ‘बोला था न, 10 अक्तूबर रात दस बजे बल्लू जेल से फुर्र।’ इसके बाद वो खलनायक का टाइटल ट्रैक ‘नायक नहीं खलनायक हूं मैं…’ गाते हुए वहां से निकल जाते हैं। फर्स्ट लुक से जाहिर है कि संजय दत्त बल्लू के किरदार में वापसी करेंगे और एक बार फिर पर्दे पर दमदार एक्शन करते दिखाई देंगे।
इसके अलावा फिल्म के दो पोस्टर भी जारी किए गए हैं। इनमें संजय दत्त लंबे बालों वाले लुक में खतरनाक अंदाज में नजर आ रहे हैं। इस पोस्टर को साझा करते हुए संजय दत्त ने कैप्शन में लिखा, ‘हर कहानी का एक वक्त होता है और उसका वक्त आ गया है। खलनायक रिटर्न्स।’
इसके अलावा फर्स्ट लुक वीडियो को साझा करते हुए संजय दत्त ने लिखा, ‘कुछ कहानी खत्म नहीं होतीं, वो दोबारा शुरू होती हैं।’ हालांकि, अभी फिल्म की रिलीज डेट के बारे में कोई जानकारी सामने नहीं आई है। फिल्म का निर्माण जियो स्टूडियो के तहत किया गया है।
संजय दत्त को जेल में आया था ‘खलनायक 2’ का आइडिया
खलनायक 2 के टीजर और पोस्टर लॉन्च के दौरान संजय दत्त ने कहा कि मुझे जेल में खलनायक 2 बनाने का विचार आया। मैं जेल में म्यूजिक बजाया करता था और वहां सबसे ज्यादा मांग हमेशा खलनायक की ही होती थी। इसलिए मैंने 4000 कैदियों से हाथ उठाने को कहा कि कौन-कौन 'खलनायक 2' देखना चाहता है और उन सभी ने अपने हाथ उठा दिए।
फिर मैंने उनसे कहा कि वे सब एक-एक पन्ना लिखें, जब मैं पैरोल पर बाहर आया, तो मुझे उनमें से कुछ लिखा हुआ पसंद आया। मैंने सुभाष जी से मुलाकात की और उन्हें वह सुनाया।