Prithviraj Kapoor Birthday: पृथ्वीराज ने अभिनय में छोड़ी अमिट छाप, भावी पीढ़ी में भी हैं उनकी अदाकारी के अंश
पृथ्वीराज कपूर की फिल्मों का जिक्र जब भी आता है, तो 'मुगल-ए-आजम' में उनका निभाया अकबर का किरदार दर्शकों के जेहन में उभरा आता है, लेकिन महज यही किरदार उनकी पहचान नहीं है। इसके अलावा भी उन्होंने कई बेहतरीन किरदार और फिल्में कीं, जिन्होंने हिंदी सिनेमा को समृद्ध करने में बहुत बड़ा योगदान दिया।
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पंजाब (ब्रिटिश इंडिया में पंजाब का वो हिस्सा जो अब पाकिस्तान में है) में 3 नवंबर 1906 को एक पुलिस अधिकारी के घर जन्म हुआ पृथ्वीराज कपूर का। जब पृथ्वी बड़े हुए तो उनका रूझान थिएटर की तरफ हुआ तो वह पेशावर में थिएटर में अभिनय करने लगे। कुछ समय बाद वह मुंबई आ गए और यहां फिल्मों में काम की तलाश करने लगे। इसके बाद शुरू हुआ उनके फिल्म करियर का एक अनोखा सफर। आज पृथ्वीराज कपूर की जंयती है, इस अवसर पर उनके अभिनय और जीवन से जुड़ी कुछ खास बातें, जानिए।
ऐतिहासिक भूमिका को निभाकर हुए मशहूर
जब पृथ्वीराज कपूर फिल्मों में सक्रिय हुए तो उन्होंने शुरुआत में एक्सट्रा के किरदार भी किए। लेकिन जल्द ही उन्हें 1930 में 'सिनेमा गर्ल' नाम की मूक फिल्म में मुख्य किरदार निभाने का अवसर मिला। 1931 में बनी हिंदी भाषा और भारत की पहली बोलती फिल्म 'आलमआरा' में भी पृथ्वीराज कपूर ने एक अहम किरदार निभाया है। इसके बाद पृथ्वीराज कपूर ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने कई बेहतरीन फिल्में और किरदार किए। लेकिन जिन फिल्मों ने उनके कद को हिंदी सिनेमा में बड़ा कर दिया वे 'सिंकदर (1941) और 1960 में आई फिल्म 'मुगल-ए-आजम' है। इन फिल्मों में निभाए उनके किरदार दर्शक आज भी नहीं भूले हैं। खासकर 'मुगल-ए-आजम' में निभाया उनका अकबर का किरदार तो अमर हो गया। धीरे-धीरे हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में भी यह बात स्थापित हो गई कि ऐतिहासिक किरदारों को पृथ्वीराज कपूर से बेहतर कोई निभा ही नहीं सकता है।
पृथ्वी थिएटर की शुरुआत
पृथ्वीराज कपूर ने सिर्फ फिल्मों में ही अलग मुकाम नहीं बनाया, उन्होंने थिएटर में भी बहुत काम किया। वह बतौर कलाकार थिएटर से जुड़े रहे। आगे चलकर तो उन्होंने 1944 में एक थिएटर समूह पृथ्वी थिएटर की स्थापना की। उनकी इस पहल ने भारतीय रंगमंच को एक नई पहचान दी, इसे आगे बढ़ाने में अहम योगदान दिया। वह अपने थिएटर के नाटकों में हमेशा सामाजिक समस्याओं को दिखाते, इसके माध्यम से लोगों को जागरुक करते। उनके नाटकों को दर्शकों द्वारा बहुत पसंद भी किया गया। लेकिन उन्हें थिएटर के जरिए इतनी कमाई भी नहीं होती कि वह अपना गुजारा कर पाए। ऐसे में वह नाटक खत्म होने के बाद अपने थिएटर के बाहर खड़े हो जाते और झोली फैलाकर लोगों से पैसों की मदद लेते। इस तरह वह अपना थिएटर चलाते। आगे चलकर संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार और दादा साहब फाल्के पुरस्कार जैसे कई सम्मानों से पृथ्वीराज कपूर को नवाजा गया क्योंकि उन्होंने सिनेमा और थिएटर को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई।
पृथ्वीराज किसी को मदद के लिए ना नहीं कहते
हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में एक बात मशहूर थी कि अगर कोई किसी की मदद नहीं कर रहा तो पृथ्वीराज जरूर करेंगे। दरअसल, वह जितने बेहतरीन कलाकार रहे, उतने ही कमाल के इंसान भी थे। ऐसा बताया जाता है कि पृथ्वीराज कपूर इतने बड़े स्टार होते हुए भी अपनी फिल्मों से जुड़े लोगों के साथ खाना खाते। साथ ही अगर किसी को परेशानी या तकलीफ होती, तो वह उनका पूरा ख्याल रखते।
कपूर खानदान में हुए कई बेहतरीन कलाकार
पृथ्वीराज कपूर ने अपनी भावी पीढ़ी को भी अभिनय में आने के लिए प्रोत्साहित किया। उनके खानदान में कई नामी कलाकार हुए। उनके बेटे राज कपूर, शम्मी कपूर और शशि कपूर ने हिंदी फिल्मों में एक अलग ही मुकाम हासिल किया। आगे चलकर ऋषि कपूर, रणधीर कपूर जैसे बेहतरीन कलाकार भी पृथ्वीराज के परिवार में पैदा हुए। उनकी मौजूदा पीढ़ी की बात की जाए, तो रणबीर कपूर, करीना कपूर, करिश्मा कपूर जैसे अभिनेता और अभिनेत्रियां हिंदी सिनेमा में खास जगह बना चुके हैं। यह कहना गलत नहीं होगा कि पृथ्वीराज कपूर के अभिनय के अंश कपूर खानदान की हर पीढ़ी में मौजूद हैं, तभी तो उनके परिवार के अधिकतर सदस्य बेहतरीन कलाकार बने।