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‘त्योहार को सिर्फ कैमरे में कैद न करें, उसे महसूस करें’; प्रतीक गांधी ने साझा की मकर संक्रान्ति से जुड़ी यादें

Wed, 14 Jan 2026 07:00 AM IST
Kiran Jain किरण जैन
Updated Wed, 14 Jan 2026 07:00 AM IST
सार

Pratik Gandhi Interview: मकर संक्रान्ति सिर्फ एक त्योहार नहीं, इससे बचपन की मीठी यादें भी जुड़ी हुई हैं। इस खास मौके पर अमर उजाला ने एक्टर प्रतीक गांधी से बातचीत की और जाना कि इस त्योहार पर वो क्या खास करते हैं।

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Pratik Gandhi Share His Memories Associate With Makar Sankranti Festival
प्रतीक गांधी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अमर उजाला डिजिटल से की गई बातचीत के दौरान गुजराती और बॉलीवुड एक्टर प्रतीक गांधी ने संक्रान्ति से जुड़ी अपनी कई यादें साझा कीं। साथ ही  जिंदगी से मिली सीख और परंपराओं को संभालकर रखने की बात कही। पढ़िए इस बातचीत के प्रमुख अंश:

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मकर संक्रान्ति का त्योहार गुजरात में धूम-धाम से मनाते हैं। इस दिन की कौन सी याद आज भी दिल के करीब है?

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मकर संक्रान्ति मेरे लिए सिर्फ एक त्योहार नहीं है। इसमें मेरा पूरा बचपन समाया है। इस दिन सुबह ठंडी हवा के साथ हमारी नींद खुलती थी। धूप पूरी तरह निकली भी नहीं होती थी और छत पर हमारी हलचल शुरू हो जाती थी। कोई पतंग खोल रहा है, कोई मांजा सुलझा रहा है, कोई नीचे से आवाज लगा रहा है। धीरे-धीरे पूरा परिवार छत पर इकट्ठा हो जाता था। पड़ोसियों की हंसी, रेडियो से आती पुरानी धुनें और ऊपर रंगीन पतंगों से भरा आसमान। पतंग काटने की हल्की सी प्रतिस्पर्धा होती थी, लेकिन उससे कहीं ज्यादा अहम था साथ होना। खाना, बातें, छोटी छोटी नोक झोंक और फिर बिना थके पूरा दिन छत पर बिताना। खुले आसमान के नीचे अपनों के साथ बिताए वो साधारण से पल आज भी मन में वैसे ही बसे हुए हैं। शायद इसलिए, क्योंकि उनमें कोई दिखावा नहीं..बस अपनापन था। आज भी उंधियू और चिक्की के बिना मेरे लिए संक्रांति अधूरी है। इनका स्वाद सिर्फ खाने तक सीमित नहीं है, इसमें बचपन जुड़ा है, घर जुड़ा है। चाहे शूटिंग चल रही हो या दिन बहुत व्यस्त हो, मैं कोशिश करता हूं कि थोड़ा सा समय इन त्योहारों के लिए निकाल सकूं। 

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Pratik Gandhi Share His Memories Associate With Makar Sankranti Festival
मकर संक्रान्ति पर परिवार संग पतंगबाजी करते प्रतीक गांधी - फोटो : अमर उजाला

पतंगबाजी में इस त्योहार की आत्मा बसती है। आपने इससे क्या कुछ सीखा?
पतंग उड़ाना मुझे संतुलन बनाए रखने की सीख देता है। डोर बहुत जोर से पकड़ो तो टूट जाती है और पूरी तरह छोड़ दो तो पतंग दिशा खो देती है। जिंदगी भी कुछ ऐसी ही है। मेहनत करनी होती है, धैर्य रखना होता है और सही समय पर खुद को छोड़ना भी आना चाहिए। हवा को समझना, हालात के हिसाब से खुद को ढालना और प्रक्रिया पर भरोसा रखना। 

Pratik Gandhi Share His Memories Associate With Makar Sankranti Festival
मकर संक्रान्ति पर परिवार संग पतंगबाजी करते प्रतीक गांधी - फोटो : अमर उजाला

आज की डिजिटल दुनिया में युवा पीढ़ी पारंपरिक त्योहारों से कैसे जुड़ी रह सकती है?
मुझे नहीं लगता कि परंपरा और तकनीक एक दूसरे के खिलाफ हैं। जरूरी यह है कि त्योहारों को सिर्फ कैमरे में कैद न किया जाए, बल्कि उन्हें महसूस किया जाए। पतंग उड़ाना, परिवार के साथ खाना बनाना, बड़ों की बातें सुनना। जब त्योहार स्क्रीन से बाहर निकलकर अनुभव बनते हैं तो उनसे जुड़ाव अपने आप गहरा हो जाता है।

अगर जिंदगी एक पतंग हो, तो उसे थामने और उड़ाने को लेकर आप क्या सलाह देंगे?
डोर को डर से नहीं, भरोसे से पकड़िए। समझिए कब खींचना है और कब छोड़ना है। हवा पर विश्वास रखिए, लेकिन सजग भी रहिए। और सबसे जरूरी उड़ान का आनंद लीजिए, क्योंकि अगर सिर्फ गिरने के डर में रहेंगे, तो आसमान देखने की खुशी छूट जाएगी। 

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