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रियलिटी शोज से लता मंगेशकर, किशोर कुमार या मोहम्मद रफी नहीं निकल सकते: पंडित शिवकुमार शर्मा

Sun, 15 Dec 2019 01:59 PM IST
प्रतीक्षा राणावत मुंबई ब्यूरो, अमर उजाला
मुंबई ब्यूरो, अमर उजाला Published by: प्रतीक्षा राणावत Updated Sun, 15 Dec 2019 01:59 PM IST
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Pandit Shiv Kumar Sharma Says We Cannot Found Great Singers from reality shows
पंडित शिव कुमार शर्मा - फोटो : Social Media

पंडित शिवकुमार शर्मा भारत के प्रसिद्ध संतूर वादक हैं। आज संतूर की लोकप्रियता का सर्वाधिक श्रेय शिवकुमार शर्मा को ही जाता है। उन्होंने संतूर को भारतीय शास्त्रीय संगीत के अनुकूल बनाने के लिए इसमें कुछ परिवर्तन भी किए। सूफी संस्कृति में संतूर को कभी भी एक एकल वाद्य यंत्र नहीं माना गया, जब तक कि पंडित शिवकुमार शर्मा ने इस उपकरण को इस्तेमाल करने के तरीके को बदल नहीं दिया। उन्होंने राग से लेकर यमन, किरवानी, भूपाली और जोग सभी में महारत हासिल की है। बीते दिनों शिवकुमार ने सिटी एनसीपीए आदी अनंत में प्रस्तुति दी। इस मौके पर उन्होंने शास्त्रीय संगीत के मौजूदा स्वरूप के बारे में खुलकर बात की।

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फल-फूल रहा है शास्त्रीय संगीत
'भारत में शास्त्रीय संगीत परिदृश्य फल-फूल रहा है और श्रोताओं की संख्या में भी काफी वृद्धि हुई है। हालांकि, 50 साल पहले के श्रोताओं की तुलना में, आज के दर्शक उतने जानकार नहीं हैं। हालांकि, मैं अब भी उन्हें रसिक कहूंगा, जो संगीत की बारीकियों को जाने बिना राग और लय का आनंद लेते हैं।'
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यश चोपड़ा के कारण फिल्मों में दिया संगीत
साल 1993 तक पंडित शिवकुमार ने आठ फिल्मों में संगीत दिया लेकिन उसके बाद उन्होंने यह फिल्मों से दूरी बना ली। इस बारे में उन्होंने कहा, 'मैंने हिंदी फिल्मों के लिए संगीत रचना का आनंद लिया। दिवंगत फिल्म निर्देशक यश चोपड़ा मेरे करीबी दोस्त थे जिन्होंने अपनी फिल्मों के लिए संगीत रचना करने के लिए राजी किया। लेकिन शुरुआत से ही मेरी प्राथमिकताएं स्पष्ट थी। मैंने यह तय किया हुआ था कि फिल्म संगीत की खातिर शास्त्रीय संगीत का त्याग नहीं करेंगे और यही कारण है कि दोनों शैलियों में संतुलन बनाना काफी मुश्किल था।  इसलिए मैंने अपने सच्चे जुनून का पालन करने के लिए फिल्म संगीत को छोड़ दिया।'
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अब भी है युवाओं का रुझान
'मैंने एक छात्र संगठन के लिए पूरे देश में प्रस्तुति दी है। इस दौरान मैं शास्त्रीय संगीत के प्रति जागरुक युवाओं से मिला हूं। आमतौर पर, संगीत समारोहों में भी, मुझे भारतीय शास्त्रीय संगीत का आनंद लेने वाले युवाओं की एक बड़ी संख्या मिलती है।'

Pandit Shiv Kumar Sharma Says We Cannot Found Great Singers from reality shows
पंडित शिव कुमार शर्मा - फोटो : Social Media

कमर्शियल फिल्मी संगीत को मिल रही प्राथमिकता
'मुझे नहीं पता कि इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया की क्या मजबूरी है कि वे शास्त्रीय संगीत की तुलना में बॉलीवुड संगीत को अधिक बढ़ावा देने में मदद करते हैं। जब हम विदेश जाते हैं, तो मुझे हमेशा कुछ देशों के नाम के लिए यूके, यूएसए, फ्रांस और जर्मनी के प्रमुख अखबारों में एक आर्ट पेज मिलता है, जो पूरा पेज शास्त्रीय कला, थिएटर और कला के अन्य रूपों को समर्पित करता है। भारतीय शास्त्रीय संगीत समारोहों और अन्य कला रूपों की समीक्षा नियमित रूप से प्रकाशित की गई थी, जो पिछले कुछ वर्षों में गायब हो गए हैं, खासकर मुंबई जैसे शहरों में। मुझे यह पता नहीं है कि ऐसा क्यों हो रहा है।'

दर्शकों की संख्या में बढ़ोतरी
'50 साल पहले आज की तुलना में दर्शक बहुत ही कम थे। लेकिन श्रोता बहुत ही ज्ञानी थे। कई संगीतकार भी तब दर्शकों का हिस्सा हुआ करते थे, लेकिन आज ऐसा नहीं है। संख्या में वृद्धि हुई है, लेकिन वे एक राग और दूसरे के बीच अंतर नहीं जानते हैं।'

सफलता का कोई आसान रास्ता नहीं
रियलिटी शोज के बारे में बात करते हुए पंडित शिवकुमार शर्मा ने बताया, 'अपने जीवनकाल में मैंने एक बात सीखी है कि सफलता का कोई आसान रास्ता नहीं है। जीवन में जिसने भी सफलता जल्दी अर्जित की वह लंबे समय तक नहीं टिकी। इसलिए मैं कहूंगा कि यह उन लोगों के लिए एक वरदान है, जिनका उद्देश्य पैसा कमाना है। लेकिन रियलिटी शोज भविष्य में लता मंगेशकर, किशोर कुमार और मोहम्मद रफी पैदा नहीं कर सकते हैं।'

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