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राजू श्रीवास्तव बोले- पाकिस्तानी कलाकार देते हैं आतंकियों को मौन समर्थन

Sun, 25 Sep 2016 12:13 PM IST
अमित कर्ण/ अमर उजाला, मुंबई
अमित कर्ण/ अमर उजाला, मुंबई Updated Sun, 25 Sep 2016 12:13 PM IST
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Pak actors giving silent support to terrorists: Raju
Raju Shrivastava

उड़ी आतंकी हमले में शहीद हुए जवानों के समर्थन में बॉलीवुड के कलाकारों का एक तबका पाकिस्तान के खिलाफ हो गया है। कमेडियन राजू श्रीवास्तव ने भी वहां से आया न्यौता ठुकरा दिया है।

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मेरा कार्यक्रम 25 दिसंबर को कराची में होने वाला था। जब मैंने अखबार और न्यूज चैनलों में  देखा कि हमारे जवानों को धोखे से आतंकियों ने मारा था। उसके बाद उन शहीदों के परिवार वालों को बिलखते हुए देखा तो बहुत दर्द हुआ। दिल तब दहाड़ें मार-मार कर रोने लगा, जब एक शहीद जवान को उनकी मां कांधा दे रही थीं।
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तब मुझे एहसास हुआ कि मैं किस मुंह से पाकिस्तान जाऊं? क्या करना है वहां जाकर? कहीं जाने की पहली इजाजत तो आप के भीतर से मिलती है न। फिर पाकिस्तान की जो एक इमेज बन चुकी है, भारत की पीठ में सदा छुरा भोंकना, उससे बहुत समस्या होने लगी।
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जब भी आतंकी मुंबई या दिल्ली में कांड करते हैं तो पाकिस्तान हमसे उनकी संलिप्तता का सबूत मांगता फिरता है। हम उन्हें कागजी सबूत देते रहते हैं। हम उन्हें बंदूक तो दे नहीं सकते। ऐसे में विरोध जताने का यही एकमात्र तरीका था कि उनके निमंत्रण को ठुकराया जाए।

पाकिस्तानी कलाकार भी हैं दोषी

Pak actors giving silent support to terrorists: Raju
Raju

मेरी नाराजगी पाकिस्तानी कलाकारों से भी है। वह इसलिए कि पेरिस जैसे आतंकी हमले हों तो पाकिस्तानी कलाकार उनकी मुखालफत करते हैं। आतंकियों के विरोध में अपनी फेसबुक प्रोफाइल और ह्वाट्स अप की डीपी बदल लेते हैं।

उस पर उस देश का झंडा लगा लेते हैं, पर जब भारत में वैसा कुछ हो तो चुप्पी साध लेते हैं। कहीं अपना रिएक्‍शन भी नहीं देते। मेरी फिल्म और टीवी निर्माताओं से गुजारिश है कि वे अपनी फिल्मों और टीवी शो में पाकिस्तानी कलाकारों को न लें। क्या हमारे देश में प्रतिभा की इतनी किल्लत है? हम उनके बगैर भूखे मर जाएंगे? बात अलगाव की राजनीति की नहीं है। राज ठाकरे की पार्टी मनसे भी इस मसले पर सही रुख अपना रही है।

कलाकार भी तो पहले किसी न किसी देश का नागरिक ही है। वे कलाकार और क्रिकेटर का चोला ओढ़कर नागरिक धर्म से नहीं बच सकते। अगर वे ऐसी घटनाओं पर लानतें न भेजें तो उनसे बड़ा स्वार्थी और कौन होगा? सबसे बड़ी बात कि हमारे  देश में कहां प्रतिभा की कमी है? एक से एक गाने वाले मुझे ट्रेन में मिल जाते हैं। फिर क्या जरूरत है, कहीं और की प्रतिभा का मोहताज होना?

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