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ऐसे ही 'शहंशाह-ए-कव्वाली' नहीं कहे जाते नुसरत फतेह अली खान, 16 की उम्र में दी पहली परफॉर्मेंस
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Updated Sat, 13 Oct 2018 02:18 PM IST
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नुसरत फतेह अली खान
मशहूर पाकिस्तानी सूफी गायक नुसरत फतेह अली खान का जन्म आज ही के दिन 1948 में पाकिस्तान के फैसलाबाद मेें हुआ था। बंटवारे से पहले उनका परिवार भारत के जालंधर में रहता था। नुसरत फतेह अली खान की आवाज सूफियों की आवाज कही जाती है। माना जाता है कव्वाली को उन्होंने विदेशों तक पहुंचाने का काम किया। इस वजह से उन्हें 'शहंशाह-ए-कव्वाली' भी कहा जाता है।
नुसरत फतेह अली खान 5 भाई-बहनों में सबसे छोटे थे। नुसरत के पिता फतेह अली खां चाहते थे कि वो डॉक्टर या इंजीनियर बनें लेकिन उन्हें तो एक गायक बनना था। जिसके बाद उनके घरवालों ने पूरी मदद की और संगीत की तालीम दी। उन्होंने केवल 16 साल की उम्र में पहली स्टेज परफॉर्मेंस दी।
नुसरत फतेह अली खान की आवाज का जादू इस कदर है कि उनके गानों का रिमिक्स वर्जन बॉलीवुड में खूब पॉपुलर है। 'ये जो हल्का-हल्का सुरूर है', 'आफरीन-आफरीन' और 'पिया रे पिया रे' जैसे गाने ना केवल पाकिस्तान में बल्कि दुनिया भर में पसंद किए गए। नुसरत फतेह अली खान के जन्मदिन के मौके पर हम आपको उनके ऐसे 5 गाने सुनाते हैं।
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नुसरत फतेह अली खान 5 भाई-बहनों में सबसे छोटे थे। नुसरत के पिता फतेह अली खां चाहते थे कि वो डॉक्टर या इंजीनियर बनें लेकिन उन्हें तो एक गायक बनना था। जिसके बाद उनके घरवालों ने पूरी मदद की और संगीत की तालीम दी। उन्होंने केवल 16 साल की उम्र में पहली स्टेज परफॉर्मेंस दी।
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नुसरत फतेह अली खान की आवाज का जादू इस कदर है कि उनके गानों का रिमिक्स वर्जन बॉलीवुड में खूब पॉपुलर है। 'ये जो हल्का-हल्का सुरूर है', 'आफरीन-आफरीन' और 'पिया रे पिया रे' जैसे गाने ना केवल पाकिस्तान में बल्कि दुनिया भर में पसंद किए गए। नुसरत फतेह अली खान के जन्मदिन के मौके पर हम आपको उनके ऐसे 5 गाने सुनाते हैं।
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गाना- तेरे बिन नहीं लगता दिल मेरा ढोलना...
गाना- दूल्हे का सेहरा सुहाना लगता है, दुल्हन का दिल दिवाना लगता है...
गाना- आफरीन आफरीन...
गाना- इश्क द रुतबा...
गाना- सांवरे तोरे बिन जिया जाए न...