फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Entertainment ›   Bollywood ›   Monday Flashback: First dalit actress of Indian cinema PK Rosy house set to fire due to her caste know more

Monday Flashback: पहली दलित एक्ट्रेस ने रोमांटिक सीन क्या दिया लोगों ने घर ही जला दिया, फिर क्या हुआ, जानिए

Mon, 05 Sep 2022 10:00 AM IST
ज्योति राघव एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: ज्योति राघव Updated Mon, 05 Sep 2022 10:00 AM IST
सार

एक्ट्रेस पीके रोजी के लिए अपनी पहली ही फिल्म मुसीबत बन गई। लोगों ने इसका जमकर विरोध किया। यह शर्त रख दी गई कि फिल्म के किसी भी इवेंट में पीके रोजी नजर नहीं आएंगी, वरना फिल्म का बहिष्कार किया जाएगा।

विज्ञापन
Monday Flashback: First dalit actress of Indian cinema PK Rosy house set to fire due to her caste know more
पीके रोजी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अक्सर कहा जाता है कि कलाकार की जाति या धर्म नहीं होता। वह तो सिर्फ कलाकार होता है, जो अपनी कला से समाज की सेवा करता है। मगर, कुछ किस्से ऐसे बन जाते हैं, जो इस कहावत को झुठलाते प्रतीत होते हैं। अतीत में एक किस्सा ऐसा रहा है, जब अपनी जाति की वजह से एक अभिनेत्री का करियर शुरू होते ही बंद हो गया। जी हां, उस अभिनेत्री का नाम है पीके रोजी। रिपोर्ट्स के मुताबिक पीके रोजी भारत की पहली दलित अभिनेत्री थीं। फिल्मी पर्दे पर उनका आना कुछ लोगों को इतना अखर गया कि उन्होंने पीके रोजी का घर ही जला दिया। खौफ खाई पीके रोजी दूसरी फिल्म करने की हिम्मत ही नहीं कर पाईं और अभिनय से तौबा कर बैठीं।

विज्ञापन

फिल्म के प्रिंट मौजूद नहीं
पीके रोजी मलयालम सिनेमा की पहली अभिनेत्री थीं। होना तो यह चाहिए था कि आज हम उनके अभिनय कौशल पर चर्चा कर रहे होते, उनकी फिल्मों का जिक्र कर रहे होते। लेकिन, जातिगत भेदभाव से ग्रस्त समाज में ऐसा संभव नहीं हो पाया और आज हम चर्चा इस बात पर कर रहे हैं कि पीके रोजी को फिल्मों में अभिनय करने की बड़ी कीमत चुकानी पड़ी थी। जी हां, एक दलित होते हुए उन्होंने फिल्मी पर्दे पर आने की हिम्मत जो की थी। पीके रोजी का घर जलाया गया और उनका अस्तित्व मिटाने की हर संभव कोशिश की गई। आज यही वजह है कि इंटरनेट सर्च इंजन पर भी उनकी एकमात्र तस्वीर ही उपलब्ध है। न तो उनकी फिल्म के प्रिंट उपलब्ध हैं और न ही रील।

विज्ञापन
विज्ञापन

ऊंची जाति की महिला का रोल किया
पीके रोजी का जन्म साल 1903 में त्रिवेंद्रम के नंदांकोडे गांव में हुआ था। रिपोर्ट्स के मुताबिक इनके माता-पिता पुलिया जाति से थे और उन्होंने इनका नाम राजम्मा रखा था। दलित जाति से होने के साथ-साथ रोजी का परिवार आर्थिक रूप से भी कमजोर था। पिता की मृत्यु कम उम्र में हो जाने की वजह से इनके घर की आर्थिक स्थिति और भी कमजोर हो गई थी। हालांकि इनके मन में कला के लिए हमेशा से विशिष्ट स्थान था। बहुत कम उम्र में ही रोजी ने अभिनय और एक लोक नृत्य-नाटक सीख लिया था। इसके बाद पीके रोजी ने वर्ष 1928 में मलयालम की पहली फीचर फिल्म 'वीगतथकुमारन' (द लॉस्ट चाइल्ड) में अभिनय किया। इस फिल्म का निर्देशन जेसी डेनियल ने किया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस फिल्म में दलित महिला पीके रोजी ने सरोजिनी नामक एक ऊंची जाति की नायर महिला का रोल अदा किया था। 

विज्ञापन

स्क्रीनिंग के दौरान हुए प्रदर्शन
पहली फिल्म में किया गया किरदार ही पीके रोजी के लिए मुसाबित बन गया। लोगों ने इसका जमकर विरोध किया। यह शर्त रख दी कि फिल्म के किसी भी इवेंट में पीके रोजी नजर नहीं आएंगी। वरना वह फिल्म का बहिष्कार करेंगे। 7 नवंबर 1928 को कैपिटल थिएटर में जब पीके रोजी की इस फिल्म की स्क्रीनिंग की गई तो खूब प्रदर्शन हुए। रिपोर्ट्स के मुताबिक मलयालम फिल्म जगत के ऊंची जाति के लोगों ने तो इस फिल्म को देखने से ही इनकार दिया। उन्होंने यह शर्त रख दी कि यदि पीके रोजी दर्शकों के बीच बैठेंगी तो वे फिल्म की स्क्रीनिंग नहीं देखेंगे। स्क्रीनिंग के वक्त भी खूब तोड़-फोड़ की गई। विरोध की आग रोजी के घर तक पहुंच गई और उनका घर आग के हवाले कर दिया गया। इसके बाद पीके रोजी ने केरल ही छोड़ दिया। 

गुमनामी में बिताया जीवन
रिपोर्ट्स के मुताबिक एक लॉरी ड्राइवर की मदद से पीके रोजी अपने गांव से भागकर तमिलनाडु आ गई थीं। बाद में वह लोक थिएटर में काम करने लगी, उन्होंने अपना नाम बदलकर राजाम्मा से रोजम्मा कर लिया। रिपोर्ट्स की मानें तो बाद के दिनों में उन्होंने खेती करके अपना जीवन बिताया। इनके दो बच्चे थे- पदमा और नागप्पन। दोनों बच्चों को कभी यह भनक नहीं लग पाई कि उनकी मां अभिनेत्री रही हैं। रोजी को लेकर फिल्म बनाने वाले जेसी डेनियल को भी दलित को लेकर फिल्म बनाने का खामियाजा भुगतना पड़ा और उन्होंने अपना पूरा जीवन गरीबी में बिताया।

दुनिया से विदा होने के बाद मिली पहचान
जीवित रहते जिस पीके रोजी को समाज सम्मान नहीं दे सका, उनके इस दुनिया से जाने के बाद उन्हें पहचान मिली। वर्ष 1988 में लेखक वीनू अब्राहम ने जेसी डेनियल और मलयालम सिनेमा जगत की पहली अभिनेत्री पीके रोजी के बारे में एक उपन्यास लिखा। इसके बाद वर्ष 2013 में कमल द्वारा इसी उपन्यास पर एक 'सेलूल्यॉड'  नामक फिल्म बनाई गई, जिससे ज्यादा लोगों को पीके रोजी के योगदान और उनके संघर्षों के बारे में पता चला। अफसोस कि रोजी को पहचान मिलने से पहले ही वह 1988 में दुनिया को अलविदा कह गईं। इससे पहले 27 अप्रैल 1975 को गुमनाम जिंदगी जीते हुए जेसी डेनियल का भी निधन हो गया था।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें मनोरंजन समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। मनोरंजन जगत की अन्य खबरें जैसे बॉलीवुड न्यूज़, लाइव टीवी न्यूज़, लेटेस्ट हॉलीवुड न्यूज़ और मूवी रिव्यु आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed