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'मेरा पिया घर आया'-'मैंने पायल है छनकायी' गाने किसने लिखे, 350 से ज्यादा फिल्मों के लिए लिखे थे गाने
Sun, 06 Apr 2025 07:30 AM IST
अंजू बाजपेई
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Published by: अंजू बाजपेई
Updated Sun, 06 Apr 2025 07:30 AM IST
सार
माया गोविंद, हिंदी सिनेमा की एक प्रसिद्ध गीतकार, कवयित्री और लेखिका थीं, 82 साल की उम्र में माया गोविंद ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। आज उनकी पुण्यतिथि पर जानिए उनसे जुड़े कुछ किस्से...
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माया गोविंद की आज है पुण्यतिथि
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
माया गोविंद ने अपने करियर में 350 से अधिक फिल्मों के लिए गीत लिखे और हिंदी सिनेमा में अपनी अनूठी लेखनी से एक खास जगह हासिल की। ‘सावन को आने दो’ फिल्म के ‘कजरे की बाती’ ‘आंखों में बस हो तुम’, ‘मैं खिलाड़ी तू अनाड़ी’, ‘तेरी मेरी प्रेम कहानी’ और ‘रानी चेहरे वाले’ जैसे कई सदाबहार गानों को लिखने वालीं गीतकार माया गोविंद की आज पुण्यतिथि है।
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नृत्यांगना से गीतकार तक का सफर
माया गोविंद का जन्म 17 जनवरी, 1940 को लखनऊ, उत्तर प्रदेश में हुआ था। उन्होंने कथक में महारत हासिल की थी और शुरुआती दिनों में एक नृत्यांगना के रूप में अपनी पहचान बनाई। बाद में उन्होंने कविता और लेखनी में अपनी रुची बढ़ाई।
माया गोविंद का जन्म 17 जनवरी, 1940 को लखनऊ, उत्तर प्रदेश में हुआ था। उन्होंने कथक में महारत हासिल की थी और शुरुआती दिनों में एक नृत्यांगना के रूप में अपनी पहचान बनाई। बाद में उन्होंने कविता और लेखनी में अपनी रुची बढ़ाई।
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माया गोविंद
- फोटो : सोशल मीडिया
पहला ब्रेक और लोकप्रियता
माया गोविंद को फिल्म इंडस्ट्री में पहला बड़ा मौका 1974 में फिल्म "आरोप" से मिला, जिसके निर्माता-निर्देशक आत्मा राम थे। हालांकि, उन्हें असली पहचान 1979 में फिल्म "सावन को आने दो" के गाने "कजरे की बाती" से मिली। इस गीत ने उन्हें रातोंरात मशहूर कर दिया।
माया गोविंद को फिल्म इंडस्ट्री में पहला बड़ा मौका 1974 में फिल्म "आरोप" से मिला, जिसके निर्माता-निर्देशक आत्मा राम थे। हालांकि, उन्हें असली पहचान 1979 में फिल्म "सावन को आने दो" के गाने "कजरे की बाती" से मिली। इस गीत ने उन्हें रातोंरात मशहूर कर दिया।
350 से अधिक फिल्मों के लिए लिखे गाने
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
350 से अधिक फिल्मों के लिए लिखे गाने
माया गोविंद ने अपने करियर में लगभग 350 फिल्मों के लिए गाने लिखे, जिनमें "मैं खिलाड़ी तू अनाड़ी", "दलाल", "गज गामिनी", "लाल बादशाह", और "याराना" जैसी फिल्में शामिल हैं। इसके अलावा, उन्होंने फाल्गुनी पाठक के सुपरहिट गीत "मैंने पायल है छनकाई" की रचना भी की, जो लोगों के बीच काफी लोकप्रिय भी हुआ।
माया गोविंद ने अपने करियर में लगभग 350 फिल्मों के लिए गाने लिखे, जिनमें "मैं खिलाड़ी तू अनाड़ी", "दलाल", "गज गामिनी", "लाल बादशाह", और "याराना" जैसी फिल्में शामिल हैं। इसके अलावा, उन्होंने फाल्गुनी पाठक के सुपरहिट गीत "मैंने पायल है छनकाई" की रचना भी की, जो लोगों के बीच काफी लोकप्रिय भी हुआ।
टीवी धारावाहिकों में योगदान
माया ने टीवी की दुनिया में भी अपना हुनर दिखाया। उन्होंने "महाभारत" जैसे ऐतिहासिक धारावाहिक के लिए गीत, दोहे और छंद लिखे। इसके अलावा, "विष्णु पुराण", "किस्मत", और "द्रौपदी" जैसे धारावाहिकों में भी उनकी लेखनी का जादू देखने को मिला।
माया ने टीवी की दुनिया में भी अपना हुनर दिखाया। उन्होंने "महाभारत" जैसे ऐतिहासिक धारावाहिक के लिए गीत, दोहे और छंद लिखे। इसके अलावा, "विष्णु पुराण", "किस्मत", और "द्रौपदी" जैसे धारावाहिकों में भी उनकी लेखनी का जादू देखने को मिला।
लंबी बीमारी और निधन
माया गोविंद अपने जीवन के अंतिम सालों में लंबे समय तक बीमार रहीं। उन्हें फेफड़ों में संक्रमण और ब्रेन ब्लड क्लॉटिंग की समस्या हुई थी। जनवरी 2022 में उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया था, लेकिन बाद में घर पर ही उनका इलाज चला।
माया गोविंद अपने जीवन के अंतिम सालों में लंबे समय तक बीमार रहीं। उन्हें फेफड़ों में संक्रमण और ब्रेन ब्लड क्लॉटिंग की समस्या हुई थी। जनवरी 2022 में उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया था, लेकिन बाद में घर पर ही उनका इलाज चला।