मुंबई की चकाचौंध मुझे विस्मित नहीं कर पाई, मैं आज भी गांव का ही हूं- मनोज वाजपेयी
सवाल- आपने शॉर्ट फिल्मों की ओर भी रुख किया है। आउच, कृति और तांडव इनके उदाहरण हैं। क्या इस साल और नई शॉर्ट फिल्में हमें देखने को मिलेंगी?
जवाब- जीहां मैं हर तरह के किरदार करना चाहता हूं। फिलहाल अगली फिल्म भोसले होगी। गली गुलियां के प्रमोशन के बाद में इस फिल्म पर काम करूंगा। फिल्म झारखंड में शूट होनी है। इसके अलावा अपूर्व असरानी की फिल्म पर काम चल रहा है। मौका मिला तो थियेटर भी करूंगा। अमेजन की वेब सीरिज भी कर रहा हूं। मनोज बाजपेयी ने बताया कि, लव स्टोरी पर बनने वाली फिल्म में भी जरूर काम करना चाहते हैं अगर वह कुछ हटकर होती हैं।
जवाब- स्क्रिप्ट पढ़ने के बाद ही मैंने इस फिल्म को हां कह दिया। हालांकि तब में डायरेक्टर से मिला भी नहीं था। फिल्म की स्क्रिप्ट ने मुझे इतना प्रभावित किया कि मैं इसे न नहीं कह पाया। मैंने उन्हें मिलने के लिए मैसेज भेजा और मिलने के बाद मुझे यकीन हो गया कि मुझे ये फिल्म जरूर करनी चाहिए।
जवाब- मैं आज भी वहीं हूं जो मुंबई आने से पहले था। इस बीच मनोज वाजपेयी ने एक कहावत के जरिए इस सवाल का जवाब दिया। उन्होंने कहा- गांव से एक बच्चे को निकाला जा सकता है पर एक बच्चे के अंदर से गांव को नहीं निकाला जा सकता। मुंबई की चकाचौंध मुझे विस्मित नहीं कर पाई। मैं आज भी वैसा ही हूं।
यहां देखें मनोज वाजपेयी के साथ अमर उजाला का इंटरव्यू