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नहीं रहे मलयालम गीतकार पूवाचल खादर: कोरोना से हुआ निधन
Tue, 22 Jun 2021 03:25 PM IST
स्वाति सिंह
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Published by: स्वाति सिंह
Updated Tue, 22 Jun 2021 03:25 PM IST
सार
मलयालम सिनेमा में 1970 और 1980 के दशक में कई सदाबहार लोकप्रिय रूमानी और दर्द भरे नगमों की रचना करने वाले प्रख्यात गीतकार-कवि पूवाचल खादर का कोविड-19 की जटिलताओं के कारण निधन हो गया। वह 73 वर्ष के थे।
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पूवाचल खादर
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
मलयालम सिनेमा में 1970 और 1980 के दशक में कई सदाबहार लोकप्रिय रूमानी और दर्द भरे नगमों की रचना करने वाले प्रख्यात गीतकार-कवि पूवाचल खादर का मंगलवार को कोविड-19 की जटिलताओं के कारण निधन हो गया। वह 73 वर्ष के थे।
उनके परिवार से जुड़े सूत्रों ने बताया कि यहां के सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में उनका कोविड-19 और गंभीर निमोनिया का उपचार चल रहा था और इसी दौरान दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया। मलयालम में कई हिट गीतों की रचना कर चुके खादर ने पांच दशक के अपने कॅरियर में करीब 400 फिल्मों में 1500 गीत लिखें हैं।
खादर के लिखे गीतों में ‘‘पूमानामे (निराकुट्टू), ‘‘अनुरागिनी इथा एन’’ (ओरु कुडाक्कीझील), ‘‘इथो जनमा कल्पनायिल’’ (पालंगल), ‘‘नाथा नी वरुम’’ (चामाराम) और कई अन्य शामिल हैं।
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तिरुवनंतपुरम के पास पूवाचल जैसी छोटी जगह पर 25 दिसंबर 1948 को जन्मे खादर फिल्मों का हिस्सा बनने से पहले बतौर इंजीनियर सरकारी सेवा में थे। 1972 में एक फिल्म में गीत लिखकर वह मशहूर हुए और दशकों तक फिल्मों का हिस्सा रहे। उन्होंने के जे यसुदास, पी जयचंद्रन, एस जानकी और कई संगीतकारों के लिए गीत लिखे।
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उनके परिवार से जुड़े सूत्रों ने बताया कि यहां के सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में उनका कोविड-19 और गंभीर निमोनिया का उपचार चल रहा था और इसी दौरान दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया। मलयालम में कई हिट गीतों की रचना कर चुके खादर ने पांच दशक के अपने कॅरियर में करीब 400 फिल्मों में 1500 गीत लिखें हैं।
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खादर के लिखे गीतों में ‘‘पूमानामे (निराकुट्टू), ‘‘अनुरागिनी इथा एन’’ (ओरु कुडाक्कीझील), ‘‘इथो जनमा कल्पनायिल’’ (पालंगल), ‘‘नाथा नी वरुम’’ (चामाराम) और कई अन्य शामिल हैं।
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तिरुवनंतपुरम के पास पूवाचल जैसी छोटी जगह पर 25 दिसंबर 1948 को जन्मे खादर फिल्मों का हिस्सा बनने से पहले बतौर इंजीनियर सरकारी सेवा में थे। 1972 में एक फिल्म में गीत लिखकर वह मशहूर हुए और दशकों तक फिल्मों का हिस्सा रहे। उन्होंने के जे यसुदास, पी जयचंद्रन, एस जानकी और कई संगीतकारों के लिए गीत लिखे।