क्या स्त्री के चरित्र को परखती है रंगरसिया?
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भारतीय पौराणिक किरदार हिंदी सिनेमा के पात्रों की प्रेरणा बनते आए हैं। पर्दे पर अगर समय समय पर राम, लखन और रावण दिखे हैं तो सति सावित्री से लेकर सीता और द्रोपदी तक अलग-अलग रूपों में नजर आई हैं।
अभिनेत्री नंदना सेन की मानें तो निर्देशक केतन मेहता की फिल्म ‘रंग रसिया’ में सुगंधा बाई का उनका किरदार भी कुछ ऐसी ही पौराणिक कल्पनाओं से गूंथा गया है। नंदना का कहना है कि फिल्म में सुगंधा की कहानी सीता की अग्निपरीक्षा और द्रौपदी के चीरहरण से प्रभावित है, जो पुरुषों के साथ पूरे समाज के पाखंड को भी चुनौती देती है।
नहीं बदली स्त्री को लेकर सोच
नंदना ने बताया, ‘फिल्म में एक सशक्त दृश्य है जो सीता की अग्निपरीक्षा और द्रौपदी के चीरहरण को अप्रत्यक्ष रूप से दर्शाता है। इसे देखकर आसानी से आसानी से यह समझा जा सकता है कि सीता से लेकर सुगंधा तक स्त्रियों को लेकर पुरुषों की मानसिकता में कोई बदलाव नहीं आया है।
नंदना का कहना है, ‘हमारी फिल्म 19वीं सदी का आईना है। लेकिन सच पूछें तो हालात आज भी पुराने जैसे हैं। स्त्री के आचरण की परीक्षा लेने का चलन रुका नहीं है। कहने को हम आधुनिक हैं, परंतु मानसिकता पुरानी है।
स्त्री को किया जाता है बाध्य
जबकि उनकी प्रेरणा और प्रेमिका सुगंधा बाई बनी हैं नंदना सेन। फिल्म सात नवंबर को रिलीज होगी। यह फिल्म दुनिया के कई फिल्म समारोह में रिलीज होकर सुर्खियां बटोर चुकी है।