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'49वां गोवा अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह' - संवेदना और समझ की परत-दर-परत परीक्षा

Sun, 09 Dec 2018 07:30 PM IST
सुनील मिश्र
सुनील मिश्र Updated Sun, 09 Dec 2018 07:30 PM IST
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Know all about 49th Goa International Film Festival of India
International Film Festival of India - फोटो : Instagram
गोवा में 49वां अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह 28 नवंबर को सम्पन्न हुआ। गोवा फिल्म फेस्टिवल भारत का सबसे पुराना फिल्म समारोह है। 2003 से यह समारोह स्थायी रूप से गोवा में होने लगा। भारत सरकार का सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, इस समारोह का प्रमुख आयोजक है। इस बार समारोह में दुनिया भर से 220 फिल्में समारोह में प्रदर्शन के लिए आमंत्रित की गईं। इस वर्ष फोकस इस्राइल की फिल्म्स के प्रदर्शन पर रहा।
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समारोह की शुरुआत ‘द एस्पर्न पेपर्स’ से की गई थी, जिसका निर्देशन जूलियन लैंड्स ने किया था। 19वीं सदी की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर बनी इस फिल्म की मूल प्रेरणा हेनरी जेम्स का एक प्रसिद्ध उपन्यास है। इसके अलावा इस्राइल की कई फिल्मों का प्रदर्शन किया गया, जिनमें ‘द बबल’, ‘फुटनोट’, ‘लॉन्गिंग’, ‘फ्लोच’, ‘द अदर स्टोरी’, ‘शालोम बालीवुड’, ‘द अन-आर्थोडॉक्स’ और ‘वर्किंग वूमन’ शामिल थीं। 
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‘शालोम बॉलीवुड- द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ इंडियन सिनेमा’ को देखना दिलचस्प अनुभव था, क्योंकि यह फिल्म दो हजार साल पुराने यहूदी सम्प्रदाय की पिछली पीढ़ी के बॉलीवुड में योगदान को रेखांकित करती है, जिससे सुलोचना रूबी मायर्स, जॉन डेविड, नादिरा, प्रमिला आदि कलाकारों के भारतीय सिनेमा में अविस्मरणीय योगदान का पता चलता है। 
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इसके अलावा महान स्वीडिश फिल्मकार इंगमार बर्गमैन की यादगार फिल्मों का प्रदर्शन समारोह का बेहतरीन हिस्सा था जिसमें ‘परसोना’, ‘फनी एंड अलेक्जेंडर’, ‘द सेवंथ सील’, ‘समर विद मोनिका’, ‘वाइल्ड स्ट्राबेरीज’ दर्शकों को आकर्षित किया। फेस्टिवल केलिडोस्कोप में ‘कोल्डवार’, ‘द गिल्टी’ जैसी फिल्में समय की गति और यथार्थ को मानवीय समझ और कुंठाओं की अलग सतह पर परीक्षा लेती दिखाई देती हैं। वल्डर् पैनोरमा में ‘डॉटर्स ऑफ माइन’, ‘द हैप्पी प्रिंस’, ‘द ब्रा’, ‘ब्रदर्स’, ‘मग’, ‘माय मास्टरपीस’, ‘हाई लाइफ’, ‘द प्राइज’, ‘द सीन एंड द अनसीन’, ‘विंटर फाइल्स’, ‘द ओल्ड रोड’, ‘एन एलीफेंट सिटिंग स्टिल’ की देखने वालों ने सराहना की। 

विशेष प्रदर्शन श्रेणी में ट्यूनीशिया की तीन फिल्में ‘ब्यूटी एंड द डॉग्स’, ‘डियर सन’ और ‘व्हिस्परिंग सैंड्स’ का प्रदर्शन किया गया। ‘व्हिस्परिंग सैंड्स’ अरब मूल की एक कनाडाई महिला की भावपूर्ण यात्रा पर आधारित थी, जो एक संवेदनशील कारण से ट्यूनीशिया आती है। यह फिल्म दर्शकों की स्मृति में बनी रहती है। इस फिल्म को देखकर सार्थक सिनेमा की परंपरा का निर्वहन करने वाले फिल्मकारों को दाद देने को जी चाहता है। 


इस फिल्म का निर्देशन नासेर खेमीर ने किया था। परंपरा के तौर पर समारोह में दिवंगत कलाकारों को याद किया गया। श्रीदेवी और विनोद खन्ना को उनकी फिल्में ‘मोम’ एवं ‘अचानक’, ‘लेकिन’, ‘अमर अकबर अंथनी’ के माध्यम से श्रद्धांजलि दी गई। वहीं शशि कपूर, एम. करुणानिधि और कल्पना लाजमी को भी उनकी फिल्मों के माध्यम से याद किया गया।
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