Jyothika: हिंदी सिनेमा में वापसी कर ज्योतिका खुश, कहा- ओटीटी के दौर में महिलाओं को मिल रहे शानदार अवसर
Jyothika: हाल ही में ज्योतिका वेब सीरीज डब्बा कार्टेल में नजर आई हैं। इस सीरीज को लेकर हाल ही में उन्होंने खुलकर बात की।
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साउथ की मशहूर अभिनेत्री ज्योतिका हिंदी सिनेमा में वापसी करके काफी खुश हैं। उनके मुताबिक यह समय महिलाओं के लिए खास है, क्योंकि ओटीटी प्लेटफॉर्म पर उन्हें अच्छे और मजबूत किरदार निभाने का मौका मिल रहा है। ज्योतिका ने 2024 में सुपरनैचुरल थ्रिलर फिल्म 'शैतान' से हिंदी सिनेमा में वापसी की थी। यह उनकी पहली फिल्म 'डोली सजा के रखना' (1998) के 26 साल बाद रिलीज हुई थी।
ज्योतिका ने न्यूज एजेंसी पीटीआई से बातचीत में कहा, "हिंदी सिनेमा में वापसी के लिए मुझे 25 साल लग गए। आज ओटीटी का दौर है। इसमें हर उम्र की महिलाओं को शानदार काम मिल रहा है। मुझे अलग-अलग भाषाओं के कलाकारों के साथ मौका मिल रहा है। मैं अपनी जिंदगी की राह पहले से तय नहीं करती, बस बहाव के साथ चलती हूं। यह सफर सचमुच बहुत खूबसूरत है।"
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ज्योतिका इन दिनों नेटफ्लिक्स की क्राइम सीरीज 'डब्बा कार्टेल' में नजर आ रही हैं। शबाना आजमी, निमिशा सजयन, अंजलि आनंद, साई ताम्हणकर और लिलेट दुबे भी हैं। हितेश भाटिया के निर्देशन में बनी यह सीरीज पांच आम महिलाओं की कहानी है। ये महिलाएं एक साधारण डब्बा सर्विस चलाती हैं, जो धीरे-धीरे एक खतरनाक ड्रग डिलीवरी ऑपरेशन में बदल जाती है।
46 साल की ज्योतिका ने कहा कि उन्हें अपने किरदार 'वरुणा' से गहरा जुड़ाव महसूस हुआ। वरुणा एक ऐसी महिला है जो पहले कॉर्पोरेट की बड़ी दुनिया में थी और बाद में कपड़ों का बिजनेस शुरू करने का सपना देखती है। ज्योतिका ने कहा, "यह किरदार एक आम महिला की तरह दिखता है। वास्तविकता से भरे किरदार निभाना मुश्किल होता है, क्योंकि इनमें आप खुद को देखते हैं। मुझे ऐसे रोल आकर्षित करते हैं जो सच के करीब हों। हालांकि, ऐसे किरदार अच्छे लिखे हुए कम ही मिलते हैं।"
ज्योतिका ने 'डब्बा कार्टेल' से जुड़ने की एक बड़ी वजह बताई। उन्हें इसकी स्क्रिप्ट और किरदारों की गहराई पसंद आई, लेकिन सबसे बड़ा कारण शबाना आजमी के साथ काम करना था। उन्होंने कहा, "शबाना जी के साथ काम करना मेरे लिए बड़ा कारण था। सीरीज में गणपति उत्सव का एक सीन है, जिसमें सिर्फ हम दोनों का फ्रेम है। स्क्रीन पर उस दुर्लभ शॉट देखकर मेरे रोंगटे खड़े हो गए।"
'काखा काखा', 'टैगोर', 'चंद्रमुखी', 'मोझी' और 'काथल – द कोर' जैसी फिल्मों से लोगों के बीच खास पहचान बनाने वाली ज्योतिका के अनुसार सिनेमा में महिलाओं के लिए किरदार अब बेहतर लिखे जा रहे हैं। इस बारे में उन्होंने, "हम अब अलग-अलग तरह के रोल कर रहे हैं। पुरुष प्रधान फिल्मों में भी हमारी मौजूदगी बढ़ रही है। कहानियां अब हमारी भी बयां की जा रही हैं। यह सच्चा विकास है। हम अपनी भाषाओं के दायरे से बाहर निकलकर नए मौके तलाश रहे हैं।"