IFFI 2022: ‘गुंडा’ के ‘बुल्ला’ मुकेश ऋषि की खलनायक छवि से डरते थे बच्चे, महिलाएं भी कहती थीं घटिया बातें
फिल्म 'गुंडा' का बुल्ला हो या सलमान खान की फिल्म 'गर्व' का जफर सुपारी, मुकेश ऋषि कई बार पर्दे पर निगेटिव किरदारों में नजर आए हैं। अपनी इसी खलनायक छवि के कारण उन्हें असल जिंदगी में परेशानी का सामना करना पड़ा।
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सिनेमा जगत से जुड़े सितारे बड़े पर्दे पर अलग-अलग भूमिकाएं निभाना पसंद करते हैं। बहुत से ऐसे अभिनेता होते हैं, जो अपने एक किरदार से इतने फेमस हो जाते हैं कि लोग उन्हें उसी नाम से जानने लगते हैं। वहीं, बॉलीवुड फिल्मों में अपनी दमदार अदायगी से लोगों का दिल जीतने वाले मुकेश ऋषि ने खलनायक के रूप में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। लेकिन खलनायक बन पर्दे पर लोगों को डराने वाले मुकेश से असल जिंदगी में भी बच्चे डरने लगे थे। दरअसल, अभिनेता 53वें भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (आईएफएफआई) गोवा में पहुंचे थे।
फिल्म 'गुंडा' (1998) का बुल्ला हो या सलमान खान की फिल्म 'गर्व' (2004) का जफर सुपारी, मुकेश ऋषि कई बार पर्दे पर निगेटिव किरदारों में नजर आए और अपनी छाप लोगों के दिमाग में छोड़ी। वहीं, अब एएनआई से बातचीत में 66 वर्षीय ने अभिनेता ने खुलासा किया कि पर्दे पर निभाई गई खलनायक की छवि के चलते बच्चे उनसे डरने लगे थे। उन्होंने कहा, 'मुझे अभी भी याद है कि एक समय ऐसा था जब बच्चे मेरे पास नहीं आते थे..मेरी खलनायक छवि के कारण वे मुझसे डरते थे। यहां तक कि कई महिलाएं भी मुझे घटिया बातें कहती थीं। आप ये कैसा काम कर रहे हो.. आप अच्छे अच्छे दिखते हो ये क्या रोल कर रहे हो..। मैंने अतीत में ऐसी कई बातें सुनी हैं।'
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स्टीरियोटाइप होने के बावजूद मुकेश ऋषि को कोई मलाल नहीं है। उन्हें लगता है कि लोग बदलते समय के साथ समझदार हो गए हैं और उनके काम को बेहतर तरीके से समझने लगे हैं। उन्होंने कहा, 'बच्चे अब मुझसे डरते नहीं हैं। यह सब इसलिए है क्योंकि हमारे सिनेमा में नेगेटिव कैरेक्टर विकसित हुए हैं, जिस तरह से लोग उन किरदारों को देखते हैं। पहले कोई सोशल मीडिया नहीं था, कोई डिजिटल प्लेटफॉर्म नहीं था, केवल थिएटर थे, फैंस के पास सितारों तक पहुंचने की का कोई जरिया ही नहीं था, लेकिन अब चीजें बदल गई हैं। आज के समय में दर्शक वास्तविक और रील किरदारों के बीच के अंतर को जानते हैं क्योंकि उन्हें सितारों के व्यक्तिगत विवरण जानने को मिल रहे हैं।'
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वहीं, उन्होंने माना कि 'बुल्ला' डायलॉग बोलने के बाद उन्हें अच्छा नहीं लगा क्योंकि कई लोगों को यह डबल मीनिंग लगता है। उन्होंने कहा कि हो सकता है कि डायलॉग बोलकर मैंने गलती की हो, उन पंक्तियों को कहने के बाद मुझे अच्छा नहीं लगा। हालांकि, मैं इस युवा पीढ़ी को धन्यवाद देना चाहता हूं कि उन्होंने मुझे 'गुंडा' में बुल्ला डायलॉग देते हुए देखकर मुझे जज नहीं किया, जो वर्षों पहले रिलीज हुई थी। उन्होंने इसमें हास्य पाया और इससे मीम्स बनाए। मुकेश ऋषि के वर्कफ्रंट की बात करें तो उन्होंने 'निदार' नाम की एक पंजाबी फिल्म का निर्माण किया है, जो उनके बेटे राघव ऋषि की डेब्यू फिल्म है।
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