फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Entertainment ›   Bollywood ›   Highest grossing Indian Movies

ये हैं बॉलीवुड की सबसे ज्यादा कमाने वाली फिल्में

Thu, 02 May 2013 04:27 PM IST
दिनेश श्रीनेत
दिनेश श्रीनेत Updated Thu, 02 May 2013 04:27 PM IST
विज्ञापन
Highest grossing Indian Movies

कहते हैं कि दादा साहेब फालके की फिल्म 'लंका दहन' ने इतना कारोबार किया कि सिक्कों को बैलगाड़ियों में लादकर लाना पड़ता था। इस तरह शुरुआत से ही भारतीय सिनेमा उद्योग एक सपनों की दुनिया में बदल गया। जहां शोहरत, पैसा, ग्लैमर सबकुछ था। भारतीय फिल्म के इतिहास में ऐसी तमाम फिल्में आईं, जिनकी वजह से कमाई के रिकार्ड बने और टूटे। आइए एक नजर डालते हैं उन फिल्मों पर। 

विज्ञापन


किस्मत (1943)
तीन साल तक कोलकाता के एक ही सिनेमाहाल में चलने वाली 'किस्मत' कई मायनों में एक अनोखी फिल्म थी। बांबे टॉकीज़ की इस 'बोल्ड' फिल्म ने भारतीय सिनेमा के इतिहास में न सिर्फ पहली ब्लाकबस्टर फिल्म के रूप में अपना नाम दर्ज करा लिया बल्कि इसी फिल्म के जरिए अशोक कुमार के रुप में भारतीय सिनेमा को पहला 'एंटी हीरो' भी मिला। पहली बार भारतीय सिनेमा के पर्दे पर किसी अविवाहित लड़की को गर्भवती दिखाया गया। पहली बार किसी फिल्म में कोई किरदार डबल रोल में दिखा। यही नहीं ब्रिटिश राज के दौरान बड़ी चालाकी से फिल्माये गए इसके एक गीत "दूर हटो ऐ दुनिया वालों, हिन्दुस्तान हमारा है" ने लोगों के मन में आजादी की अलख जगा दी। फिल्म ने उस समय एक करोड़ रुपये का कारोबार किया, जो आज के समय में 63 करोड़ 20 लाख के बराबर है।
विज्ञापन


बरसात (1949)
"हवा में उड़ता जाए मेरा लाल दुपट्टा..." फिल्म 'बरसात' का यह गीत जैसे उस दशक में घर से बाहर कदम रखने वाली लड़कियों की आजादी का गीत बन गया। यह शंकर-जयकिशन का कमाल था कि बरसों-बरस बीत गए मगर "बरसात में हमसे मिले तुम" आज भी सदाबहार बना हुआ है और भीगे मौसम में कोई न कोई यह गीत गुनगुना ही पड़ता है। यह राज कपूर के निर्देशन में बनी पहली हिट फिल्म भी थी। इस फिल्म में पहली बार दर्शकों को प्रेम के आवेग से भरा रूप देखने को मिला। इस फिल्म के बाद ही आरके स्टूडियो की स्थापना हुई और इसका एक दृश्य सदा सदा के लिए आरके फिल्म्स का लोगो बन गया। इस फिल्म ने एक करोड़ 10 लाख का कारोबार करके 'किस्मत' का रिकार्ड तोड़ दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन


आवारा (1951)
यह पहली बार हुआ था कि किसी फिल्म की लोकप्रियता भारत की सरहदें पार करते हुए पूरे दक्षिण एशिया, रूस और एशिया फैल गई। रुस, चीन, तुर्की और रोमानिया के लोग बिना शब्दों को समझे शैलेंद्र के लिखे गीत "आवारा हूँ" को गुनगुनाने लगे। ख्वाज़ा अहमद अब्बास की यथार्थवादी पटकथा को राज कपूर ने रूमानियत का कुछ ऐसा जामा पहनाया कि फिल्म ने कला और लोकप्रियता दोनों में नए प्रतिमान खड़े कर दिये। कान फिल्म फेस्टिवल में यह फिल्म ग्रां प्री के लिए नॉमिनेट हुई और टाइम मैगजीन की आल टाइम ग्रेट 100 फिल्म्स की लिस्ट में यह 22वें नंबर पर है। एक करोड़ 25 लाख का कारोबार करके राज कपूर ने अपनी ही पिछली फिल्म का रिकार्ड तोड़ दिया।

आन (1952)
भारत की पहली टेक्निकलर फिल्म। स्क्रीन पर जैसे रंग उड़ेल दिए गए हों। आज भी यह फिल्म अभी खूबसूरत फोटोग्राफी से हतप्रभ करती है। यह निर्देशक महबूब की सूझबूझ और कड़ी मेहनत का नतीजा था। 'आन' को उन्होंने एक भव्य मेलोड्रामेटिक फिल्म बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। हॉलीवुड के सेलिस बी डिमेलो की तर्ज पर भव्य सेट, आउटडोर शूटिंग, दिलचस्प ऐक्शन सीक्वेंस के साथ-साथ मधुर संगीत और चुटीले संवादों वाली इस फिल्म ने तो जैसे आगे आने वाली सफल फिल्मों की इबारत लिख दी। आन के बाद आज तक हिट फिल्में कमोवेश इसी फार्मुले का इस्तेमाल करते हैं। यह दिलीप कुमार के कॅरियर की सफलतम फिल्मों में से एक है। फिल्म ने डेढ़ करोड़ का मुनाफा कमाया।

श्री 420 (1955)
"मेरा जूता है जापानी..." गाते हुए राज कपूर इस फिल्म में 'लिटिल ट्रैंप' के चार्ली चैपलिन से प्रभावित दिखे मगर भारतीय सामाजिक व्यवस्था और करप्शन पर शायद इससे बेहतर फिल्म आज तक नहीं बनी है। फिल्म के अंत में राज कपूर का यह डॉयलाग ही सब कुछ कह देता है, "ये चार सौ बीस नहीं, श्री चार सौ बीस हैं!" यानी समाज के सम्मानित ठग। फिल्म को लिखा ख्वाजा अहमद अब्बास ने और यादगार संगीत दिया था शंकर जयकिशन ने। इस फिल्म से राज कपूर और नरगिस की जोड़ी और परवान चढ़ी। बारिश में "प्यार हुआ इकरार हुआ" गीत को भला कौन भूल सकता है। श्री 420 के जरिए एक बार फिर आरके फिल्म्स ने अपनी कामयाबी की कहानी लिखी। फिल्म ने उस जमाने में दो करोड़ कमाए।

मुगले आज़म (1960)
सन् 1922 में सलीम-अनारकली की प्रेम कहानी को आधार बनाकर इम्तियाज़ अली ताज़ ने एक उपन्यास लिखा। सन 1940 में के.आसिफ ने उस पर आधारित एक नाटक देखा और इस कहानी पर फिल्म बनाने का फैसला किया। आर्थिक अनिश्चितताओं और तमाम तरह की दिक्कतों के बाद आखिरकार जब मुगले आज़म बनकर तैयार हुई तो इसने कामयाबी के ऐसा रिकार्ड बनाए जो अगले 15 सालों तक कोई नहीं तोड़ सका। यह उस दौर की सबसे महंगी फिल्म थी और इसने साढ़े पांच करोड़ कमाए। हालांकि फिल्म जब रिलीज हुई तो रंगीन फिल्मों का दौर शुरु हो गया था मगर इस फिल्म के गीत-संगीत, संवाद और दिलीप कुमार, पृथ्वीराज कपूर और मधुबाला के अविस्मरणीय अभिनय ने धूम मचा दी।

शोले (1974)
एक ऐसी फिल्म जिसके रिलीज होने पर समीक्षकों ने उसे औसत दर्जे का बताया और पहले हफ्ते में उसे फ्लाप घोषित कर दिया गया। धीरे-धीरे इसकी लोकप्रियता ने रफ्तार पकड़ी और आज की तारीख में यह भारतीय सिनेमा की 'आल टाइम ग्रेट' फिल्म है, न सिर्फ बिजनेस के मामले में बल्कि कहानी कहने के दिलचस्प सलीके के कारण भी। जहां एक तरफ हिंसा के अतिरेक के कारण इस फिल्म की आलोचना हुई, न्यूयार्क टाइम्स जैसे अखबारों में इस फिल्म को हिन्दी फिल्म मेकिंग में क्रांतिकारी बदलाव और पटकथा लेखन में प्रोफेशनलिज्म की शुरुआत के तौर पर देखा गया। फिल्म ने 65 करोड़ का कारोबार किया।

हम आपके हैं कौन...! (1994)
आलोचकों ने भले ही इस फिल्म को शादी का वीडियो कह डाला हो, 19 साल तक कायम 'शोले' की सफलता के रिकार्ड को तोड़ने का श्रेय इसी फिल्म को जाता है। इसके अलावा 100 करोड़ मुनाफे वाले क्लब की शुरुआत भी इसी फिल्म से हुई थी। राजश्री प्रोडक्शंस ने अपनी ही फिल्म 'नदिया के पार' का शहरी संस्करण बनाया और यह प्रयोग सफल रहा। सूरज बड़जात्या की इस फिल्म में न तो हिंसा थी, न अंगप्रदर्शन, न कोई खलनायक। एक गाने में बारिश भी हुई तो हिरोइन छतरी लिए खड़ी रही। एक-दो दृश्यों को छोड़ दें तो कैमरा घर के भीतर ही घूमता रहा। इसके बावजूद दर्शकों ने फिल्म को हाथों-हाथ लिया। फिल्म ने लगभग 70 करोड़ का कारोबार किया, ओवरसीज को मिला लें तो यह लगभग 100 करोड़ के आसपास बैठता है।

गदर, धूम और गजिनी
सन 2001 से 2008 तक इंडस्ट्री में भी काफी बदलाव आए। फिल्में तकनीकी तौर पर ज्यादा बेहतर होती गईं। नतीजे के तौर पर हम देख सकते हैं कि इन सात-आठ सालों में तीन ऐसी फिल्में ब्लाकबस्टर रहीं, जिनमें काफी ऐक्शन था। सन 2001 में आई गदर भारत विभाजन के बैकड्राप पर बनी एक प्रेमकथा थी, जिसमें सनी के अभिनय और ऐक्शन को लोगों ने बहुत पसंद किया। फिल्म ने 75 करोड़ से ज्यादा कमाए इसी तरह से 2006 धूम 2 का कारोबार 80 पहुंच गया। फिल्म के निर्देशक संजय गढ़वी ने इस फिल्म एक-एक एक्शन सीक्वेंस की स्टोरी बोर्डिंग कर रखी थी। और 2008 में आई आमिर खान की गजिनी, जो क्रिस्टोफर नोलन ('डार्क नाइट राइजेज़' और 'इंसेप्शन' वाले) की फिल्म मेमेंटो पर आधारित तमिल फिल्म 'गजिनी' का रिमेक थी। जबरदस्त वायलेंस वाली इस फिल्म ने 114 करोड़ कमाए।


थ्री ईडियट्स (2009)
शोले की तरह इस फिल्म ने भी ऐसा रिकार्ड बना दिया है, जिसे अगले कई सालों तक तोड़ना मुश्किल है। चेतन भगत के उपन्यास 'फाइव प्वाइंट समवन' पर आधारित यह फिल्म एक संवेदनशील और गंभीर मुद्दे को छूती थी। मगर निर्देशक राजकुमार हीरानी ने कहानी को इतने दिलचस्प ढंग से प्रस्तुत किया कि फिल्म के 'चतुर' और 'आल इज वेल' जैसे शब्दों को लोग आम जीवन में मुहावरों की तरह प्रयोग करने लगे। इस फिल्म ने 200 करोड़ रुपये कमाए और शायद 'थ्री ईडियट्स' अकेली ऐसी भारतीय फिल्म है जिसके रीमेक के राइट्स चाइना और हॉलीवुड में खरीदे जा चुके हैं।

100 Years Of Cinema

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें मनोरंजन समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। मनोरंजन जगत की अन्य खबरें जैसे बॉलीवुड न्यूज़, लाइव टीवी न्यूज़, लेटेस्ट हॉलीवुड न्यूज़ और मूवी रिव्यु आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed