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Hindi News ›   Entertainment ›   Bollywood ›   Ghulam Sadiq Khan Death Anniversary Know About His Personal And Professional Life

Ustad Ghulam Sadiq Khan: रामपुर-सहसवान घराने से ताल्लुक रखते थे गुलाम सादिक खान, 2005 में हुए थे पद्मश्री से सम्मानित

Sun, 15 May 2022 10:07 AM IST
मेघा चौधरी एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: मेघा चौधरी Updated Sun, 15 May 2022 10:07 AM IST
सार

उस्ताद गुलाम सादिक खान भारतीय शास्त्रीय गायक थे, जिन्होंने ख्याल गायकी में विशेषज्ञता हासिल की। 22 अगस्त को रामपुर उत्तर प्रदेश में जन्मे उस्ताद को 2005 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। 15 मई 2016 को उनका 76 वर्ष की आयु में निधन हो गया।

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Ghulam Sadiq Khan Death Anniversary Know About His Personal And Professional Life
उस्ताद गुलाम सादिक खान - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

उस्ताद गुलाम सादिक खान एक भारतीय शास्त्रीय गायक थे, जिनका जन्म 22 अगस्त को रामपुर उत्तर प्रदेश में हुआ था। वह रामपुर-सहसवान घराने के थे। उन्हें नौ साल की उम्र से ही उनके पिता उस्ताद गुलाम जाफर खान, जो एक भारतीय सारंगी वादक थे, ने संगीत में दीक्षित किया था। बाद में, उन्होंने उस्ताद मुश्ताक हुसैन खान के मार्गदर्शन में अपना प्रशिक्षण जारी रखा, जिन्हें भारत में पहला पद्म भूषण मिला था। आइए आज उस्ताद गुलाम सादिक खान की पुण्यतिथि पर जानते हैं उनके जीवन से जुड़ी कुछ बातें...

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विदेशों में भी किए शोज
उस्ताद गुलाम सादिक खान ने ख्याल गायकी में विशेषज्ञता हासिल की और ठुमरी, दादरा और भजन गाए। उन्होंने भारत के साथ ही यूके, ऑस्ट्रेलिया, साऊदी अरब, ओमान, मॉरीशस, सिंगापुर, हांकांग, इंडोनेशिया, थाईलैंड, अफगानिस्तान और चीन में भी अपने हुनर का प्रदर्शन किया था। इसके साथ ही वह आकाशवाणी और दूरदर्शन के शीर्ष श्रेणी के कलाकार थे।

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Ghulam Sadiq Khan Death Anniversary Know About His Personal And Professional Life
उस्ताद गुलाम सादिक खान - फोटो : सोशल मीडिया

डीयू में थे सीनियर लेक्चरर
उन्होंने जसपिंदर नरूला (बॉलीवुड गायिका) और उनके बेटे, उस्ताद गुलाम अब्बास खान, जो एक ख्याल और गजल गायक हैं, सहित कई लोगों को शिक्षा दी है। उन्होंने अपने पोते गुलाम हसन खान को भी शिक्षा दी, जो एक हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायक हैं। इसके अलावा वह दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) में संगीत संकाय में सीनियर लेक्चरर के रूप में काम करते थे।

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2005 में मिला पद्मश्री
रामपुर-सहसवान घराने के उस्ताद गुलाम सादिक खान को 2005 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया। उस्ताद गुलाम सादिक खान ही नहीं उनके घराने में अब तक बहुत लोगों को ये सम्मान मिल चुका है। शुरुआत में उस्ताद गुलाम सादिक खान को धीमी पहचान मिली, लेकिन जब उन्हें लोग पहचानने लगे तो उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। 15 से 27 साल की उम्र में उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ा। लेकिन 1956 में देश भर में प्रसिद्ध हो गए। पहले उन्हें लोगों के पास जाकर कार्यक्रम के लिए पूछना पड़ता था और बताना होता था कि वह कौन हैं, लेकिन बाद में सब आसान हो गया।

Ghulam Sadiq Khan Death Anniversary Know About His Personal And Professional Life
उस्ताद को पद्मश्री से सम्मानित करते पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम - फोटो : सोशल मीडिया

गुरु को देते थे भगवान का दर्जा
एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने कहा था, ‘मैंने 10 से 12 साल तक रियाज में संघर्ष किया और पांच साल तक रोजाना 10 घंटे से ज्यादा अभ्यास किया। मेरे पास नियमित रूप से कार्यक्रम आने लगे और कठिन समय के बाद मेरी पहचान बन गई। मैंने सीखा कि संगीत में ईमानदारी सबसे बड़ी चीज है। साथ ही उस्ताद पर विश्वास और निर्भरता सर्वोपरि है। उन्हें भगवान के रूप में माना जाना चाहिए।’ वहीं, 15 मई 2016 को गुलाम सादिक खान का 76 वर्ष की आयु में निधन हो गया।

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