फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Entertainment ›   Bollywood ›   Four bollywood movie in oscar nomination

ऑस्कर तक का सफर करने वाली 4 बॉलीवुड फिल्मों की खूबियां

Thu, 04 Feb 2016 07:07 PM IST
Updated Thu, 04 Feb 2016 07:07 PM IST
विज्ञापन
Four bollywood movie in oscar nomination

भारतीय सिनेमा के 103 साल के इतिहास में महज चार ऐसी फिल्में हैं, जिन्होंने ऑस्कर तक का सफर तय किया। भारतीय फिल्माकार का दावा है कि बीते 10-15 सालों में हिन्दी सिनेमा ने बहुत उन्नति की है। लीक से हटकर प्रयोगात्मक फिल्में बनाने की कोशिश की गई है। लेकिन दुनियाभर की फिल्मों की अच्छी-बुरी होने का अव्वल पैमाना ऑस्कर अवार्ड की बात आती है तो हमारे पास महज चार फिल्में हैं, जो कि चारों की चारों 2005 से पहले की हैं।

विज्ञापन


हालांकि बॉलीवुड इडंस्ट्री की हमेशा से शिकायत रही है कि ऑस्कर चयनकर्ता जानबूझ कर हिन्दी सिनेमा की उपेक्षा करते हैं। लेकिन उन उपेक्षाओं के बावजूद बॉलीवुड की चार फिल्में ऑस्कर तक पहुंचीं, दावेदारी पेश की। हालांकि कोई जीतने में सफल नहीं हुईं। लेकिन इन चारों फिल्मों ने प्रतिद्वंदियों को अच्छी प्रतियोगिता दी।
विज्ञापन


अमेरिका की संस्था अमेरिकन अकादमी ऑफ मोशन पिक्चर आर्ट्स एंड साइंसेस (AMPAS) हर साल दुनियाभर की सर्वश्रेष्ठ फिल्मों की प्रविष्टियां मंगाकर उनमें से कुछ को विभिन्न श्रेणियों में 'विशिष्ट उपलब्धि के लिए योग्यता पुरस्कार' देती है। भारत की चारों फिल्में एक ही श्रेणी 'बेस्ट फॉरेन लेंग्वेज फिल्म' में चुनी गई थीं। उन सभी चार फिल्मों की अपनी खूबियां हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

इतने सालों बाद भी नहीं मिली 'मदर इंडिया' जैसी कहानी

Four bollywood movie in oscar nomination

ऑस्कर के लिए चुनी जाने वाली सबसे पहली बॉलीवुड फिल्म थी, 'मदर इंडिया'। सन 1957 में यह फिल्म ऑस्कर के लिए नामांकित की गई थी। फिल्मों के जानकार बताते हैं कि इसमें अ‌‌भिनेत्री नर्गिस का किरदार पूरे हिन्दुस्तान की कहानी कहता है।

महबूब खान निर्देशित और नर्गिस, सुनील दत्त, राजेंद्र कुमार और राज कुमार अभिनीत फिल्म की कहानी में तब के भारत की असली तस्वीर दिखाई देती है। सूदखोरों के चंगुल में फंसे विवश परिवारों का सजीव फिल्मांकन किया गया है।

इसके अलावा पति के घर छोड़कर जाने, परिवार की बदहाली, भूख से एक बच्चे की मौत, दूसरे बच्चे की भूख देखकर कशमकश में फंसी नायिका का अभिनय लाजवाब है। कहानी का क्लाइमेक्स इस फिल्‍म की जान है।

आखिर में अपने दुश्मन के बेटी की आबरू बचाने के लिए अपने बेटे को गोली मारने वाली मां की इस कहानी ने ऑस्कर संचालन समिति को अवार्ड के लिए नामांकित करने पर मजबूर कर दिया था।

फिल्म का एक बेहद अहम और जरूरी पक्ष इस फिल्म के गाने हैं। इसमें संगीत नौशाद का है और गीत शकील बदायुंनी के थे। फिल्म के गाना "दुःख भरे दिन बीते रे" आज भी मिसाल है।

हमेशा सोचने पर मबूर करती है स्लम की दुनिया और ये फिल्‍म

Four bollywood movie in oscar nomination

सन् 1988 में आई मीरा नायर निर्देशित फिल्म 'सलाम बॉम्बे' दूसरी फिल्म थी, जिसने ऑस्कर आवर्ड में जगह बनाई। इसे भी बेस्ट फॉरेन लेंग्वेज फिल्म श्रेणी में नामांकित किया गया था।

फिल्म मुबई के स्लम इलाकों के हालातों पर आधारित है। कई जानकारों का कहना था कि डैनी बॉयल की ऑस्कर जीतने वाली फिल्‍म 'स्लम डॉग मिलेनियर' से यह बिल्कुल कमतर नहीं थी। फिल्‍म में मुख्य किरदार में नाना पाटेकर और रघुबीर यादव थे।

फिल्म की शुरुआत एक लट्टू के खेल शुरू होती हैं और उसी लट्टू के खेल पर खत्म। भारतीय सिनेमा में आमतौर पर इससे पहले ऐसी कम ही बनती थीं, जो असल कहानी को असल कहानी की तरह प्रस्तुत करें। फिल्म साफ दिखाती थी कि मुंबई के स्लम इलाकों की भयानक रात की कोई सुबह नहीं होती।

फिल्म का मुख्य किरदार कृष्णा पूरी शिद्दत, पूरी ईमानदारी से मेहनत करने के बावजूद 500 रुपये तक नहीं जोड़ पाता। फिल्म में बाबा यानी नाना पाटेकर ने दलाली, नशाखोरी समेत मुंबई अंधेरे कारोबारों में शामिल व्यक्ति का जबर्दस्त अभिनय किया था।

लगन से बनी थी लगान, जीत सकती थी ऑस्कर

Four bollywood movie in oscar nomination

साल 2001 में आई आशुतोष गोवारिकर की फिल्म 'लगान' ऑस्कर को लेकर भारत की सबसे चर्चित फिल्‍म है। फिल्म जानकार बताते हैं कि इसे हराकर ऑस्कर जीतने वाली फिल्म 'नो मैन्स लैंड' से लगान बिल्कुल भी कमतर नहीं थी।

मल्टीस्टार लगान की कहानी इसकी अहम खूबी है, जो पूरी तरह अभिनेता आमिर खान के कंधो पर टिकी रहती है। आमतौर पर पूरा बॉलीवुड तब तक खेल विषय पर फिल्‍म बनाने में कतराता था। खुद जावेद अख्तर ने आमिर को बुलाकर यह फिल्‍म न बनाने की सलाह दी थी।

लेकिन लगान की कहानी का जो जादू आमिर खान ने फिल्म के लिए हां करने से पहले महसूस किया था, उसे ऑस्कर अवार्ड चयन समित‌ि तक ने महसूस किया। असल में लगान एक यथार्थवादी विषय पर बनी फिल्म थी।

शोले की तरह इसमें लोकप्रिय सिनेमा का लुत्फ आखिर तक बरकरार रहता है| कला और डिजाइनर नितिन देसाई के साथ मिलकर आशुतोष फिल्म को पूरी तरह सन् 1893 तक ले जाते हैं। बिल्कुल अहसास नहीं होता फिल्म 21वीं सदी में फिल्माई गई है। फिल्म की खूबियों में ए.आर. रहमान का संगीत भी शामिल है, जो अनिल मेहता के दृश्यों और जावेद अख्तर के बोलों पर एकदम सजीव सा लगता है।

भारतीय विधावाओं की कहानी ने हिला दिया था सबको

Four bollywood movie in oscar nomination

चौथी और आखिरी भारतीय फिल्म जिसने ऑस्कर में जगह बनाई वह है, 'वाटर'। यह पूर्णतः बॉलीवुड फिल्म नहीं थी, यह एक इंडो-कैनेडियन फिल्म थी। 2005 में आई इस फिल्म का स्क्रीनप्ले अनुराग कश्यप ने लिखा था, कहानी और निर्देशन दीपा मेहता का था और अभिनय का दारोमदार सीमा विश्वास, जॉन अब्राहम, लीजा रे पर था।

फिल्म भारत के सबसे संवदेनशील मुद्दे विधवा की जिंदगी पर आधारित था। फिल्म को दीपा मेहता साल 2000 में शबाना आजमी, नंदिता दास और अक्षय कुमार के साथ बनाना चाहती थीं। लेकिन इसके ‌विषय को देखते हुए किसी ने हामी नहीं भरी।

फिल्म की शूटिंग शुरू हुई तो कुछ दिनों बाद ही लोगों ने इसके सेट को ध्वस्त कर दिया आग लगा दी और गंगा में बहा दिया। अरुण पाठक नामक एक सामाजिक कार्यकर्ता ने तो फिल्म का निर्माण बंद न होने पर आत्महत्या कर लेने की नोटिस जारी कर दी थी।

छह सालों तक अटकने के बाद रिलीज होने के बाद भी परेशानियां कम नहीं हुईं। फिल्म की शूटिंग में इतने विवाद हुए कि बाद में दीपा मेहता की बेटी दिव्यानी सॉल्ट्जमैन को इस पर किताब लिखनी पड़ी, 'शूटिंग वाटर‌ः ए मदर-डॉटर'‌।

फिल्म पर भारत में प्रतिबंध भी लगे। लेकिन ऑस्कर चयनकर्ताओं ने फिल्म की गहराई को समझा। फिल्म को 'बेस्ट फॉरेन लेंग्वेज फिल्म' श्रेणी में नामांकित किया था।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें मनोरंजन समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। मनोरंजन जगत की अन्य खबरें जैसे बॉलीवुड न्यूज़, लाइव टीवी न्यूज़, लेटेस्ट हॉलीवुड न्यूज़ और मूवी रिव्यु आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed