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Film City in UP: लखनऊ बैठक में निर्माताओं को न बुलाए जाने से संगठन हैरान, पढ़िए क्या कहते हैं दिग्गज

Wed, 23 Sep 2020 01:11 PM IST
Pankaj Shukla पंकज शुक्ल
Updated Wed, 23 Sep 2020 01:11 PM IST
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Film producers body feel side lined in the proposed new film city in uttar Pradesh IFTPC IMPPA Guild
योगी आदित्यनाथ, शूटिंग की प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : एएनआई, pixabay

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की आगरा और मथुरा के पास प्रस्तावित नई फिल्म सिटी का हिंदी फिल्म निर्माताओं के तीनों बड़े संगठनों ने स्वागत किया है लेकिन, ये संगठन इस बात को लेकर भी हैरान है कि उत्तर प्रदेश के जिन अफसरों ने इस प्रस्तावित फिल्म सिटी को लेकर मंगलवार को लखनऊ में बैठक बुलाई, उन्होंने न तो किसी फिल्म निर्माता संगठन को इसका न्योता भेजा और न ही ऐसे फिल्म निर्माताओं से संपर्क किया जो नियमित फिल्में बनाते हैं और फिल्म निर्माण में नियमित निवेश करते हैं।

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उत्तर प्रदेश में प्रस्तावित फिल्म सिटी के जिन बिंदुओं को लेकर अमर उजाला ने 22 सितंबर के अपने अंक में खबर प्रकाशित की, उन सभी बिंदुओं पर उत्तर प्रदेश सरकार ने गौर किया और मंगलवार को लखनऊ में हुई बैठक में उन्हीं बिंदुओं के आधार पर ही फिल्म सिटी का मॉडल भी तैयार करके वितरित कर दिया लेकिन मंगलवार की बैठक में जिन लोगों को मुंबई से लखनऊ बुलाया गया, उनमें से अधिकतर ने पिछले पांच साल में एक भी मुख्यधारा की न तो फिल्म बनाई है और न ही कोई रोजगार बड़े पैमाने पर फिल्म उद्योग के लिए सृजित किया है। मुंबई के फिल्म निर्माताओं को लखनऊ बैठक में फिल्म उद्योग के इसी प्रतिनिधित्व पर आपत्ति है।
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इंडियन फिल्म एंड टीवी प्रोड्यूसर्स काउंसिल के उपाध्यक्ष और वरिष्ठ फिल्म निर्माता एन आर पचीसिया कहते हैं कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का ये कदम बहुत ही साहसिक और दूरगामी परिणाम देने वाला है लेकिन, जो फिल्म सिटी प्रस्तावित की गई है और जिसके लिए पांच हजार करोड़ रुपये के निवेश की बात की जा रही है, उसके क्रियान्वयन में उत्तर प्रदेश सरकार के संबंधित अफसरों को फिल्म निर्माताओं की संस्थाओं को भी बुलाना चाहिए था। बिना फिल्म निर्माताओं को भरोसे में लिए फिल्म सिटी में फिल्में बन पाना मुश्किल होगा। हिंदी सिनेमा के सुपर सितारों के साथ अब तक 15 फिल्में बना चुकी पचीसिया कहते हैं कि बिना किसी बड़े औद्योगिक घराने के साथ आए इस दिशा में कदम आगे बढ़ाना मुश्किल होगा। उत्तर प्रदेश सरकार को ये फिल्म सिटी पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल पर बनानी चाहिए और इस योजना के क्रियान्वयन में ऐसे लोगों को लगाना चाहिए जिनकी साख फिल्म इंडस्ट्री में अच्छी हो और जो नतीजों पर यकीन रखते हों।

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मंगलवार को हुई फिल्म सिटी की लखनऊ बैठक के बारे में मुंबई में फिल्म उद्योग से जुड़े लोग अच्छी बातें कर रहे हैं, लेकिन बैठक में बुलाए गए लोगों की लिस्ट फाइनल करने वाले अफसरों पर सवाल भी उठा रहे हैं। फिल्म निर्माताओं की देश की सबसे बड़ी संस्था इंडियन मोशन पिक्चर्स प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (इम्पा) के अध्यक्ष और वरिष्ठ फिल्म निर्माता टी पी अग्रवाल कहते हैं कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नई फिल्म सिटी बनाने का जो निर्णय लिया है, उसके लिए वह साधुवाद के पात्र हैं, लेकिन इस बारे में हुई या आगे होने वाली बैठकों में फिल्म निर्माताओं को तो बुलाना चाहिए। मंगलवार की बैठक में तो फिल्म निर्माताओं की किसी संस्था का कोई प्रतिनिधि नहीं बुलाया गया। फिल्म तो निर्माता बनाएंगे, न कि लेखक, गायक, गीतकार या निर्देशक।

मंगलवार को लखनऊ में नई फिल्म सिटी को लेकर हुई बैठक के बारे में हिंदी फिल्म जगत और दक्षिण भारत के बड़े फिल्म निर्माता भी अनौपचारिक बातचीत में इस बात पर हैरानी जता रहे हैं कि उत्तर प्रदेश के कुछ अफसरों ने कैसे वहां के मुख्यमंत्री को वस्तुस्थिति की सही जानकारी ही नहीं दी है। जिन फिल्म निर्माताओं से इस फिल्मसिटी में जगह खरीदने की उम्मीद की जा रही है, उन्हें बैठक में बुलाया नहीं गया और जो बैठक में मौजूद थे, उनमें से कोई गायक, गीतकार या निर्देशक खुद कोई नया फिल्म स्टूडियो उत्तर प्रदेश की इस नई फिल्म सिटी में बना सकने को न तो इच्छुक होगा और न ही इनमें से एक दो को छोड़ किसी के पास इतनी आर्थिक शक्ति ही है। हिंदी फिल्मों के तमाम बड़े निर्माताओं की एक और संस्था प्रोड्यूसर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने भी मंगलवार की बैठक के बारे में किसी आमंत्रण मिलने की सूचना से अनभिज्ञता जताई है।

गिल्ड ने उत्तर प्रदेश सरकार के इस नए कदम का स्वागत और समर्थन किया क्योंकि इससे फिल्म निर्माताओं के पास अपनी फिल्मों की शूटिंग के लिए नए विकल्प मुहैया होंगे लेकिन, गिल्ड का भी यही कहना है कि ऐसी किसी योजना के क्रियान्वयन में उन लोगों को जरूर शामिल किया जाना चाहिए जो व्यावहारिक रूप से फिल्म निर्माण में लगातार संलग्न हैं ताकि ये प्रस्तावित फिल्म सिटी उनकी जरूरतों का भी ख्याल रख सके।

 

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