Chhaava: छत्रपति शिवाजी के बड़े बेटे संभाजी को कहते थे 'छावा', वीरता ऐसी कि औरंगजेब चाहता था उनके जैसी औलाद
हाल ही में फिल्म ‘छावा’ का ट्रेलर लॉन्च इवेंट मुंबई में हुआ। फिल्म में विक्की कौशल छावा यानी छत्रपति संभाजी महाराज की भूमिका निभा रहे हैं। कौन थे छत्रपति संभाजी? दुश्मन होते हुए भी मुगल शासक औरंगजेब क्यों था उनका कायल? जानिए, छावा यानी छत्रपति संभाजी महाराज की असल कहानी?
विस्तार
इतिहास के पन्नों में वीरता, शौर्य की अनेक गाथाएं छिपी हैं। ऐसी ही कहानी छावा यानी छत्रपति संभाजी महाराज की है। मराठा साम्राज्य की नींव रखने वाले छत्रपति शिवाजी महाराज की बड़े बेटे थे संभाजी महाराज। वह छत्रपति शिवाजी महाराज की तरह ही वीर, साहसी योद्धा थे। पिता शिवाजी के बाद उन्होंने ही मराठा साम्राज्य की बाग-डोर संभाली। साथ ही मुगल शासक औरंगजेब से भी लंबे समय तक युद्ध किया, अपने लोगों की रक्षा की।
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पूरे जीवन काल में लड़े 120 युद्ध
संभाजी महाराज ने बचपन में ही अपनी मां को खो दिया था, ऐसे में उनकी परवरिश दादी जीजाबाई ने की। वह भी छत्रपति शिवाजी महाराज की तरह ही वीर बने, उनके तरह ही युद्ध कला में निपुण थे। मुगल शासक औरंगजेब से संभाजी ने कई युद्ध लड़े, जिनमें कभी भी औरंगजेब नहीं जीत पाया। ऐसा कहा जाता है कि संभाजी ने लगभग 120 से अधिक युद्ध लड़े और जीते। मुगलों के अलावा उन्होंने अंग्रेजों और पुर्तगालियों से भी युद्ध किया। 70 साल का औरंगजेब जीवन भर 32 साल के संभाजी को युद्ध में हराने का सपना देखता रहा लेकिन उसका यह सपना कभी पूरा नहीं हुआ।
अपनों के कारण हारे संभाजी
औरंगजेब तो कभी छत्रपति संभाजी को हरा ना पाया लेकिन उनके अपने ही उनकी हार का कारण बने। भीतरघात के कारण संभाजी को मुगल शासक के सिपाहियों ने पकड़ लिया था। इस साजिश में संभाजी के कुछ करीबी लोगों ने ही मुगलों का साथ दिया। आखिर में संभाजी को कैद कर लिया गया, औरंगजेब उनसे माफी मंगवाना चाहता था, लेकिन संभाजी ने ऐसा नहीं किया।
जब औरंगजेब ने मांगा संभाजी जैसा बेटा
मुगलों की कैद में संभाजी पर बहुत अत्याचार किया गया। संभाजी की आंखें तक निकाल ली गईं। शरीर के टुकड़े कर दिए गए। आखिर में उनकी मृत्यु हो गई। संभाजी की मौत से मराठा साम्राज्य हिल गया। वहीं औरंगजेब को भी उनकी मौत पर अफसोस हुआ। कहा जाता है कि औरंगजेब भी संभाजी जैसा ही बेटा चाहता था। इस तरह दुश्मन भी संभाजी की वीरता का कायल हो गया। इतिहास में भी छत्रपति संभाजी महाराज अमर हो गए।