इब्राहिम अल्काजी का निधन, पीएम नरेंद्र मोदी ने दी श्रद्धांजलि
रंगमंच की दिग्गज हस्ती इब्राहिम अल्काजी का आज (मंगलवार) निधन हो गया। अल्काजी के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शोक व्यक्त किया है। प्रधानमंत्री के अलावा भी कला जगत की भी हस्तियों ने अल्काजी के निधन पर श्रद्धांजलि अर्पित की है। पीएम मोदी ने इस मौके पर कहा कि कला को कहीं अधिक लोकप्रिय बनाने और समूचे भारत में इसे पहुंचाने की उनकी कोशिशों को लेकर उन्हें याद किया जाएगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट करते हुए लिखा, 'कला एवं संस्कृति जगत में उनका योगदान उल्लेखनीय है। श्री इब्राहिम अल्काजी, रंगमंच को कहीं अधिक लोकप्रिय बनाने और समूचे भारत में इसे पहुंचाने की अपनी कोशिशों को लेकर याद किए जाएंगे। उनके निधन से दुखी हूं। मेरी संवेदनाएं उनके परिवार एवं मित्रों के साथ हैं। उनकी आत्मा को शांति मिले।'
Shri Ebrahim Alkazi will be remembered for his efforts to make theatre more popular and accessible across India. His contributions to the world of art and culture are noteworthy too. Saddened by his demise. My thoughts are with his family and friends. May his soul rest in peace.
विज्ञापन विज्ञापन— Narendra Modi (@narendramodi) August 4, 2020
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा अस्मिता थियेटर ग्रुप के डायरेक्टर अरविंद गौर ने भी अल्काजी के निधन पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि दी है। उन्होंने अपने फेसबुक अकाउंट के जरिए एक लंबा पोस्ट लिखा है। जिसके माध्यम से उन्होंने अल्काजी की शख्सियत को काफी हद तक बताने की कोशिश की है। अरविंद गौर ने अपने पोस्ट में लिखा, 'आधुनिक भारतीय रंगमंच के युग स्तम्भ और वरिष्ठ निर्देशक आदरणीय इब्राहिम अल्काजी को अंतिम सलाम। इब्राहिम अल्काजी का जाना भारतीय रंगमंच और कला जगत के लिए असहनीय क्षति है। आजादी के बाद समकालीन थियेटर को स्थापित करने में उनका अप्रतिम और ऐतिहासिक योगदान है।'
आगे उन्होंने लिखा, 'इब्राहिम अल्काजी ने लंदन में राडा से 1947 में नाटक की पढ़ाई के बाद, मुम्बई में सक्रिय थियेटर किया। फिर 1962 में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के दूसरे निदेशक का कार्यभार संभाला। भारतीय रंगमंच में नाटक के प्रस्तुतिकरण से लेकर सेट , लाईट, डिजाइन तक अल्काजी ने अद्भूत काम किया। अभिनेता के प्रशिक्षण में आधुनिक पद्धति समेत नाट्य प्रर्दशन में शिल्प और तकनीक के नए मापदंड स्थापित किए। उनकी प्रमुख प्रस्तुतियों में गिरीश कर्नाड का तुगलक, धर्मवीर भारती का अंधायुग, मोहन राकेश का आषाढ़ का एक दिन समेत शेक्सपियर, मौलियर और ग्रीक ट्रेजिक नाटक भी है। सन 1962 से 1977 तक यह समय NSD का स्वर्णकाल था। इस दौरान भारतीय रंगमंच नई शक्ल ले रहा था। कडे़ अनुशासन और योजनाबद्ध कार्यशैली अल्काजी की विशेषता थी। यह शोथ का विषय है कि अंग्रेजी संस्कारों के साथ सोचने समझने वाले इब्राहिम अल्काजी कैसे हिंदी रंगमंच के साथ साथ भविष्य के भारतीय रंगमंच का भी ताना बाना बुन रहे थे। किस पद्धति से उसकी मजबूत बुनियाद खड़ी कर रहे थे।'
अरविंद आगे लिखते हैं, 'इब्राहिम अल्काजी अपने जीवन में ही जीवंत किंवदंती बन गए थे। पर उन्होंने खुद को काम तक सीमित रखा। निरंतर सक्रियता और सकारात्मक ऊर्जा उनकी कार्यशैली का हिस्सा थी। सन 77 नाट्य विद्यालय छोड़ने के बाद लम्बे समय तक वापस मुड़कर नहीं देखा। इस दौरान पेंटिंग और कला संरक्षण के काम में ऐतिहासिक काम जुट गए। सफदर हाशमी की नुक्कड़ नाटक करते हुए हत्या के बाद हुई विरोध सभाओं में इब्राहिम अल्काजी ने सक्रिय भाग लिया। उसके बाद में NSD रंगमंडल के साथ तीन नाटक करने के लिए अल्काजी थियेटर की दुनिया में वापस आए। विनम्र श्रद्धांजलि।'
गौरतलब है कि अल्काजी का मंगलवार दोपहर दिल का दौरा पड़ने पर निधन हो गया। उनकी उम्र 94 साल थी। अल्काजी, राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) में सबसे लंबे समय तक निदेशक के पद पर रहे थे। उन्होंने गिरीश कर्नाड के 'तुगलक', धर्मवीर भारती के 'अंधायुग' जैसे लोकप्रिय नाटकों को प्रस्तुत किया।
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