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काबिल और कृष 3 के डायलॉग राइटर संजय बने निर्देशक, लॉकडाउन में बेटे की मदद से बना डाली ये फिल्म

Sun, 05 Jul 2020 04:20 PM IST
anand anand अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई Published by: anand anand Updated Sun, 05 Jul 2020 04:20 PM IST
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dialogue writer Sanjay Masoom direct two short film The Migrants and The Invitation during lockdown
द माइग्रेंट्स - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

भारत में लॉकडाउन तो खत्म हो गया है लेकिन कोरोना वायरस से पीड़ित लोगों के मामले अभी भी बढ़ते जा रहे हैं। साथ ही बढ़ रहा है लोगों के अंदर डर। भारत में जब लॉकडाउन लागू था, उस वक्त भी सभी लोग घर में बैठे थे लेकिन लेखकों का दिमाग फिर भी सक्रिय रहा। इसी दौरान जन्नत, जन्नत 2, मर्डर 3, कृष 3, गुंडे, कोयलांचल, राजा नटवरलाल, काबिल, घायल वन्स अगेन जैसी फिल्मों के संवाद लिखने वाले संजय मासूम ने दो शॉर्ट फिल्मों की रचना कर दी है।

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अमर उजाला से खास बातचीत में संजय ने इन दो फिल्मों के बनाने की पूरी प्रक्रिया और इस दौरान आई सभी परेशानियों का जिक्र किया। लॉकडाउन के अपने अनुभव को साझा करते हुए संजय ने बताया, 'मैं तो एक लेखक हूं तो मेरा काम तो हमेशा से ही घर से ही होता है। इसलिए, मेरे लिए कुछ नया नहीं है। लेकिन, बहुत से लोग ऐसे हैं जो इस दौर में तकलीफ झेल रहे हैं।' लॉकडाउन के इस दौर में प्रवासी मजदूरों के पलायन की खबरों और तस्वीरों ने संजय को ये फिल्में बनाने के लिए मजबूर किया। वह बताते हैं, 'मीडिया से मिल रहीं प्रवासी मजदूरों की खबरें बेचैन करने वाली थीं। कोई साइकिल पर अपने घर जा रहा है तो कोई पैदल। कहा जाता है कि भारत के विभाजन के बाद यह सबसे बड़ा पलायन रहा है। इन सब चीजों ने एक फिल्मी लेखक होने के नाते मुझे बहुत परेशान किया है।'

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संजय मासूम - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

इन फिल्मों को बनाने से पहले तक संजय सिर्फ पटकथा लेखक और संवाद लेखक हुआ करते थे। इन फिल्मों को निर्देशित करने का फैसला लेने के बारे में संजय ने कहा, 'अब मैं इस पर एक कहानी लिखकर किसी फिल्म निर्माता से बात करके ऐसे माहौल में फिल्म तो नहीं बना सकता था। इसलिए, सब कुछ मैंने खुद ही करने का विचार बनाया। इस दौरान मैंने दो कहानियां लिखीं जिस पर एक शॉर्ट फिल्म 'द माइग्रेंट्स' बन चुकी है और दूसरी है 'द इनविटेशन'।'

संजय ने इन फिल्मों पर बहुत ही कम साधनों में काम चलाया है। इनको फिल्माने की प्रक्रिया बताते हुए उन्होंने कहा, 'मैं मलाड में एक बिल्डिंग की दसवीं मंजिल पर रहता हूं। मेरे फ्लैट के सामने ही एक लड़की का फ्लैट है जो कि एक अभिनेत्री और मॉडल है। उसका नाम मनीषा रावत है और वह मेरी बच्ची जैसी ही है। 25 से 26 साल की उम्र होगी उसकी और वह उस समय अकेली थी। मैंने अपनी कहानी लिखने के बाद सोचा कि इसके साथ मैं अपनी फिल्में बना सकता हूं। मेरे पास मेरा आईफोन था तो हमने वह फिल्म उसी कैमरे से शूट की। मेरा बेटा अल्तमश श्रीवास्तव एक साउंड इंजीनियर है। उसने और मैंने इस फिल्म को मिलकर शूट किया है। कुल मिलाकर हम तीन लोगों ने ही इस फिल्म को शूट कर लिया।'

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संजय मासूम - फोटो : सोशल मीडिया

संजय के निर्देशन में बनी उनकी पहली फिल्म रिलीज हो चुकी है। इसपर अपनी खुशी जाहिर करते हुए वह कहते है, 'फिल्म जब शूट हो गई और एडिटिंग होने के बाद जब इसका पहला कट मेरे पास आया, तो मैंने सोचा कि जो मैं इस कहानी के जरिए कहना चाहता था, वह बात फिल्म में दिख रही है। फिर मैंने इस फिल्म को पेशेवर तरीके से डिजाइन करवाया। तब जाकर हमने इसे 3 जुलाई को रिलीज किया है। हर लेखक की चाह होती है कि वह एक निर्देशक भी बनना चाहता है। (हंसते हुए) और इस लॉकडाउन ने मुझे निर्देशक बना दिया।'

एक फिल्म रिलीज होने के साथ संजय की दूसरी फिल्म 'द इनविटेशन' की भी शूटिंग पूरी हो चुकी है और अब उसके पोस्ट प्रोडक्शन का काम बाकी है। यह फिल्म भी लॉकडाउन के समय में लोगों के दिमाग पर पड़ रहे असर के बारे में बताती है। संजय ने बताया, 'लोगों की नौकरियां जा रही हैं और काम न होते होने की स्थिति में वह कैसे आत्महत्या कर ले रहे हैं, या फिर एक लड़की जब इस माहौल में अकेले रह रही है तो उस पर इस माहौल का क्या असर पड़ रहा है? यह फिल्म उसी पर प्रकाश डालती है।' संजय ने इन दोनों ही फिल्मों को हॉरर जॉनर दिया है ताकि स्थिति को बेहतर तरीके से समझाया जा सके। वह यह कहते हुए अपनी बात खत्म करते हैं, 'इन दोनों फिल्मों का जॉनर मैंने हॉरर रखा है लेकिन यह लोगों को डराता नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक तौर पर थोड़ा परेशान करता है। क्योंकि, हमारा मकसद लोगों को डराना नहीं, बल्कि उन्हें समझाना है। शूटिंग के दौरान साधन भी हमारे पास सीमित थे इसलिए मुझे इसमें यह जॉनर डालना सही लगा।'


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