क्या ये धूम सीरिज की मौत है? ये रहीं पांच वजहें
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पैसा कमाने में नए रिकॉर्ड बना रही `धूम-3’ के बारे में आपने शायद ऐसा नहीं सोचा होगा। लेकिन ऐसा सोचना चाहिए, क्योंकि निर्माता और निर्देशक दोनों ने अपनी ओर से यह कहने में कोई कसर नहीं छोड़ी है कि न अब उनके पास आइडिया बचा है और न दिलचस्पी।
जो लोग हॉलीवुड की फिल्में देखते हैं, वो जानते हैं कि सीरीज की फिल्में किस तरह हर पिछली फिल्मों से टक्कर लेती हैं। 'मिशन इंपॉसिबल', 'डाइ हार्ड', 'टर्मिनेटर', 'फास्ट एंड फ्यूरियस' और 'ट्रांसपोर्टर' जैसी सीरीज के दीवानों से पूछिए कि वे क्यों इन फिल्मों को बार-बार देखते हैं?
इन फिल्मों में चार चीज़ें एक जैसी हैं। पहला यह कि हर फिल्म का एक स्थायी चरित्र होता है और वह फिल्म को अपने दम पर खींचने की ताकत रखता है। दूसरा, हर फिल्म का मिशन, जो आपकी सांसें रोके रखता है। तीसरा, फिल्म का एक्शन और तकनीक और चौथा, फिल्म के हीरो या मुख्य पात्र की कुशाग्रता।
अब `धूम’ को परखें तो यह पहले पैमाने पर थोड़ी अलग है। एसीपी जय दीक्षित (अभिषेक बच्चन) इस फिल्म सीरीज का स्थायी पात्र है। लेकिन `धूम-2’ में ही वह ऐसा पात्र बन गया था जो फिल्म का मुख्य स्तंभ नहीं था। `धूम-2’ का सूत्रधार वह व्यक्ति बन बैठा और विडंबना देखिए कि `धूम-3’ आते-आते तक वह हास्यास्पद पात्र में बदल गया।
अजीब है इस फिल्म का मिशन
इस फिल्म में भी मिशन है। एक चोर एक बैंक को बर्बाद करना चाहता है और न्यूयॉर्क की पुलिस भारतीय पुलिस से मदद मांगती है। यहां न्यूयॉर्क पुलिस सहायक की भूमिका में है और हमारा एसीपी सर्वेसर्वा।
दिलचस्प ये है कि चोरी की इस कहानी में आप तीन घंटे इंतजार करते रह जाएंगे, लेकिन आपको न चोरी दिखेगी और न यह पता चलेगा कि चोरी करने वाला शातिर चोर बैंक में घुस कैसे रहा है? जिन्होंने 'मिशन इंपॉसिबल-4' में बुर्ज खलीफा का स्टंट देखा है वह अपनी हंसी दबाए देख सकते हैं हमारे स्टंट किस हद तक नकली दिखते हैं।
बैंक की दीवार के सहारे नीचे दौड़ते आमिर ख़ान ने अपने जीवन में इससे ज्यादा नकली दृश्य में काम नहीं किया होगा। 'क्विक सिल्वर' से लेकर 'मिशन इंपासिबल-2' और 'फास्टर', 'टॉर्क' से लेकर 'डस्ट टू ग्लोरी' तक बाइक चेज का मजा ले चुके दर्शक 'धूम-3' की बाइक रेस देखकर रोमांचित नहीं होते, मायूस होते हैं। एक्शन और तकनीक के पैमाने पर `धूम-3’ सबसे कमजोर साबित हुई है।
तकनीकी पिछड़ापन भी
मोटर साइकिल के बोट में बदलने का दृश्य भी 'ट्रांसफार्मर' सीरीज देख चुके लोगों को तकनीक में बेहद पिछड़ा लगा होगा। चौथी चीज है हीरो की कुशाग्रता या चातुर्य। तो इस `धूम-3’ में हीरो को इसका मौका ही नहीं मिला, न चोर बने आमिर खान को न पुलिस बने अभिषेक बच्चन को।
जैसा कि मैंने पहले कहा कि यह न दिखाने से कि चोरी कैसे हुई, `धूम-3’ यह दिखाने से चूक गई कि चोर किस तरह तेज दिमाग का मालिक है।
जब यह नहीं था तो एसीपी के पास ये अवसर भी नहीं था कि वह चोर को चोरी करने के ढंग के आधार पर पकड़ता। उसने चोर को ऐसे ढंग से पकड़ा, जिसके लिए न्यूयॉर्क पुलिस का सिपाही भी काफी था।
फिल्म की क्वॉलिटी से हुआ समझौता
`धूम-1’ और `धूम-2’ का निर्देशन संजय गढ़वी ने किया था, जबकि `धूम-3’ का विजय कृष्ण आचार्य ने किया है। `धूम-3’ देखकर समझ में आता है कि निर्देशक की सोच अगर बड़ी न हो, तो वह एक सफल सीरीज को किस तरह से मौत के घाट उतार सकता है।
'बार्न' सीरीज की तीन फिल्मों 'आइडेंटिटी', 'सुप्रीमेसी' और 'अल्टीमेटम' के निर्देशक अलग-अलग हैं, लेकिन तीनों ने फिल्म की गुणवत्ता से समझौता नहीं किया।
ऐसा दिखता है कि निर्माता आदित्य चोपड़ा यह समझने की भूल कर बैठे कि `धूम-1’ और `धूम-2’ में अच्छी कहानी लिखने वाले विजय कृष्ण आचार्य शायद `धूम-3’ का निर्देशन भी ठीक तरह से कर लेंगे। पर इस बार जगह-जगह इतनी चूक है कि लगता है कि सहायक निर्देशक भी फिल्म निर्माण के दौरान ऊंघ रहे थे।
फिल्म से हास्य भी गायब
`धूम-3’ में न तो पहली दो फिल्मों की तरह हास्य का पुट है, न फिल्म की नायिका को अपने हिस्से की फिल्म पूरी तरह मिल सकी है। कैटरीना दिखावटी हीरोइन बनकर रह गई हैं। और तो और, सिर्फ `धूम’ फिल्मों के भरोसे जी रहे उदय चोपड़ा भी इस बार हाशिए पर चले गए हैं।
रोल के हिसाब से आमिर का चयन भी गलत दिखता है। वह ऑटिस्टिक रोल में तो अच्छे लगते हैं लेकिन जिमनास्ट के लिए उनमें लचीलेपन का अभाव दिखता है। अभिषेक बच्चन के दिन लद गए, ये इस फिल्म से पक्का ही हो गया है।
`धूम’ सीरीज की दो फिल्मों ने हिंदी सिनेमा को लेकर एक आस जगाई थी। लेकिन `धूम-3’ ने साबित कर दिया है कि यह फिल्म इस सीरीज की मौत है। अगर इसके बाद भी `धूम-4’ बनती है, तो आश्चर्य होगा और अगर वह फिर भी दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींच ले, तो उससे भी ज्यादा आश्यर्च होगा।
पर कमाई में तोड़े इस फिल्म ने कई रिकॉर्ड
`धूम 3’ ने एक ऐसा रिकॉर्ड बनाया है, जिसे तोड़ना अब शायद हाल-फिलहाल संभव नहीं है। `धूम 3’ भारत की पहली ऐसी फिल्म बन गई है, जिसने भारत और विदेशी मार्केट में कुल-मिलाकर 500 करोड़ रुपए कमा लिए हैं।
*भारत और ओवरसीज मार्केट को मिलाकर लगभग 502 करोड़ रुपए कमा लिए हैं। भारत में यह फिल्म 270 करोड़ कमा चुकी है। इसकी बाकी की कमाई विदेशों से हुई है।
*ओवरऑल कमाई में रिकॉर्ड बनाने के साथ इस फिल्म ने भारत में सबसे ज्यादा कमाई करने वाली दो फिल्मों `चेन्नई एक्सप्रेस’ और `कृष 3’ का रिकॉर्ड भी तोड़ दिया है।
*`धूम 3’, `धूम’ सीरीज की तीसरी फिल्म है। इसके पहले `धूम’ और `धूम 2’ भी हिट रही थीं। `धूम 3’ के नाम एक दिन में सबसे ज्यादा कमाई करने के साथ वीकेंड में सबसे ज्यादा कलेक्शन का भी रिकॉर्ड है।
(यह स्टोरी आप अमर उजाला के मनोरंजन सेप्लीमेंट में रविवार को विस्तार से पढ़ सकते हैं।)