भारत में कुछ है जो मुझे लुभाता है: ब्रेट ली
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ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर ब्रैट ली बड़े पर्दे पर आ रहे हैं। उनकी फिल्म अनइंडियन अगले महीने सिनेमाघरों में लगेगी। जिसमें वह ऑस्ट्रेलियन इंग्लिश पढ़ाने वाले ऐसे टीचर बने हैं, जिनसे भारतीय मूल की सिंगल मदर को प्यार हो जाता है। सिनेमा, भारत और क्रिकेट को लेकर ब्रैट ली से बातचीत की रवि बुले ने।
क्रिकेट खेलने के साथ आप ऑस्ट्रेलिया में विज्ञापन फिल्में करते रहे, संगीत से जुड़े रहे। फिल्म में ऐक्टिंग का इरादा कैसे बना?
सबसे पहले मैं आपको बताऊं कि अनुपम शर्मा (निर्देशकः अनइंडियन) और मैं एक-दूसरे को तेरह-चौदह साल से जानते हैं। एक-दूसरे के काम से परिचित हैं। एक-दूसरे पर विश्वास करते हैं। उन्होंने जब मुझे इस फिल्म में काम करने का ऑफर दिया तो मैंने पूछा कि क्या आपने इस बारे में सोच-समझ लिया है तो अनुपम ने कहा कि बिल्कुल, मेरा इरादा पक्का है। आप मेरी फिल्म के लीड हीरो हैं।
क्या इससे पहले भी आपके पास फिल्मों के ऑफर आए थे?
जी हां, मेरे पास कई फिल्मों के ऑफर आए जिनमें बॉलीवुड फिल्में भी शामिल थीं। कुछ कैमियो रोल थे, कुछ रोल बड़े थे मगर जिंदगी के उस दौर में मैं क्रिकेट खेल रहा था। मैं फिल्मों के लिए तैयार नहीं था लेकिन जब अनुपम का ऑफर आया तो यह खास था क्योंकि यह ऑस्ट्रेलियाई फिल्म है और इसकी पूरी शूटिंग सिडनी में हुई है। मुझे स्क्रिप्ट पसंद आई और उसका मैजेस भी, जो कहता है कि प्यार देश-समाज-संस्कृति की सीमाओं को नहीं मानता। वह न स्किन कलर देखता है और न हेयर कलर।
'यहां लोगों में उदारता है'
क्रिकेट खेलते हुए क्या आपके जेहन में था कि इसके बाद आप बॉलीवुड या अन्य फिल्मों में ऐक्टिंग करेंगे?
ऐसा नहीं था। इस बारे में मैंने कभी नहीं सोचा क्योंकि जिंदगी में कई चीजें हैं जिनमें मुझे इससे ज्यादा मजा आता है। मुझे फैशन, फूड, कल्चर की बातें बहुत आकर्षित करती हैं। हां, फिल्में भी मुझे पसंद हैं और इसी वजह से यहां हूं।
आपने क्रिकेटर के रूप में भारत के कई दौरे किए हैं और अब ऐक्टर के रूप में आए हैं। भारत और यहां के लोगों को आप किस तरह से देखते हैं?
मेरा हमेशा यहां बहुत स्वागत हुआ, लोगों ने प्यार दिया। यहां की संस्कृति मुझे आकर्षित करती है, लोगों के जीने का ढंग अच्छा लगता है। यहां की बहुत सारी पॉजिटिव मैमोरीज मेरे पास हैं। मैं हर बार जब यहां आया, इस देश और यहां के लोगों से मेरा जुड़ाव पहले के मुकाबले ज्यादा गहरा होता गया।
भारत की कौन सी बात सबसे अधिक आकर्षित करती है?
यहां कुछ ऐसा अज्ञात है जो लुभाता है। मुझे यह तथ्य आकर्षित करता है कि एनी थिंग कैन हैपन इन इंडिया। यहां लोगों में उदारता है। उनकी सहजता कमाल की है। मैं जहां भी गया लोगों ने मुझे स्पेशल महसूस कराया।
प्रीति जिंटा मेरी दोस्त हैं
भारत से आपका खास संबंध है। क्या आप भाग्य या कर्मफल जैसी बातों में विश्वास रखते हैं?
पुनर्जन्म भी...! बिल्कुल मेरा इन बातों में विश्वास है। इस बारे में भी बातें हुई हैं, चाहें मैं मानूं या ना मानूं कि क्या पिछले जन्म में मैं इंडियन था! कुछ तो है जिसकी वजह से यहां मेरा खास जुड़ाव है।
आशा भोंसले जी के साथ आपका गाया गीत भारतीयों की स्मृति में है। वह कैसे हो पाया था?
मेरे पास उनके साथ गाने का प्रस्ताव आया और पूछा गया कि क्या मैं आशा जी को जानता हूं? तब मैंने कहा कि उन्हें कौन नहीं जानता! गाने की बात फाइनल होते ही मैंने 20 मिनट मे लिरिक्स लिख लिए थे। मुझे आश्चर्य हुआ जब हमारा गाना चार्ट में टॉप पर पहुंचा।
क्या आपने प्रोफेशनल सिंगर की कोई ट्रेनिंग ली है?
15-16 साल से एक बैंड के साथ जुड़ा हूं और हमने ऑस्ट्रेलिया में सैकड़ों शो किए हैं। मैं गाने के साथ गिटार या बेस गिटार बजाता रहा हूं। म्यूजिक में मुझे बहुत मजा आता है। मैं बाहर भी शो करने की प्लानिंग कर रहा हूं।
क्या आप गाने खुद लिखते हैं?
जी हां, अनइंडियन में भी मेरा लिखा एक गाना है।
आप बॉलीवुड फिल्में देखते रहे हैं?
क्रिकेट खेलने जब भी आया तो टीवी ऑन करते ही बॉलीवुड फिल्में आती थी। अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान, प्रिटी जिंटा, करीना कपूर जैसे सितारों की फिल्में देखीं। फिर प्रिटी जिंटा की टीम में भी मुझे खेलने का मौका मिला। आज मैं कह सकता हूं कि वह मेरी दोस्त हैं।
आपको लाइन नहीं क्रॉस करनी चाहिए
बॉलीवुड में आपका फेवरेट स्टार?
अमिताभ बच्चन। वह 70 पार कर चुके हैं लेकिन उनका काम और एनर्जी कमाल की है।
बीते कुछ वर्षों में भारत-ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट के मैदान में कड़े प्रतिद्वंद्वी की तरह उभरे हैं। इसे किस तरह से देखते हैं?
दोनों के बीच मुकाबला तो जबर्दस्त होता है मगर दोनों का एक-दूसरे के प्रति सम्मान भी है। हम एक-दूसरे की काबीलियत की तारीफ भी करते हैं। मैदान में कड़ी टक्कर होती है, एक नियंत्रित आक्रामकता होती है मगर बाहर दोस्त होते हैं।
परस्पर सम्मान और मित्रता के बावजूद दोनों टीमों में स्लेजिंग (अपशब्दों का इस्तेमाल) कई बार विवाद का मुद्दा बना है!
यह सही है लेकिन वह भी खेल का हिस्सा है। अगर उसमें किसी के दिल को ठेस पहुंचाने वाली बातें या नस्लीय भावनाएं न हों। व्यक्तिगत रूप से मेरा गाली-गलौच में कभी भरोसा नहीं रहा लेकिन इस बात में मुझे बुराई नहीं दिखती कि बल्लेबाज का ध्यान भंग करके उसे आउट करने के लिए उकसाने वाली बातें कह दी जाएं। इसमें मजा भी आता है। बस, आपको लाइन नहीं क्रॉस करनी चाहिए। जो ऐसा करे उसे सजा मिलनी चाहिए।