हिन्दुस्तान में फिल्मों की शूटिंग की नई जगहें
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कभी आपने गौर किया है, बॉलीवुड में फिल्मों की शूटिंग स्पॉट को लेकर एक परंपरा चलती है। आमतौर पर एक दौर में एक ही तरह के स्पॉट खूब दिखाई देते हैं। अभी आपने सुना होगा कि शाहरुख खान की फिल्म 'दिलवाले' की शूटिंग दक्षिण-पूर्व यूरोप में स्थित देश 'बुल्गारिया' में हुई। फिल्म के गाने 'रंग दे तू मोहे गेरुआ' की मेकिंग का वीडियो लॉन्च कर शाहरुख ने उस जगह की खूब तारीफ भी की।
लेकिन यह फिल्म पूरी तरह से शूट भी नहीं हो पाई थी कि एक और बड़े अभिनेता अपनी टीम लेकर वहां अपनी फिल्म शूट करने पहुंच गए। वह अभिनेता हैं, अजय देवगन। इस साल दिवाली पर आने वाली उनकी फिल्म 'शिवाय' का काफी हिस्सा बुल्गारिया में शूट किया गया है।
असल में बुल्गारिया के कानून और लोग फिलहाल फिल्मों की शूटिंग के लिए लचीले हैं। बहुत मुमकिन है कि आने वाले दिनों में कई बार आपको बॉलीवुड फिल्मों में बुल्गारिया देखने का मौका मिले। लेकिन बीते 10 सालों के सिनेमा एक खास जगह बॉलीवुड फिल्मों में छाई हुई है। बॉलीवुड के अधिकांश निर्देशक घूम-फिर कर अपनी फिल्म शूट करने वही पहुंच रहे हैं। कौन सी है वो जगह, जानिए अगले स्लाइड में।
आजकल इस जगह पर हो रही हैं ज्यादातर फिल्मों की शूटिंग
बीते करीब 10 सालों में बॉलीवुड फिल्मों की शूटिंग के लिए दिल्ली सबसे मुफीद रही है। यूं तो हर दौर में यदा-कदा दृश्य दिल्ली के दिख जाते हैं। 1950 के दशक में राजकपूर ने 'अब दिल्ली दूर नहीं' बनाई थी, 1970 के दशक में यश चोपड़ा ने 'त्रिशूल'। इसके बाद 'तेरे घर के सामने', 'चश्मेबद्दूर' जैसी फिल्मों में अपवाद के तौर पर दिल्ली दिखती थी।
लेकिन बीते 10 सालों में लोकप्रिय हिन्दी सिनेमा में दिल्ली का जैसे एकाधिकार हो गया है। इसका सिलसिला शुरू हुआ साल 2006 में आई दिबाकर बनर्जी की फिल्म 'खोसला का घोंसला' से। इसमें पहली बार इंडिया गेट, लाल किला के बजाय 'साउथ दिल्ली' का तिमंजिला घर दिखाया गया।
इसके बाद 'ओये लक्की लक्की ओये', 'दो दूनी चार', 'बैंड बाजा बरात' के कई दृश्य दिल्ली के 'जनकपुरी' और 'सैनिक फॉर्म' जैसी जगहों में शूट किए गए। फिर अनुराग कश्यप की 'देव डी' में पहाड़गंज की अंधेरी गलियां दिखीं।
इसके बाद इम्तियाज अली ने दिल्ली को अपना अड्डा बनाया। उन्होंने 'लव आजकल', 'रॉकस्टार' के काफी हिस्से उन्होंने दिल्ली में शूट किया। उनकी हालिया रिलीज 'तमाशा' की भी शूटिंग दिल्ली में हुई थी। दिल्ली को सबसे नजदीक से दिखाया आनंद एल राय ने। उन्होंने 'तनु वेड्स मनु रिटर्न्स' की पूरी कहानी दिल्ली आधारित रखी।
भारत की सबसे सफल फिल्म 'पीके'। यह शब्द ही दिल्ली की शब्दावली से लिया गया था। फिल्म के कुछ हिस्सों को छोड़कर पूरी फिल्म दिल्ली में शूट की गई। अब बीते 10 साल की बड़ी हिट्स पर एक नजर डालिए, 'थ्री इडियट्स', 'डेल्ही बेली', 'विक्की डोनर, 'पीकू', 'किक', 'रंग दे बसंती', 'रण', 'पा', 'पीपली लाइव', 'नो वन किल्ड जेसिका', बजरंगी भाईजान, जैसी फिल्मों की शूटिंग 'सी आर पार्क', 'लाजपत नगर', पटपड़गंज, उग्रसेन की बावली आदि जगहों पर हुई।
कभी ऐसा ही एकाधिकार हुआ करता था इस शहर का
यही नहीं, 'पीकू', 'विक्की डोनर', 'लव आजकल', 'कहानी', 'तमाशा' तक में जब दूसरे लोकेशन की जरूरत पड़ी, तब फिल्मकारों ने दिल्ली से कलकत्ता का रुख किया। असल में बॉलीवुड फिल्मों के शुरुआती दिनों मे बंगाली लोगों का दबदबा था। विमल रॉय, सत्यजीत रे, हृषिकेश मुखर्जी, गुरुदत्त आदि उल्लेखनीय फिल्मकार थे।
इनकी फिल्मों में सहसा आपको कलकत्ता देखने को मिल जाएगा। विमल रॉय की ऐतिहासिक फिल्म 'दो बीघा जमीन' हो या फिर गुरुदत्त की 'प्यासा', पूरी फिल्म करीब-करीब कलकत्ता में शूट की गई है।
फिर, 'हावड़ा ब्रीड' हो, 'अमर प्रेम हो', पुरानी दोनों 'देवदास' हों, 'महानगर' हो, 'नौकरी', सबकी शूटिंग कलकत्ता में हुई। यहां तक राज कपूर ने 1985 में जब 'राम तेरी गंगा मैली बनाई' तब भी उन्होंने एक हिस्से की शूटिंग गंगोत्री में की और दूसरे हिस्से की कलकत्ता में।
मुंबई तो है ही मायानगरी, पर यहां बस स्टूडियो हैं
शुरुआती दिनों से ही भारी मात्रा में फिल्मों की शूटिंग मुंबई के तमाम स्टूडियो में हुआ करती हैं। पर मुंबई की असल लोकेशन पर राम गोपाल वर्मा ने खूब काम किया। कंपनी, सरकार, सरकार राज में मुंबई को स्थापित किया। मुंबई में शूट की गई हॉलीवुड निर्देशक डैनी बॉयल की फिल्म 'स्लम डॉग मिलेनियर' ने ऑस्कर भी जीते हैं।
लेकिन मुंबई को फिल्म की शूटिंग के लिए कभी बहुत मुफीद नहीं माना गया। एक दौर चला जब पंजाब बॉलीवुड फिल्मों की शूटिंग के लिए केंद्र बना था। यह दौर तब था जब अचानक बॉलीवुड फिल्मों में पंजाब का प्रभाव बढ़ा। यशराज बैनर और राजश्री प्रोडक्शन और धर्मा प्रोडक्शन की फिल्मों में सहसा ही पंजाब देखने को मिल जाता है।
लेकिन जब कभी बॉलीवुड की एक या दो ऐसी फिल्मों की बात आती है, जिनके लोकेशन ने लोगों को लुभा लिया, तो वो दो फिल्में हैं, 'शोले' और 'लगान'। दोनों ही फिल्में किसी चर्चित लोकेशन पर नहीं शूट की गई थीं। 'शोले' बंगलुरु के 50 किलोमीटर दूर रामनगरम नाम की एक छोटी जगह पर शूट की गई थी। जबकि 'लगान' गुजरात के कछ के करीब भुज में शूट हुई थी।
लेकिन अब बॉलीवुड के निमार्ता-निर्देशकों ने लगातार नई लोकेशन ढूंढ़नी शुरू की है। प्रयोग के इस दौर में निर्माता-निर्देशकों को वो जगहें खूब फब रही हैं, जिन्हें लोग पहले से न जानते हों। कश्मीर-हैदराबाद-पुणे-बनारस-लखनऊ-भोपाल-इंदौर-मनाली आदि से सटी छोटी-छोटी जगहों पर फिल्मों की शूटिंग की जा रही है।
इसकी एक वजह ये भी है कि आजकल बड़े सितारों को लेकर सार्वजनिक स्थानों पर शूटिंग कर पाना काफी मुश्किल हो गया है। सुरक्षा की दृष्टि से यह ठीक नहीं है। साथ ही लोग उन्हीं जगहों को फिल्मों में देखकर ऊब गए हैं, फिल्मकारों का ऐसा मानना है। फिर अब बॉलीवुड में किसी क्षेत्र विशेष के निर्देशकों का बोलबाला नहीं है।
आज बॉलीवुड में भारत के करीब हर हिस्से (नॉर्थ ईस्ट के राज्यों को छोड़कर) निर्देशक हैं। ऐसे में भारत के करीब हर हिस्से में कुछ न कुछ बॉलीवुड फिल्मों की शूटिंग आरंभ हो गई है। विदेश में शूटिंग के नाम पर भी पहले बॉलीवुड फिल्मों में अमेरिका व युरोप की कुछ चुनिंदा जगहें ही दिखती थीं। लेकिन अब यह कैनवास भी बढ़ा है। स्पेन हो (जिंदगी मिलेगी न दोबारा), बुल्गारिया हो (दिलवाले), ग्रीस, ऑस्ट्रेलिया (बचना ऐ हसीनो), कोर्सिका फ्रांस (तमाशा)। फिल्मों की शूटिंग के लिए निर्देशक अब दूसरे छोटे जगहों पर जाने से कतराते नहीं।