हम सभी की जिंदगी में दोस्त की बेहद खास जगह होती है। दोस्ती का रिश्ता हमारी जिंदगी के बाकी रिश्तों से ज्यादा खास और मजबूत होता है। कुछ दोस्त तो इतने खास हो जाते हैं कि वह हमारे बाकी रिश्तों से भी ऊपर लगने लगते हैं। दोस्ती के सफर में यूं तो कभी-कभी कुछ मुश्किलें तो आती हैं। लेकिन एक अच्छी दोस्ती तभी अच्छी कहलाती है जब वह उन मुश्किलों को भी मात देती है। दोस्ती की परिभाषा का समझाने में हिंदी सिनेमा का भी बहुत बड़ा योगदान रहा है। जी हां दोस्ती के ऊपर न केवल हिंदी सिनेमा में फिल्में बनी हैं बल्कि शानदार गाने और डॉयलॉग्स भी लिखे जा चुके हैं। दोस्ती पर बने कुछ हिंदी फिल्मों के डायलॉग्स सहाबहार रहे हैं। फ्रेंडशिप डे के इस खास मौके पर आज हम आप सभी को दोस्ती पर लिखे उन्हीं खूबसूरत डायलॉग्स से रूबरू करवाते हैं।
जो दोस्त कमीना नहीं होता, वो कमीना दोस्त नहीं होता।
यह डायलॉग टाइगर श्रॉफ और कृति सेनन की डेब्यू फिल्म 'हीरोपंती' का है। यह फिल्म साल 2014 में रिलीज हुई थी।
दोस्ती का एक उसूल है मैडम, नो सॉरी, नो थैंक्यू
यह डायलॉग साल 1989 आई सलमान खान की फिल्म 'मैं प्यार किया' का है।
दोस्त फेल हो जाए तो दुख होता है, लेकिन दोस्त फर्स्ट आ जाए तो ज्यादा दुख होता है।
फिल्म '3 इडियट्स' का दोस्ती पर यह डायलॉग हर किसी को याद होगा। यह फिल्म साल 2009 में आई थी।
पुरानी शराब की तरह पुरानी दोस्ती का भी अजीब नशा होता है।
यह डायलॉग देवानंद की फिल्म 'देश-परदेश' का है। यह फिल्म साल 1978 में रिलीज हुई थी।