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8 महीने, 6 स्क्रीनिंग्स और 7 सुनवाईयों के बाद 'नो फादर्स इन कश्मीर' को मिला यूए सर्टिफिकेट
Sat, 09 Mar 2019 05:58 PM IST
anand anand
मुंबई डेस्क, अमर उजाला
मुंबई डेस्क, अमर उजाला
Published by: anand anand
Updated Sat, 09 Mar 2019 05:58 PM IST
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Ashwin Kumar
- फोटो : social media
फिल्म डायरेक्टर अश्विन कुमार को आखिर न्याय मिल ही गया। उनकी फिल्म 'नो फादर्स इन कश्मीर' को आठ महीने बाद यूए सर्टिफिकेट दे दिया गया है। अश्विन को अपनी फिल्म नो फादर्स इन कश्मीर को सर्टिफिकेट देने की प्रक्रिया में सही न्याय पाने के लिए फिल्म सर्टिफिकेशन के मामलों में आखिरी फैसला करने वाली संस्था एफसीएटी के सामने दूसरी बार अपनी फिल्म का प्रदर्शन करना पड़ा था।
सेंसर सर्टिफिकेट पाने के लिए जुलाई 2018 में पहली बार फिल्म को फाइल किया गया था। अपनी फिल्म को इंसाफ दिलाने के लिए निर्माताओं और कलाकारों को 8 महीने, 6 स्क्रीनिंग्स और 7 सुनवाईयों तक इंतजार करना पड़ा है। इस फिल्म के साथ कुछ ऐसा हुआ है जो शायद ही कभी हुआ होगा। इस फिल्म के सर्टिफिकेशन के लिए देरी पर देरी होती रही और आखिरकार इस पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। अपनी फिल्म को लेकर अश्विन ने जब लड़ाई शुरु की तो सीबीएफसी के द्वारा फिल्म को ए सर्टिफिकेट देने पर फैसला हुआ।
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सेंसर सर्टिफिकेट पाने के लिए जुलाई 2018 में पहली बार फिल्म को फाइल किया गया था। अपनी फिल्म को इंसाफ दिलाने के लिए निर्माताओं और कलाकारों को 8 महीने, 6 स्क्रीनिंग्स और 7 सुनवाईयों तक इंतजार करना पड़ा है। इस फिल्म के साथ कुछ ऐसा हुआ है जो शायद ही कभी हुआ होगा। इस फिल्म के सर्टिफिकेशन के लिए देरी पर देरी होती रही और आखिरकार इस पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। अपनी फिल्म को लेकर अश्विन ने जब लड़ाई शुरु की तो सीबीएफसी के द्वारा फिल्म को ए सर्टिफिकेट देने पर फैसला हुआ।
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No Fathers in Kashmir
- फोटो : social media
अश्विन को ए सर्टिफिकेट दिए जाना सही नहीं लगा जिसपर उन्होंने पहले नवंबर में एफसीएटी में अर्जी दिसंबर में दी थी। जनवरी में इसकी सुनवाई हुई। अब एफसीएटी ने दूसरी बार फिल्म को देखने के एक महीने के बाद इस पर अपना आखिरी फैसला दे दिया है जिसके तहत फिल्म में कुछ कांट-छांट करनेके अलावा कुछ बदलाव करने के लिए कहा गया है।
हालांकि सबसे अहम बात यह है कि एफसीएटी ने इस फिल्म को यू/ए सर्टिफ़िकेट देकर फिल्म के निर्माताओं का समर्थन कर दिया है। इसके बाद फिल्म के निर्माताओं को ये पूरा भरोसा हो गया है कि बोर्ड अब खुशी से इस फिल्म को पास कर देगी। इस फिल्म में सोनी राजदान, अंशुमान झा और कुलभूषण खरबंदा हैं। 16 साल के दो किरदारों की प्रेम कहानी के इस फिल्म में दिखाई गई है जो कश्मीर की घाटी में पनपती है। फिल्म के दोनों लीड कैरेक्टर घाटी में लापता हुए अपने-अपने पिता की तलाश करते हुए नजर आएंगे।
हालांकि सबसे अहम बात यह है कि एफसीएटी ने इस फिल्म को यू/ए सर्टिफ़िकेट देकर फिल्म के निर्माताओं का समर्थन कर दिया है। इसके बाद फिल्म के निर्माताओं को ये पूरा भरोसा हो गया है कि बोर्ड अब खुशी से इस फिल्म को पास कर देगी। इस फिल्म में सोनी राजदान, अंशुमान झा और कुलभूषण खरबंदा हैं। 16 साल के दो किरदारों की प्रेम कहानी के इस फिल्म में दिखाई गई है जो कश्मीर की घाटी में पनपती है। फिल्म के दोनों लीड कैरेक्टर घाटी में लापता हुए अपने-अपने पिता की तलाश करते हुए नजर आएंगे।