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Amar Ujala Samvad 2023: 'अमर है तारा-सकीना की प्रेम कहानी', सनी-अमीषा ने 'गदर' के 20 साल के सफर पर की चर्चा

Mon, 07 Aug 2023 03:57 PM IST
निधि पाल एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: निधि पाल Updated Mon, 07 Aug 2023 03:57 PM IST
सार

गदर की स्टार कास्ट के साथ बातचीत हुई। उन्होंने फिल्म के डायलॉग्स और 22 साल के बाद गदर की शुरुआत कैसे हुई इसपर बातचीत की। 

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अमर उजाला संवाद में सनी देओल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अभिनेता सनी देओल, अमीषा पटेल, सिमरन कौर, मनीष वाधवा और उत्कर्ष शर्मा आज अमर उजाला संवाद चंडीगढ़ के मंच पर थे। इस दौरान गदर की स्टार कास्ट के साथ बातचीत हुई। उन्होंने फिल्म के डायलॉग्स और 22 साल के बाद गदर की शुरुआत कैसे हुई इसपर बातचीत की। 
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मीनाक्षी कंडवाल: जब 2001 में गदर आई थी, तब लोगों में इसे लेकर दीवानगी थी। पंजाब में इस फिल्म का प्रमोशन कितना अलग है?

सनी देओल: तारा सिंह है ही पंजाब से। हमें नहीं पता था कि जनता को यह फिल्म इतनी प्यारी लगेगी कि फिल्म ही गदर बन जाएगी। 22 साल हो गए हमारी फिल्म को। वह लोगों के दिल में थी। कौन आदमी नहीं चाहेगा कि उसे राजकुमारी मिल जाए। वही सपना लेकर तारा सिंह निकला था। बंटवारा हो गया, लेकिन प्यार उसकी ताकत थी। उसका परिवार बन गया। उसके परिवार को आपने पसंद किया। हर आदमी चाहता है कि परिवार एक रहे। परिवार ही हमारी दुनिया होती है। तारा सिंह ऐसा किरदार है जो परिवार के लिए अपनी जान दे देना है, लेकिन उस पर आंच नहीं आने देता। इसी वजह से हर आदमी-बच्चे-बुजुर्ग को यह फिल्म पसंद आई है। जब बताया गया कि गदर-2 बनानी है तो लगा कि ये कैसे कर सकते हैं। हमने सोचा कि पहली गदर से पंगा नहीं लेना चाहिए। 
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मीनाक्षी कंडवाल: ये विचार कब आया कि गदर-2 बनानी चाहिए?

सनी देओल: यह विचार लेखक-निर्देशक लेकर आए थे। मुझे इसकी बुनियाद अच्छी लगी और हमने इसे शुरू किया। कोरोना के वक्त इसकी तैयारियां शुरू हुईं। आज हम गदर-2 के साथ आप लोगों के सामने हैं। इससे हमें भरोसा मिला है कि लोग हमारे साथ हैं, तारा सिंह और सकीना के साथ हैं। मैं यही कह सकता हूं कि 1945-51 के वक्त था, यह दौर 1971 के आसपास का है। 

मीनाक्षी कंडवाल: 20 साल का आपका सफर कैसा रहा?

अमीषा पटेल: पंजाब में आना एक अलग ही एहसास है। 20 साल का सफर ऐतिहासिक रहा है। शोले, मुगल-ए-आजम, पाकीजा जैसी फिल्में दशकों में एक बार बनती है, उनमें से एक फिल्म गदर है। इसने हमें ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया। हमने जो भी काम किया, उसकी तुलना गदर से होती थी। लोग कहते थे कि हमें तो दोबारा तारा-सकीना जैसा किरदार चाहिए। 22 साल बाद हम इतने खुशनसीब हैं हम कि तारा सिंह और सकीना का किरदार अदा करने को मिल रहा है। मुझे नहीं लगता कि पहले यह खुशनसीबी को किसी मिली होगी। यह जोड़ी अमर रहेगी। सेट पर वैसे ही लगा जैसे हम 2001 में हैं। सकीना के शौहर तारा सिंह और युवा होते जा रहे हैं। कल इनकी परफॉर्मेंस देखी तो मैंने इनसे कहा कि ये रोमांस और डांस कहां छुपा रखा था। तारा-सकीना की जोड़ी जादुई है। मैं सनी जी से हमेशा यह कहती हूं कि टॉम क्रूज तीस साल बाद हिट ला सकते हैं तो बॉलीवुड में यह काम सिर्फ सनी जी कर सकते हैं।

चर्चा के दूसरे हिस्से में मनीष वाधवा, उत्कर्ष शर्मा और सिमरत कौर शामिल हुए। 

मीनाक्षी कंडवाल: अमरीश पुरी के निभाए अशरफ अली जैसे किरदार के समकक्ष आकर अभिनय करने का अनुभव कैसा रहा?

मनीष वाधवा: अनुभव बहुत अच्छा है। मैं खुश हूं कि तुलना हो रही है, लेकिन यह होना चाहिए। मैं बहुत बच्चा हूं उनके आगे। अशरफ अली सकीना के पिता थे। मैं इस किरदार में जनरल हूं। सनी जी ने मुझसे पूछा कि क्या आप यह जिम्मेदारी निभा पाएंगे। मैंने यही कहा कि मैं पूरी कोशिश करूंगा। मुझे उम्मीद है कि इनके आशीर्वाद से मैंने यह काम कर लिया। यहां मैं मनीष वाधवा हूं, वहां हामिद इकबाल हूं। पिक्चर अभी बाकी है।

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मीनाक्षी कंडवाल: तारा सिंह के बेटे यानी चरणजीत सिंह का किरदार गदर-2 से अब तक क्या बदल गया है?

उत्कर्ष शर्मा: मेरा किरदार आज भी अपनी मां के लिए उतना ही प्रोटेक्टिव है। मंगलसूत्र बचाने की कोशिश करता है। उसने पूरा दौर देखा है। उसने नफरतें देखी हैं। बहुत कुछ सीखा है। फिर लौटा है पिता को हीरो की तरह देखकर। 72 घंटे का हमारा लगातार शूट था। मेरी पलकें तब झपक रही थीं। तब अचानक थप्पड़ पड़ा। मुझे लगा कि सनी जी या अमरीष जी ने मारा है, लेकिन वो पिताजी (अनिल शर्मा) थे कि सारे स्टार्स इतनी मेहनत कर रहे हैं और तू सोना चाहता है। 

मीनाक्षी कंडवाल: सिमरत, आपका अनुभव कैसा रहा। 

सिमरत कौर: सेट पर रैगिंग जैसा तो कुछ नहीं हुआ। हंसी-मजाक के साथ शूटिंग होती थी। मैं सबसे खुशनसीब हूं कि मुझे गदर-2 से डेब्यू करने को मिल रहा है। इससे बड़ी बात किसी के लिए कुछ नहीं हो सकती। मुझे सनी जी के साथ एक इमोशनल सीन करना था। मैं नवर्स थी क्योंकि उनकी बहुत इज्जत करते हैं सब। सनी जी ने कहा कि दिल से महसूस करो, अपने आप आंखों और चेहरे पर इमोशंस आ जाएंगे। पुरानी गदर की जब अमृतसर स्टेशन के पास शूटिंग हो रही थी, तब उसी भीड़ में मैं अपनी मां के साथ गोदी में मौजूद थी। 

मीनाक्षी कंडवाल: कैसे नन्ही आंखों में सपने पूरे होते हैं, जैसा सिमरत के साथ हुआ। नए अभिनेताओं का आपने कैसे हौसला बढ़ाया?

सनी देओल: पहले तो मुझे समझ नहीं आता कि मेरी उम्र क्या है। मेरी लोग इज्जत करते हैं तो अजीब सा लगता है। शुरू-शुरू में पता नहीं चला। फिर बॉर्डर जैसी फिल्में आईं तो लोग आकर पैर छूने लगे। तब समझ आया कि यह जिम्मेदारी है। ऐसी फिल्में करो जिससे परिवार के लोगों को अच्छी नसीहत मिले। देश के लिए कुछ कर सकें। अब तारा सिंह बन गया। लोगों को लगा कि तारा सिंह पता नहीं क्या होता है। हर आदमी हर तरह का किरदार, हर तरह का बदमाश भी होता है। जो अपने किरदार को काबू रखकर चल सके, वह सही बंदा होता है। 

मीनाक्षी कंडवाल: फिल्म का कोई एक डायलॉग सुनाइए। 

सनी देओल: दोबारा मौका मिलेगा तो सारा पाकिस्तान खाली हो जाएगा। कटोरा लेकर घूमोगे तुम, भीख भी नहीं मिलेगी। 

मीनाक्षी कंडवाल: 20 साल बाद उसकी कशिश को बरकरार रखना कितना मुश्किल था?

अमीषा पटेल: सकीना मेरी रगों में बसी है। यह बहुत खास किरदार है मेरे लिए। मैं 20 साल से इसे जी रही हूं। भूल नहीं पाई। यह सकीना-तारा सिंह की जिंदगी में नया अध्याय है। बंटवारे के बीच उन्होंने छोटी सी दुनिया बसाई थी। अब उनकी दुनिया बस चुकी है। गदर-2 में भी यही संदेश है कि हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई एकसाथ रह सकते हैं। तारा सिंह ने कभी सकीना को मजहब बदलने को नहीं कहा। फिर भी तारा-सकीना एकदूसरे की जान है। उनके बीच प्यार और जुनून है। 

मीनाक्षी कंडवाल: आपका भी पसंदीदा डायलॉग सुनाइए।

अमीषा पटेल: पुरानी गदर में अमरीश पुरी बोलते हैं कि हिंदुस्तान नहीं जाओगे। तब सकीना कहती है कि हम खत नहीं लिखेंगे, फोन नहीं करेंगे, अब हम सिर्फ इंतजार करेंगे क्योंकि हम जानते हैं कि आज नहीं तो कल वो हमें लेने जरूर आएंगे, जरूर आएंगे। 

मीनाक्षी कंडवाल: करन जौहर या इम्तियाज अली की फिल्मों में महिला किरदार अलग तरह से नजर आते हैं। सकीना जैसे किरदार पहले नजर नहीं आई। 

अमीषा पटेल: सकीना का मतलब ही है पाक। जब नितिन केनी जी ने ऋतिक के साथ कहो ना प्यार है की शूटिंग की एक तस्वीर देखी तो मुझे बुलाया गया। हम ऐसा चेहरा चाहते हैं जो चांद जैसा खूबसूरत हो। बाकी अनिलजी आपके किरदार पर मेहनत कर लेंगे। फिर मैंने टीचर से उर्दू सीखी। कुरान पढ़ी। मस्जिद गए। तब जाकर सकीना का किरदार निकलकर आया। 

मीनाक्षी कंडवाल: पहली गदर का कलेक्शन कैसा था। अब तो सौ करोड़ से ऊपर का क्लब था।

सनी देओल: तब टिकट सस्ते थे। तब आबादी 85 करोड़ थी। आज 140 करोड़ है। उस वक्त टिकटें ब्लैक होती थीं। प्रोड्यूसर्स के पास पैसे कम पहुंचते थे। तब हमने कोई बेंचमार्क नहीं रखा था, आज भी नहीं रखा। लोग किरदार को प्यार कर रहे हैं, तारा सिंह भी कॉमिक किरदारों की तरह है। 
अमीषा पटेल: बॉन्ड, सुपरमैन, स्पाइडरमैन-पीटर पार्कर बदलते रहते हैं, लेकिन तारा सिंह नहीं बदलेंगे।

मीनाक्षी कंडवाल: जब पिताजी ने कहा कि गदर-2 बना रहे हैं, तब आपने क्या कहा?

उत्कर्ष शर्मा: मुझे सिर्फ एक लाइन सुनाई गई थी। उन्होंने कहा कि अगर तारा सिंह अर्जुन हैं तो तुम उनके अभिमन्यु हो। मैं तीन साल का था जब मैंने बॉर्डर देखी थी। पापा ने धरमजी के साथ बहुत काम किया है। तब घर में धरमजी और सनी जी की ही चर्चा होती थी। जब मैंने पहली बार इन्हें बॉर्डर में देखा था तो मेरे अंदर देशभक्ति आ गई।


मीनाक्षी कंडवाल: सनी देओल की फिल्मों को लोग एक्शन फिल्म मानते हैं। गदर एक घर की कहानी लगती है। 

मनीष वाधवा: गदर में सनी जी गाना भी गा रहे हैं। जब परिवार पर आती है तो शुरुआती सीन में वो तलवार से लोगों को काटते नजर आते हैं। दूसरे सीन में वे सकीना को देखकर इमोशनल हो जाते हैं। जब आपके परिवार पर आ जाए तो आप कैसे बर्ताव करेंगे, वैसे ही इनका किरदार दिखता है। 

अमीषा पटेल: इनकी पहली फिल्म बेताब को भी देखिएगा। गदर के साथ भी एक प्रेम कथा नाम जोड़ा गया था। प्यार के लिए तारा सिंह मजहब बदलने को तैयार है। इससे बड़ी ताकत क्या होगी। 

सनी देओल: लोग हमेशा हैंडपंप की बात करते हैं। इंसान की ताकत उसकी सच्चाई है। जब वह सच्चा होता है तो उसके अंदर रब आ जाता है। वह सिचुएशन ऐसी थी कि तारा सिंह के पास कोई रास्ता नहीं था। तब उसने हैंडपप उखाड़ा। वह रब की ताकत है।




 
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