‘सोशल मीडिया तय करता है फिल्म की किस्मत’, अहमद खान ने ‘वेलकम टू द जंगल’ की सफलता पर कही ये बात
Ahmed Khan: निर्देशक अहमद खान इन दिनों ‘वेलकम टू द जंगल’ की सफलता का आनंद ले रहे हैं। इस बीच निर्देशक ने सोशल मीडिया और वर्ड ऑफ माउथ को लेकर बात की। बताया कैसे ये किसी फिल्म की किस्मत तय करते हैं…
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बॉक्स ऑफिस पर धीमी शुरुआत के बाद 'वेलकम टू द जंगल' को लेकर लोगों के बीच अच्छी चर्चा हो रही है। इसे देखते हुए डायरेक्टर अहमद खान का मानना है कि आजकल दर्शक किसी फिल्म को हिट या फ्लॉप करार देने में बहुत जल्दबाजी करते हैं। सोशल मीडिया पर तुरंत आने वाली प्रतिक्रियाएं फिल्म की किस्मत पर असर डाल सकती हैं, जबकि दर्शकों ने अभी पूरी फिल्म देखी भी नहीं होती।
कुछ लोग शुरुआत में ही फिल्म को लेकर राय बना लेते हैं
इंडिया टुडे के साथ बातचीत में अहम खान ने तुरंत रिएक्शन देने के दौर में फिल्ममेकर्स पर पड़ने वाले दबाव के बारे में बात की। उन्होंने कहा कि कई बार लोग ढाई घंटे की फिल्म खत्म होने का इंतजार भी नहीं करते। 30 या 45 मिनट में ही कह देते हैं, 'यह फिल्म बहुत खराब है।'
फिर फिल्म खत्म होने के बाद उन्हें एहसास होता है, 'नहीं, यह तो वाकई शानदार है।' लेकिन तब तक आप 50 लोगों को वह मैसेज भेज चुके होते हैं। बाद में आप शायद दो लोगों को बता दें कि आप गलत थे, लेकिन बाकी 48 लोगों का क्या? इसीलिए मुझे लगता है कि यह क्रिकेट मैच की तरह है, आप शुरुआती कुछ ओवरों में ही नतीजा तय नहीं कर सकते। आपको आखिर तक इंतजार करना होता है। कुछ भी हो सकता है।
वर्ड ऑफ माउथ है सबसे बड़ी चीज
डायरेक्टर ने माना कि सोशल मीडिया कभी-कभी फिल्म को नुकसान पहुंचा सकता है, तो कभी-कभी यह उसके फायदे में भी काम कर सकता है। निर्देशक ने कहा कि यह हमारे लिए फायदेमंद भी रहा है और कभी-कभी हमारे खिलाफ भी गया है। कई बार लोग फिल्म देखते हैं और कहते हैं, 'अरे वाह, मजा आ रहा है। हमें यह पसंद आ रही है।'
कभी-कभी गलत मैसेज फैल जाता है और कभी-कभी इससे फिल्म को मदद मिलती है। लेकिन लोगों की आपसी बातचीत सच में असरदार होती है। हमेशा से रही है। आज भी अगर आप छुट्टी पर जाने का प्लान बना रहे हैं और मैं आपसे कहूं कि मैं दुबई, वियतनाम या बैंकॉक गया हूं, तो आप मुझसे पूछेंगे कि आपको कहां जाना चाहिए।
अगर मैं कहूं कि दुबई बहुत बढ़िया है, लेकिन वहां गर्मी और महंगाई है या मैं वियतनाम जाने की सलाह दूं, तो इसे ही 'वर्ड ऑफ माउथ' कहते हैं। 'वर्ड ऑफ माउथ' सबसे जरूरी चीज है और इससे इस फिल्म को बहुत फायदा हो रहा है। इसके आंकड़े ही इसका सबूत हैं।
लोग फिल्म देखने में दिलचस्पी ले रहे हैं
'वेलकम टू द जंगल' के बारे में बात करते हुए अहमद ने कहा सबसे पहले आप बॉक्स-ऑफिस के आंकड़े और एडवांस बुकिंग देखते हैं। शुरुआत धीमी रही, लेकिन फिर अचानक तेजी आ गई। तभी आपको एहसास होता है कि लोग फिल्म देखने में दिलचस्पी ले रहे हैं।
जब मैंने जाकर शो देखा और दर्शकों का रिएक्शन देखा, तो मुझे यकीन हो गया कि यह फिल्म कामयाब होगी। लोगों ने इसे बहुत पसंद किया, इसे अपना लिया और वे समझ गए कि मेकर्स उन्हें क्या दिखाना चाहते थे।
तभी मैंने कहा, 'अब पीछे मुड़कर नहीं देखना है।' अभी तो मुझे सब कुछ समझने में ही तीन दिन लग गए। नंबर्स लगातार बढ़ रहे हैं और मुझे लगातार एक्टर्स और फिल्ममेकर्स के फोन आ रहे हैं जो कह रहे हैं, 'क्या फिल्म बनाई है आप लोगों ने।'
कई एक्टर-डायरेक्टर ने फोन करके की तारीफ
डायरेक्टर ने आगे कहा कि कई एक्टर्स ने थिएटर में फिल्म देखी और उसके तुरंत बाद उनसे संपर्क किया। सबसे अच्छी बात यह है कि हर कोई मुझसे कहता है, 'मेरी मां हंसते-हंसते लोटपोट हो गईं।
मेरे पिता हंसते-हंसते लोटपोट हो गए। मेरी बहन तो पागल ही हो गई थी।' इससे मुझे बहुत खुशी मिलती है क्योंकि जब लोग घर जाते हैं, तो वे सिर्फ फिल्म के बारे में ही बात कर रहे होते हैं। यही बात मुझे सच में खुश करती है।
'वेलकम टू द जंगल' में अक्षय कुमार के साथ सुनील शेट्टी, जैकी श्रॉफ, अरशद वारसी, तुषार कपूर, श्रेयस तलपड़े, परेश रावल और कई अन्य कलाकार शामिल हैं।