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50 Years of Jawani Diwani: ‘ब्रो’ से पहले सहेली यहां बनी भाईजान, जया-रणधीर की ‘जवानी दिवानी’ के 50 साल पूरे

Thu, 14 Jul 2022 01:18 PM IST
Pankaj Shukla पंकज शुक्ल
Updated Thu, 14 Jul 2022 01:18 PM IST
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50 Years of jawani diwani movie review bioscope with pankaj shukla Ramesh Behl Randhir Kapoor Jaya Bhaduri Kader Khan
जवानी दिवानी - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
Movie Review
जवानी दिवानी
कलाकार
रणधीर कपूर , जया भादुड़ी , बलराज साहनी , निरुपा रॉय , इफ्तेखार , नरेंद्र नाथ , पेंटल और मुश्ताक मर्चेंट
लेखक
इंदर राज आनंद और कादर खान
निर्देशक
नरेंद्र बेदी
निर्माता
रमेश बहल
रिलीज
14 जुलाई 1972
रेटिंग
3.5/5

एक घरेलू सी, सुंदर दिखने वाली लड़की जो कुछ बंगाली फिल्में करने के बाद साल भर पहले ही फिल्म ‘गुड्डी’ में अपनी छाप छोड़ने में सफल रही थी, उसने  फिल्म ‘जवानी दिवानी’ तक आते आते लाज को अपनी अदा बनाया और पहली बार ये भी दिखाया कि शोखियां सिर्फ हुस्न परियां ही नहीं बल्कि घरेलू लड़कियां भी दिखा सकती हैं। जया भादुड़ी और रणधीर कपूर की फिल्म ‘जवानी दिवानी’ 14 जुलाई 1972 को रिलीज हुई। मुंबई में फिल्म का मेन थिएटर रहा जमुना और इस फिल्म की रिलीज के 50 साल पूरे होने के साथ ही लोगों को फिर याद आए इसके कलाकार, इसके बनाने वाले और इसके गाने, खासतौर से इसके कालजयी गाने, ‘ये जवानी है, दिवानी, रुक जाओ रानी, चली कहां ऐसे..’ ‘सामने ये कौन आया दिल में हुई हलचल’ और ‘जाने जां ढूंढता फिर रहा हूं तुम्हें रात दिन...!’

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50 Years of jawani diwani movie review bioscope with pankaj shukla Ramesh Behl Randhir Kapoor Jaya Bhaduri Kader Khan
जया बच्चन - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई

जब गुड्डी बनी ग्लैमरस गर्ल
‘गुड्डी’ वाली मासूम, भोली सी जया भादुड़ी को लंबे, घने, काले लहराते हुए बालों के साथ शर्ट पैंट पहने डिस्को में अपनी छोटी सी गुड़िया को थामे लहराते बलखाते देखना उस समय के दर्शकों के लिए ‘सरप्राइज’ रहा। हीरो ने तारीफ में दो कसीदे पढ़े तो जया के होंठ भी गोलाइयां बनाने लगे थे। हिंदी सिनेमा ने आठवें और नौवें दशक की फिल्मों के चलते अपनी एक छवि ऐसी भी गढ़ीं जिसमें हीरो हीरोइन एक खास खांचे से निकले दिखते रहे हैं। स्टाइलिश सा हेयर स्टाइल, रंग बिरंगे चमकते कपड़े, बदन पर चिपकती शर्ट और कमर के नीचे से फर्श तक फैलते जाते बेलबॉटम, कमर में चौड़ी सी चमड़े की बेल्ट और गाना शुरू होते ही कैमरे के फ्रेम में आ जाने वाले दर्जन, दो दर्जन डांसर्स। मामला कुछ कुछ ऐसा ही फिल्म ‘जवानी दिवानी’ की शुरुआत में भी दिखता है लेकिन कहानी या थोड़ी अलग है और म्यूजिक तो बिल्कुल ही अलग।

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50 Years of jawani diwani movie review bioscope with pankaj shukla Ramesh Behl Randhir Kapoor Jaya Bhaduri Kader Khan
जवानी दिवानी - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई

सुपरहिट गानों से फिल्म हिट
 आर डी बर्मन ने इस फिल्म के गानों में अपना एक अलग ही अंदाज दिखाया। फिल्म में किशोर कुमार और आशा भोसले ने जो कर दिखाया है वह बताने की नहीं सुनने की चीज है। फिल्म का एक गाना है, ‘जाने जां, ढूंढता फिर रहा हूं तुम्हें रात दिन..!’ इस गाने में किशोर कुमार और आशा भोसले के स्वरों को जिस तरह गायकी के विपरीत सिरों पर रखकर आर डी बर्मन ने ये गाना कंपोज किया है, वह उनकी कलाकारी का बेहतरीन नमूना है। किशोर कुमार ने तो खैर ‘सामने ये कौन आया’ और ‘ये जवानी है दिवानी’ दोनों गानों में कमाल ही कर दिया है। ये उस दौर के गाने हैं जब किशोर कुमार की आवाज उन दिनों के सुपरस्टार राजेश खन्ना की आवाज बन चुकी थी लेकिन किशोर कुमार का कलाकारी में कोई सानी नहीं। यहा गाना रणधीर कपूर पर है तो वह अपनी खास स्टाइल में एक नया मिक्स लाते हैं और गाते हैं, गिली गिली अप्पा, गिली गिली अप्पा, पिली पिली पिली...।

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जवानी दिवानी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

प्रेम कहानियों की डबल डोज
फिल्म ‘जवानी दिवानी’ में मोहब्बत की एक नहीं बल्कि दो दो कहानियां हैं और वह भी दो पीढ़ियों की। ‘गुड्डी’ और ‘उपहार’ जैसी फिल्मों से अपनी पहचान बनाने के बाद जया भादुड़ी ने इस फिल्म में अपना लुक और अपना स्टाइल दोनों बदला। इस बार वह स्कूल जाने वाली गुड्डी नहीं थीं, बल्कि जूड़ा बनाए, चमकीली साड़ियां या फिर दमकती कमीज पैंट्स पहने वाली ऐसी लड़की के किरदार में हैं जो करीब से गुजर जाए तो फ्लर्ट करने सा एहसास देती है। ठाकुर की बेटी हैं। कॉलेज में पढ़ती हैं। राह चलते कोई बेवकूफ बनाने की कोशिश करे तो गाड़ी के इंजन में कचरा कैसे लाया जाता है, ये भी जानती हैं। जिससे प्यार होता है, वह उस मुनीम के लड़के का छोटा भाई है, जिससे उसकी बुआ ने प्यार किया और शादी की। ये बुआ बनी हैं निरूपा रॉय। परदे पर बेहद आभामयी दिखतीं निरूपा रॉय। तब तक वह मां वाले खांचे में कैद नहीं हुई थी। ‘दीवार’ रिलीज होना अभी बाकी थी। वैसे क्या आपको पता है कि निरुपा रॉय सबसे पहले परदे पर किस हीरो की मां बनीं? ये फिल्म थी, 1955 में रिलीज हुई ‘मुनीमजी’ और इस फिल्म में वह मां बनी थी अपने से सात साल छोटे देव आनंद की।

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जवानी दिवानी - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई

सहायक कलाकारों की दमदार अदाकारी
 फिल्म में रणधीर कपूर, जया, निरुपा औऱ बलराज साहनी के अलावा एक और किरदार है जो इस फिल्म को देखने वाले हर शख्स को याद रहा और वह हैं फिल्म में रणधीर कपूर के दोस्त बने सत्येन कप्पू। सत्येन कप्पू तब तक अपना नाम सत्येंद्र कपूर ही लिखते थे। काबिल कलाकार रहे हैं और यहां इस फिल्म में तो उन्होंने एक दो बार नहीं बल्कि तीन बार कमाल किए हैं। डीजे के तौर पर जो उन्होंने किया सो किया ही लेकिन जिस सीन में वह रणधीर कपूर के भाई बनकर टीचर से मिलने जाते हैं, वह दृश्य देखने लायक है। और, एक औऱ सीन जिसमें सत्येन कप्पू बिल्कुल अदाकारी के उस्ताद के तौर पर परदे पर नजर आते हैं, वह है फिल्म का वह सीन जिसमें वह जया भादुड़ी के पिता से मिलने जाते हैं।

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जवानी दिवानी - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई

कादर खान को मिला संवाद लेखन का मौका
फिल्म को नरेंदर बेदी ने उन दिनों की युवा पीढ़ी के तौर तरीकों के करीब रखने में कामयाबी पाई है। इन दिनों जिस तरह लड़कियों एक दूसरे को ‘ब्रो’ या ‘डूड’ कहकर बुलाती हैं, फिल्म में रणधीर कपूर अपनी एक महिला दोस्त को ‘भाईजान’ कहकर बुलाते हैं। फिल्म की कहानी और पटकथा इंदर राज आनंद ने लिखी है और उस दौर के अमीरी गरीबी वाले फॉर्मूले की फिट कहानी है। और, फिल्म के संवाद लिखे हैं कादर खान ने। बतौर संवाद लेखक कादर खान ने इसी फिल्म से हिंदी सिनेमा में अपना करियर शुरू किया। कादर तब प्राध्यापक थे और शौकिया तौर पर थिएटर किया करते थे। एक नाटक देखने के बाद फिल्म ‘जवानी दिवानी’ के निर्देशक नरेंदर बेदी ने उन्हें फिल्मों में संवाद लिखने का न्योता दिया। और, ये कादर खान के ही जिगरे का कमाल था कि फिल्म में हीरो की तोंद निकलने पर उसे उसका बड़ा भाई ताना दे सकता है।

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जवानी दिवानी - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई

चलते चलते...
जया भादुड़ी से पहले फिल्म में ये रोल रीमा सप्रू को ऑफर हुआ था। रीमा ने बाद में माधुरी दीक्षित के मैनेजर रहे राकेश नाथ से शादी की। रीमा का करियर दरअसल शुरू होने से पहले ही एक हादसे के चलते बिखर गया। उस खतरनाक दुर्घटना में रीमा की जान जाते जाते बची थी, उनके चेहरे पर गहरी चोट लगी जिसके लिए उन्हें 11 टांके लगाने पड़े और पैर में फ्रैक्चर को ठीक करने के लिए रॉड डालनी पड़ी थी। इस हादसे के चलते ही रीमा हीरोइन नहीं बन सकीं और ये रोल जया भादुड़ी के हिस्से आया। रणधीर कपूर के करियर को सेट करने में फिल्म 'जवानी दिवानी' का खास रोल रहा। इसके बाद वह रमेश बहल के पीछे लगे रहे और उनकी ज्यादातर फिल्मों में नजर आए। ये फिल्म यूट्यूब पर मुफ्त में देखी जा सकती है।

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