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बॉलीवुड: स्टारडम पुराना..किरदार नए, हीरो से विलेन और फिर साइड रोल तक; कैसी रही इन सितारों की दूसरी पारी?

Sun, 20 Sep 2026 08:24 AM IST
राजश्री वर्मा एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: राजश्री वर्मा Updated Sun, 20 Sep 2026 08:24 AM IST
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सार
Bollywood Stars Second Innings: हिंदी सिनेमा में ऐसे कई सितारे रहे हैं, जो एक समय के बाद इंडस्ट्री से गायब हो गए थे। लेकिन फिर जब उन्होंने अभिनय में वापसी की, तो अपने हर किरदार में पहले से भी ज्यादा दम दिखाया। आइए जानते हैं उनके बारे में।
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Bollywood Stars Second Innings Dhurandhar Fame Gaurav Gera Rajat Bedi Chandrachur Singh Deepak Tijori Akshaye
इन सितारों की दूसरी पारी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

एक दौर था जब किसी अभिनेता के करियर की उम्र तय मानी जाती थी। लगभग 40 की उम्र पार करते ही लीड हीरो की जगह कम होने लगती थी और उसके बाद विकल्प अक्सर पिता, भाई, दोस्त या किसी सपोर्टिंग किरदार तक सिमट जाते थे। लेकिन अब पिछले कुछ वर्षों में हिंदी सिनेमा की यह तस्वीर काफी बदल गई है।


अब किसी अभिनेता की वापसी का मतलब जरूरी नहीं कि वह फिर से हीरो बनकर लौटे। कई बार उनका नया दौर उस किरदार से शुरू हुआ, जो उनकी पुरानी इमेज से बिल्कुल उलट हो। दरअसल, ओटीटी के विस्तार, कंटेंट-ड्रिवेन फिल्मों और बदलती कास्टिंग ने पुराने कलाकारों के लिए ऐसी जगह बनाई है, जिसके बाद वह उम्र और अनुभव के साथ ऐसे किरदार चुन रहे हैं जिनमें स्टारडम से ज्यादा कहानी और अभिनय की गुंजाइश है।


2025 में भी कई पुराने कलाकारों की वापसी ने दिखाया कि दर्शक सिर्फ स्टार को नहीं, उसके किरदार को भी स्वीकार करने के लिए तैयार हैं। ऐसे में अब आपको उन किरदारों के बारे में बताते हैं, जिनमें किसी ने विलेन बनकर अपनी पुरानी इमेज तोड़ी, किसी ने निगेटिव शेड को अपनाया, किसी ने कैरेक्टर रोल में वापसी की तो किसी ने कॉमेडी और छोटे पर्दे की पहचान से निकलकर गंभीर किरदार में खुद को साबित किया।

गौरव गेरा
गौरव गेरा - फोटो : इंस्टाग्राम-@gauravgera
गौरव गेरा
गौरव गेरा को लंबे समय तक दर्शकों ने कॉमेडी और डिजिटल शॉर्ट वीडियो के लिए पहचाना। 'जस्सी जैसी कोई नहीं' से लेकर 'चुटकी' और 'शॉपकीपर' जैसे किरदारों ने उन्हें घर-घर तक पहुंचाया, लेकिन इस लोकप्रियता के बीच उनकी पहचान एक कॉमेडियन के तौर पर ही रह गई और गौरव कहीं पीछे छूटते दिखाई दिए। फिर वर्षों बाद आई 'धुरंधर' और कहानी ने नया मोड़ लिया। 

'धुरंधर' में निभाया ये किरदार
फिल्म में उन्होंने मोहम्मद आलम का किरदार निभाया, जो पाकिस्तान में जूस सेंटर चलाने वाले व्यक्ति के रूप में नजर आए, लेकिन कहानी में उनकी भूमिका कहीं ज्यादा गंभीर है। सबसे खास बात यह रही कि दर्शकों को पहली नजर में उन्हें पहचानना तक मुश्किल हुआ। यानी जिस कलाकार को दर्शक वर्षों से हंसी और कॉमेडी के साथ जोड़ते रहे, उसने इस बार कम बोलकर, चेहरे और भावनाओं के जरिए असर पैदा करने वाला किरदार चुना।

गौरव की दूसरी पारी की खासियत यही है कि वह अपनी सबसे बड़ी पहचान से बाहर निकलकर खुद को फिर से अभिनेता के रूप में स्थापित करते दिखे। ‘धुरंधर’ के बाद उन्होंने खुद भी माना कि लंबे समय बाद उन्हें ऐसा किरदार मिला, जिसमें उन्हें पहचान पाना मुश्किल था। यानी दूसरी पारी का मतलब नई शुरुआत से ज्यादा अपनी पुरानी पहचान को तोड़ना है।

रजत बेदी
रजत बेदी - फोटो : इंस्टाग्राम
रजत बेदी
रजत बेदी का करियर भी बॉलीवुड की उस विडंबना की कहानी है, जहां चेहरा दर्शकों को याद रहता है, लेकिन नाम नहीं। उन्होंने करीब 28 साल के करियर में 40 से ज्यादा फिल्मों में काम किया, मगर लंबे समय तक उन्हें लोग फिल्म के नाम या किरदार से पहचानते रहे।
 
  • ‘कोई... मिल गया’ में राज सक्सेना का किरदार उनकी सबसे यादगार भूमिकाओं में रहा।
  • इसके अलावा 'जानी दुश्मन', 'अक्सर', 'द ट्रेन' और कई दूसरी फिल्मों में वह अलग-अलग भूमिकाओं में दिखाई दिए।
  • मगर एक समय के बाद वह मुख्यधारा के हिंदी सिनेमा से लगभग गायब हो गए।

इस सीरीज से की वापसी
फिर 'द बैड्स ऑफ बॉलीवुड' ने उनकी पहचान को ही कहानी का हिस्सा बना दिया। आर्यन खान की इस सीरीज में उन्होंने जराज का किरदार निभाया और चर्चा में आ गए। बेदी ने खुद कहा कि इस वापसी के बाद लोगों के उन्हें पहचानने का तरीका बदल गया है। अब वह ऐसे किरदारों की तरफ देख रहे हैं जो उनकी ऐसी साइड सामने लाएं, जिसे दर्शकों ने पहले नहीं देखा। 

चंद्रचूड़ सिंह
चंद्रचूड़ सिंह - फोटो : सोशल मीडिया
चंद्रचूड़ सिंह
90 के दशक में चंद्रचूड़ सिंह उन चेहरों में थे, जिनमें रोमांटिक हीरो वाली पूरी छवि दिखाई देती थी। ‘माचिस’ ने उन्हें पहचान दी, जबकि ‘जोश’ और ‘क्या कहना’ जैसी फिल्मों ने उनकी जगह मजबूत की। लेकिन करियर के बीच आई लंबी दूरी ने उनकी रफ्तार रोक दी। एक गंभीर चोट और व्यक्तिगत जीवन की जिम्मेदारियों ने भी उनके फिल्मी सफर को प्रभावित किया। 

'बयान' में हुमा के साथ आए थे नजर
  • वर्षों बाद जब वह ‘आर्या’ में नजर आए, तो पर्दे पर लौटने वाला चेहरा वही था, लेकिन भूमिका का संसार बिल्कुल अलग था।
  • यहां वह रोमांटिक हीरो नहीं थे, बल्कि एक परिवार, रिश्तों और अपराध की जटिल कहानी के बीच खड़ा किरदार थे।
  • इसके अलावा बिकास रंजन मिश्रा की 'बयान' में भी उन्होंने ऐसा ही किरदार चुना, जो उनके पुराने स्क्रीन व्यक्तित्व से बिल्कुल अलग दिशा में जाता है।
  • 'बयान' में अभिनेता एक प्रभावशाली आध्यात्मिक नेता 'महाराज' की भूमिका में दिखाई दिए, जिस पर यौन शोषण के आरोप लगते हैं।
  • फिल्म का केंद्र हुमा कुरैशी का पुलिस किरदार है, लेकिन सिंह का किरदार कहानी के संघर्ष का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
  • यही उनकी दूसरी पारी की सबसे बड़ी खूबी रही। उन्होंने अपनी पुरानी छवि को दोहराने के बजाय उम्र के साथ बदलते किरदार को स्वीकार किया।

प्रीति जिंटा
प्रीति जिंटा - फोटो : सोशल मीडिया
प्रीति जिंटा
‘दिल चाहता है’, ‘कल हो ना हो’ और ‘वीर-जारा’ जैसी फिल्मों की लोकप्रिय अभिनेत्री प्रीति जिंटा ने लंबे ब्रेक के बाद 'बंटवारा 1947' से वापसी की। अब उनकी स्क्रीन इमेज पहले वाली चुलबुली रोमांटिक हीरोइन से आगे बढ़कर ज्यादा मैच्योर किरदारों की ओर जाती दिख रही है।

दीपक तिजोरी
दीपक तिजोरी - फोटो : इंस्टाग्राम
दीपक तिजोरी
दीपक तिजोरी की कहानी थोड़ी अलग है। वह उन कलाकारों में रहे, जो खुद लीड स्टार न होते हुए भी फिल्मों के यादगार हिस्से बन गए। 'आशिकी', 'जो जीता वही सिकंदर', 'खिलाड़ी', 'कभी हां कभी ना', 'गुलाम' और 'बादशाह' जैसी फिल्मों ने उन्हें 90 के दशक की हिंदी फिल्मों का जाना-पहचाना चेहरा बनाया। साथ ही उन्होंने निर्देशन की दुनिया में भी कदम रखा।

तिजोरी को लगता रहा कि अभिनेता के तौर पर उन्हें एक खास तरह के कमर्शियल किरदारों में बांध दिया गया था। 2025 में उन्होंने कहा कि अपने दौर में वह कमर्शियल अभिनेता के तौर पर टाइपकास्ट हो गए थे और अब उम्र के मुताबिक भूमिकाएं करना चाहते हैं। यही सोच उनकी मौजूदा पारी में दिखाई देती है। 
 
  • गुजराती फिल्म 'गेट सेट गो' के साथ उन्होंने करीब दो दशक बाद गुजराती सिनेमा में वापसी की।
  • फिल्म में उन्होंने अरुण गोहिल का किरदार निभाया।
  • इसके अलावा शॉर्ट फिल्म ‘Echoes of Us’ में उनके अभिनय को अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में पहचान मिली। 
  • 2025-26 के दौरान उन्हें कई बेस्ट एक्टर सम्मान मिले।

करिश्मा कपूर
करिश्मा कपूर - फोटो : इंस्टाग्राम@therealkarismakapoor
करिश्मा कपूर
90 के दशक की टॉप अभिनेत्रियों में शामिल करिश्मा कपूर ने लंबे ब्रेक के बाद 'मेंटलहुड' और 'मर्डर मुबारक' जैसे प्रोजेक्ट्स से वापसी की। अब वह ग्लैमरस हीरोइन के बजाय उम्र और अनुभव के मुताबिक अलग-अलग किरदारों में नजर आती हैं। इसी साल अभिनेत्री की सीरीज 'ब्राउन' आई, जिसमें उन्होंने कॉप का किरदार निभाया।

समीरा रेड्डी
समीरा रेड्डी - फोटो : सोशल मीडिया
समीरा रेड्डी
'मैंने दिल तुझको दिया', 'मुसाफिर' और 'रेस' जैसी फिल्मों में नजर आईं समीरा रेड्डी ने शादी और परिवार के बाद फिल्मों से दूरी बनाई। इसके बाद सोशल मीडिया के जरिए उन्होंने खुद को एक अलग अंदाज में पेश किया और मातृत्व, बॉडी इमेज और आत्मविश्वास जैसे मुद्दों पर खुलकर बात की। लगभग 13 साल बाद अभिनेत्री संजय दत्त के साथ फिल्म 'आखिरी सवाल' में नजर आईं। हालांकि, फिल्म और उनके किरदार ने दर्शकों के बीच कोई गहरी छाप नहीं छोड़ी।

अक्षय खन्ना
अक्षय खन्ना - फोटो : सोशल मीडिया
अक्षय खन्ना
अक्षय खन्ना की दूसरी पारी शायद इस पूरी सूची में सबसे ज्यादा साफ तरीके से दिखती है। 90 के दशक में उन्होंने रोमांटिक और लीड हीरो के तौर पर शुरुआत की। लेकिन समय के साथ उन्होंने ऐसे किरदार स्वीकार किए, जिनमें उनके स्टारडम से ज्यादा अभिनय की जरूरत थी।
 
  • ‘हमराज’ में रोमांटिक हीरो की छवि धीरे-धीरे निगेटिव किरदार में बदलती है और यही बदलाव अक्षय की स्क्रीन इमेज के लिए महत्वपूर्ण रहा।
  • इस भूमिका के लिए उन्हें बेस्ट विलेन का आईफा अवॉर्ड भी मिला। 

इसके बाद ‘मॉम’ में सीबीआई अधिकारी मैथ्यू, ‘सेक्शन 375’ में वकील तरुण सलूजा और फिर ‘दृश्यम 2’ में पुलिस अधिकारी की भूमिका ने दिखाया कि अक्षय अब किसी एक तरह के किरदार तक सीमित नहीं रहना चाहते। अक्षय की खासियत यह रही कि उन्होंने अपने स्टारडम को किरदारों के रास्ते में नहीं आने दिया। हीरो से विलेन और फिर जटिल कैरेक्टर रोल तक का सफर उनकी दूसरी पारी को सिर्फ कमबैक नहीं, बल्कि इमेज ट्रांसफॉर्मेशन बनाता है।

दूसरी पारी का मतलब अब सिर्फ कमबैक नहीं
इन कलाकारों की कहानियां एक जैसी नहीं हैं। किसी की वापसी लंबे गैप के बाद हुई, किसी ने अपनी कॉमिक पहचान को पीछे छोड़ा, किसी ने निगेटिव किरदार अपनाया। लेकिन इन सभी कहानियों में एक समान बात जरूर है कि स्टारडम की उम्र सीमित हो सकती है, अभिनय की नहीं।

90 और 2000 के दशक में बॉलीवुड में कलाकारों को अक्सर हीरो, हीरोइन, विलेन या कॉमेडियन जैसी तय श्रेणियों में देखा जाता था। आज ओटीटी, वेब सीरीज और कंटेंट-केंद्रित सिनेमा ने इन सीमाओं को काफी हद तक कम किया है। अब किसी कलाकार के लिए यह जरूरी नहीं कि वह स्क्रीन पर पूरी फिल्म का नायक हो। कई बार 15 मिनट का किरदार भी पूरी फिल्म की पहचान बन सकता है।
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