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पाकिस्तान में 18 साल बाद बांग्लादेशी कलाकारों ने किया परफॉर्म, सिंगर शिरीन जवाद बोलीं- यहां घर जैसा एहसास मिला
Thu, 06 Nov 2025 02:51 PM IST
हिमांशु सोनी
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Published by: हिमांशु सोनी
Updated Thu, 06 Nov 2025 02:51 PM IST
सार
Bangladeshi Artists Performs in Pakistan: बीते कुछ वर्षों से पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच राजनीतिक रिश्ते कुछ खास नहीं रहे हैं। इसी बीच करीब 18 वर्षों के बाद बांग्लादेशी कलाकारों ने पाकिस्तान में मंच पर परफॉर्म किया है।
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बांग्लादेशी आर्टिस्ट
- फोटो : एक्स
विस्तार
पड़ोसी देशों के बीच रिश्ते जब ठहर जाते हैं, तो अक्सर कला ही वह पुल बन जाती है जो दूरियों को मिटा देती है। ऐसा ही कुछ देखने को मिला पाकिस्तान के कराची शहर में चल रहे वर्ल्ड कल्चर फेस्टिवल में, जहां 18 साल बाद बांग्लादेश के कलाकारों ने मंच संभाला। इस मौके ने दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक रिश्तों में नई गर्मजोशी भर दी।
कराची आर्ट्स काउंसिल में परफॉर्म कर रहे कलाकार
कराची आर्ट्स काउंसिल के इस उत्सव में 140 देशों के कलाकार अपनी कला, संगीत और नृत्य की झलक दिखा रहे हैं, लेकिन सभी की निगाहें बांग्लादेशी दल पर टिकी थीं। इस दल का नेतृत्व कर रही थीं बांग्लादेश आर्ट वीक की संस्थापक नेहारिका मुमताज। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ प्रदर्शन नहीं, बल्कि दो देशों के बीच आपसी समझ और विश्वास का पुनर्जन्म है। उन्होंने कहा, '18 साल बाद हमें यहां आने का मौका मिला है, यह बांग्लादेश की सांस्कृतिक विविधता को पाकिस्तान के लोगों तक पहुंचाने का शानदार अवसर है।'
शिरीन जवाद ने बांधा समा
इस दल में शामिल रही मशहूर गायिका शिरीन जवाद ने बुधवार की रात अपनी सुरीली आवाज से समा बांध दिया। उन्होंने बंगाली गीतों के साथ दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। शिरीन ने मंच से कहा, 'जब मैं कराची उतरी तो लगा जैसे अपने ही घर आ गई हूं। यहां के लोग बेहद आत्मीय और स्नेही हैं।” उन्होंने बताया कि पहले वह सूफी गीत गाने का मन बना रही थीं, लेकिन आयोजकों की सलाह पर अपने एल्बम ‘पंजाबी वाला’ से कुछ गाने पेश किए।
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यह खबर भी पढ़ें: Harish Rai: नहीं रहे रॉकी भाई के चाचा, 'केजीएफ' फेम एक्टर हरीश राय का निधन; इस बीमारी से जूझ रहे थे
वहीं नेहारिका की कलाकृतियों ने महिला शक्ति, परंपरा और बांग्लादेशी विरासत को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि कला किसी भी राजनीतिक सीमा को नहीं मानती- यह वह माध्यम है जो दिलों को जोड़ता है।
पाकिस्तान-बांग्लादेश में आई थी दरार
पिछले एक दशक से भी ज्यादा समय तक दोनों देशों के बीच संबंधों में ठंडापन बना रहा था, खासकर जब 2010 में शेख हसीना की सरकार ने 1971 के युद्ध से जुड़े सहयोगियों पर मुकदमे शुरू किए थे। लेकिन अगस्त 2024 में सरकार गिरने और नई राजनीतिक परिस्थितियों के बनने के बाद से दोनों देशों के बीच रिश्तों में फिर से रौनक लौट रही है।
पाकिस्तान में बांग्लादेशी कलाकारों की वापसी को स्थानीय लोगों ने खुले दिल से स्वीकार किया। आर्ट्स काउंसिल के अध्यक्ष अहमद शाह ने कहा, 'यह सिर्फ एक प्रस्तुति नहीं, बल्कि इतिहास का पुनर्लेखन है। कला ने वो कर दिखाया है जो राजनय नहीं कर सका।' दिलचस्प बात यह भी है कि हाल ही में पाकिस्तानी डिजाइनरों ने ढाका में अपना काम प्रदर्शित किया था, जिससे यह सांस्कृतिक पुल दोनों ओर से मजबूत हो रहा है।
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कराची आर्ट्स काउंसिल में परफॉर्म कर रहे कलाकार
कराची आर्ट्स काउंसिल के इस उत्सव में 140 देशों के कलाकार अपनी कला, संगीत और नृत्य की झलक दिखा रहे हैं, लेकिन सभी की निगाहें बांग्लादेशी दल पर टिकी थीं। इस दल का नेतृत्व कर रही थीं बांग्लादेश आर्ट वीक की संस्थापक नेहारिका मुमताज। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ प्रदर्शन नहीं, बल्कि दो देशों के बीच आपसी समझ और विश्वास का पुनर्जन्म है। उन्होंने कहा, '18 साल बाद हमें यहां आने का मौका मिला है, यह बांग्लादेश की सांस्कृतिक विविधता को पाकिस्तान के लोगों तक पहुंचाने का शानदार अवसर है।'
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शिरीन जवाद ने बांधा समा
इस दल में शामिल रही मशहूर गायिका शिरीन जवाद ने बुधवार की रात अपनी सुरीली आवाज से समा बांध दिया। उन्होंने बंगाली गीतों के साथ दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। शिरीन ने मंच से कहा, 'जब मैं कराची उतरी तो लगा जैसे अपने ही घर आ गई हूं। यहां के लोग बेहद आत्मीय और स्नेही हैं।” उन्होंने बताया कि पहले वह सूफी गीत गाने का मन बना रही थीं, लेकिन आयोजकों की सलाह पर अपने एल्बम ‘पंजाबी वाला’ से कुछ गाने पेश किए।
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वहीं नेहारिका की कलाकृतियों ने महिला शक्ति, परंपरा और बांग्लादेशी विरासत को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि कला किसी भी राजनीतिक सीमा को नहीं मानती- यह वह माध्यम है जो दिलों को जोड़ता है।
पाकिस्तान-बांग्लादेश में आई थी दरार
पिछले एक दशक से भी ज्यादा समय तक दोनों देशों के बीच संबंधों में ठंडापन बना रहा था, खासकर जब 2010 में शेख हसीना की सरकार ने 1971 के युद्ध से जुड़े सहयोगियों पर मुकदमे शुरू किए थे। लेकिन अगस्त 2024 में सरकार गिरने और नई राजनीतिक परिस्थितियों के बनने के बाद से दोनों देशों के बीच रिश्तों में फिर से रौनक लौट रही है।
पाकिस्तान में बांग्लादेशी कलाकारों की वापसी को स्थानीय लोगों ने खुले दिल से स्वीकार किया। आर्ट्स काउंसिल के अध्यक्ष अहमद शाह ने कहा, 'यह सिर्फ एक प्रस्तुति नहीं, बल्कि इतिहास का पुनर्लेखन है। कला ने वो कर दिखाया है जो राजनय नहीं कर सका।' दिलचस्प बात यह भी है कि हाल ही में पाकिस्तानी डिजाइनरों ने ढाका में अपना काम प्रदर्शित किया था, जिससे यह सांस्कृतिक पुल दोनों ओर से मजबूत हो रहा है।