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Adoor Gopalakrishnan: फिल्म निर्माता ने सरकार को दी सलाह, डेढ़ करोड़ नहीं 50 लाख रुपये दी जाए प्रोत्साहन राशि
Sun, 03 Aug 2025 09:56 PM IST
सिराजुद्दीन
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Published by: सिराजुद्दीन
Updated Sun, 03 Aug 2025 09:56 PM IST
सार
Adoor Gopalakrishnan on Movies Funds: फिल्म निर्माता अदूर गोपालकृष्णन ने एक प्रोग्राम में कहा है कि केरल सरकार जो निर्माताओं को फिल्म बनाने के लिए 1.5 करोड़ रुपये देती है इसका बहुत अच्छा रिजल्ट सामने नहीं आ रहा है।
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अदूर गोपालकृष्णन
- फोटो : एक्स
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विस्तार
केरल सरकार हाशिए पर रहने वाले वर्गों के फिल्म निर्माताओं को फिल्म बनाने के लिए 1.5 करोड़ रुपये देती है। ऐसे में फिल्म निर्माता अदूर गोपालकृष्णन ने रविवार को कहा कि केरल स्टेट फिल्म डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (केएसएफडीसी) की तरफ से दिए जा रहे पैसे से कुछ खास फायदा नहीं हो पा रहा है।
गोपालकृष्णन ने बताया जनता का पैसा है
केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में एक फिल्म सम्मेलन के दौरान उन्होंने कहा कि महत्वाकांक्षी फिल्म निर्माताओं को इस तरह के फंड वितरित करने से पहले विशेषज्ञों से प्रशिक्षण लेना चाहिए।
उन्होंने कहा 'उन्हें यह बताया जाना चाहिए कि यह जनता का पैसा है ना कि व्यावसायिक उपक्रमों के लिए। इसका मकसद अच्छा सिनेमा बनाना है।'
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गोपालकृष्णन ने बताया जनता का पैसा है
केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में एक फिल्म सम्मेलन के दौरान उन्होंने कहा कि महत्वाकांक्षी फिल्म निर्माताओं को इस तरह के फंड वितरित करने से पहले विशेषज्ञों से प्रशिक्षण लेना चाहिए।
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उन्होंने कहा 'उन्हें यह बताया जाना चाहिए कि यह जनता का पैसा है ना कि व्यावसायिक उपक्रमों के लिए। इसका मकसद अच्छा सिनेमा बनाना है।'
अदूर गोपालकृष्णन
- फोटो : एक्स
गोपालकृष्णन ने दिया सुझाव
गोपालकृष्णन ने सुझाव दिया कि सार्थक फिल्मों के निर्माण को प्रोत्साहित करने के लिए एक बड़े अनुदान के बजाय, तीन व्यक्तियों को 50-50 लाख रुपये दिए जा सकते हैं। उनकी इस टिप्पणी पर श्रोताओं में मौजूद कुछ प्रतिनिधियों ने विरोध किया, जिन्हें बाद में मंच पर मौजूद लोगों ने शांत कराया।
यह खबर भी पढ़ें: Aamir Khan: 'कुली' की स्टारकास्ट को आमिर ने दिखा दी अपनी फिल्म, यूजर्स ने पूछा- 'रजनीकांत कहां हैं?'
हड़ताल ने संस्थान के विकास को बाधित किया
कोट्टायम स्थित के आर नारायणन राष्ट्रीय दृश्य विज्ञान एवं कला संस्थान में 2022 में हुए छात्रों के विरोध प्रदर्शन का जिक्र करते हुए गोपालकृष्णन ने कहा कि तत्कालीन निदेशक शंकर मोहन के खिलाफ जातिगत भेदभाव के आरोपों से शुरू हुई हड़ताल ने संस्थान के विकास को बाधित कर दिया है।
उन्होंने इसे एक 'भद्दी हड़ताल' बताया, जो ऐसे समय में हुई जब संस्थान देश में सबसे अच्छे संस्थानों में से एक बनने की कगार पर था।
गोपालकृष्णन ने सुझाव दिया कि सार्थक फिल्मों के निर्माण को प्रोत्साहित करने के लिए एक बड़े अनुदान के बजाय, तीन व्यक्तियों को 50-50 लाख रुपये दिए जा सकते हैं। उनकी इस टिप्पणी पर श्रोताओं में मौजूद कुछ प्रतिनिधियों ने विरोध किया, जिन्हें बाद में मंच पर मौजूद लोगों ने शांत कराया।
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हड़ताल ने संस्थान के विकास को बाधित किया
कोट्टायम स्थित के आर नारायणन राष्ट्रीय दृश्य विज्ञान एवं कला संस्थान में 2022 में हुए छात्रों के विरोध प्रदर्शन का जिक्र करते हुए गोपालकृष्णन ने कहा कि तत्कालीन निदेशक शंकर मोहन के खिलाफ जातिगत भेदभाव के आरोपों से शुरू हुई हड़ताल ने संस्थान के विकास को बाधित कर दिया है।
उन्होंने इसे एक 'भद्दी हड़ताल' बताया, जो ऐसे समय में हुई जब संस्थान देश में सबसे अच्छे संस्थानों में से एक बनने की कगार पर था।
चैनल एक दूसरे से भद्दा बनने की होड़ में हैं
गोपालकृष्णन ने केरल में टेलीविजन की मौजूदा स्थिति की भी आलोचना की। उन्होंने दावा किया 'हर चैनल दूसरों से बदतर होने की होड़ में लगा है, और दर्शकों को बुरे सपने ही देखने पड़ रहे हैं।'
दलित लेखक ने गोपालकृष्णन की आलोचना की
हाशिए के समुदायों के फिल्म निर्माताओं पर उनकी टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए दलित लेखक और कार्यकर्ता सनी एम कपिकाड ने कहा कि गोपालकृष्णन के विचार 'विशेषाधिकार प्राप्त वर्ग की चेतना' को दर्शाते हैं।
कपिकाड ने कहा, 'यह जातिगत पदानुक्रम की भावना है जो उन्हें ऐसी बातें कहने पर मजबूर करती है।'
गोपालकृष्णन ने केरल में टेलीविजन की मौजूदा स्थिति की भी आलोचना की। उन्होंने दावा किया 'हर चैनल दूसरों से बदतर होने की होड़ में लगा है, और दर्शकों को बुरे सपने ही देखने पड़ रहे हैं।'
दलित लेखक ने गोपालकृष्णन की आलोचना की
हाशिए के समुदायों के फिल्म निर्माताओं पर उनकी टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए दलित लेखक और कार्यकर्ता सनी एम कपिकाड ने कहा कि गोपालकृष्णन के विचार 'विशेषाधिकार प्राप्त वर्ग की चेतना' को दर्शाते हैं।
कपिकाड ने कहा, 'यह जातिगत पदानुक्रम की भावना है जो उन्हें ऐसी बातें कहने पर मजबूर करती है।'