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Jharkhand Polls Phase-1: चंपई सोरेन, गीता कोड़ा से महुआ मांजी तक, पहले चरण में इनकी किस्मत होगी ईवीएम में कैद
Wed, 13 Nov 2024 12:42 AM IST
शिवेंद्र तिवारी
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
Published by: शिवेंद्र तिवारी
Updated Wed, 13 Nov 2024 12:42 AM IST
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झारखंड विधानसभा चुनाव चरण 1
- फोटो :
AMAR UJALA
विस्तार
झारखंड में विधानसभा चुनाव के पहले चरण की चुनावी परीक्षा बुधवार को है। पहले दौर में 683 उम्मीदवारों की सियासी किस्मत का फैसला होना है, जिनमें कई दिग्गज चेहरे भी शामिल हैं। इन चेहरों में पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन से लेकर स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता और राज्यसभा सांसद महुआ माजी तक शामिल हैं। पहले चरण में कुछ ऐसी भी सीटे हैं जहां दिग्गजों के परिवार मैदान में हैं। इनमें पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा की पत्नी गीता कोड़ा और पूर्व मुख्यमंत्री रघुबर दास की बहू पूर्णिमा साहू जैसै चेहरे शामिल हैं।आइये जानते हैं कि पहले चरण में किन प्रमुख विधानसभा सीटों पर चुनाव है? यहां उम्मीदवार कौन हैं? प्रमुख चेहरों का मुकाबला किससे है? इन सीटों पर पिछली बार क्या हुआ था?
चंपई सोरेन: झारखंड चुनाव के पहले चरण में चर्चित सीटों में सरायकेला सीट भी शामिल हैं। पिछले कुछ महीनों में लगातार झारखंड की राजनीति की सुर्खियों में रहे चंपई सोरेन भाजपा के टिकट पर सरायकेला से भाग्य आजमा रहे हैं। उनके सामने झामुमो ने पूर्व भाजपा नेता गणेश महली को उतारा है। हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी के बाद चंपई सोरेन ने करीब छह महीने झारखंड की सत्ता संभाली थी। वह 2 फरवरी 2024 से 3 जुलाई 2024 सीएम रहे और हेमंत सोरेन के जेल से बाहर आने के बाद उनकी कुर्सी चली गई। पूर्व सीएम चंपई सोरेन 30 अगस्त को भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए और अब भाजपा के उम्मीदवार हैं। सरायकेला में पिछले नतीजे की बात करें तो झारखंड मुक्ति मोर्चा के टिकट पर लड़े चम्पई सोरेन ने भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार गणेश महली को 15667 मत से चुनाव हराया था।
बाबूलाल सोरेन: चंपई सोरेन के बेटे बाबूलाल सोरेन भी चुनाव लड़ रहे हैं। उन्हें भाजपा ने घाटशिला सुरक्षित सीट से मौका दिया है। उनकी सीट पर भी पहले चरण में मतदान होना है। बाबूलाल का सामना झामुमो के मौजूदा विधायक रामदास सोरेन से है। 2019 में घाटशिला शीट पर रामदास ने भाजपा के उम्मीदवार लखन चंद्र मार्डी को 6724 वोट से शिकस्त दी थी।
बन्ना गुप्ता vs सरयू राय: जमशेदपुर पश्चिम भी इस चरण की खास सीट है। यहां कांग्रेस नेता और स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता उम्मीदवार हैं। पिछले चुनाव में कांग्रेस नेता ने भाजपा के देवेंद्र नाथ सिंह को 22583 मत से चुनाव हराया था। इस बार मंत्री का सामना जदयू के दिग्गज नेता सरयू राय से है। दशकों तक भाजपा में सरयू राय ने 2019 में जमशेदपुर पूर्वी सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर जीते थे। उन्होंने इस चुनाव में झारखंड के तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुबर दास को हरा दिया था।
अजॉय कुमार vs पूर्णिमा साहू: जमशेदपुर पूर्व में भी मुकाबला चेहरों के कारण दिलचस्प माना जा रहा है। कांग्रेस ने यहां से पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व सांसद अजॉय कुमार को उतारा है। पूर्व आईपीएस अजॉय कुमार 15वीं लोकसभा में जमशेदपुर से सांसद रह चुके हैं। कांग्रेस कार्य समिति के सदस्य अजॉय पार्टी के कई राज्यों के प्रभारी भी हैं, जिनमें ओडिशा, त्रिपुरा, नगालैंड और सिक्किम शामिल हैं। उनका मुकाबला पूर्व मुख्यमंत्री रघुबर दास की बहू और भाजपा उम्मीदवार पूर्णिमा दास से है। 2014 से 2019 तक झारखंड के मुख्यमंत्री रहे रघुबर अब ओडिशा के राज्यपाल बन चुके हैं। 2019 में जमशेदपुर पूर्व सीट पर निर्दलीय सरयू रॉय ने तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुबर दास को 15833 मत से शिकस्त दी थी। इससे पहले यहां से रघुबर दास लगातार पांच बार जीत दर्ज करने में सफल रहे थे।
मीरा मुंडा: पूर्वी सिंहभूम जिले की पोटका विधानसभा सीट पर भी दिलचस्प मुकाबले की उम्मीद है। पोटका में झारखंड के तीन बार मुख्यमंत्री रहे और पूर्व केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा की पत्नी मीरा मुंडा चुनाव मैदान में हैं। हाल में हुए लोकसभा चुनाव में अर्जुन मुंडा खूंटी लोकसभा सीट से उतरे थे, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली थी। अर्जुन मुंडा मार्च 2003 से मार्च 2005, मार्च 2005 से सितंबर 2006 और सितंबर 2010 से जनवरी 2013 तक झारखंड के सीएम रहे थे। अब पोटका से उनकी पत्नी मीरा चुनाव लड़ रही हैं जिनका मुकाबला झामुमो के मौजूदा विधायक संजीब सरदार से है। पिछले चुनाव में संजीब सरदार ने भारतीय जनता पार्टी की मेनका सरदार को 43110 मत से बड़े अंतर से हराया था।
गीता कोड़ा: जगन्नाथपुर में पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा की पत्नी गीता कोड़ा अपनी किस्मत आजमा रही हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव में झारखंड में कांग्रेस की एकमात्र सांसद रहीं गीता कोड़ा ने 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा का दामन थाम लिया था। लोकसभा चुनाव में भाजपा ने गीता को सिंहभूम सीट से प्रत्याशी भी बनाया लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। उनके पति मधु कोड़ा सितंबर 2006 से अगस्त 2008 तक झारखंड के मुख्यमंत्री रहे हैं। यह झारखंड के इतिहास में पहली बार था जब सरकार का नेतृत्व एक निर्दलीय विधायक ने किया था। इस बार के चुनाव में गीता का मुकाबला कांग्रेस नेता सोना राम सिंकू से है। जगन्नाथपुर में पिछली बार कांग्रेस के सोना राम सिंकू ने झारखंड विकास मोर्चा (प्रजातांत्रिक) के उम्मीदवार मंगल सिंह बोबोंगा को 11606 वोट से हराया था।
महुआ माजी vs सीपी सिंह: रांची विधानसभा सीट के मुकाबले पर भी सबकी निगाहें टिकी होंगी। यहां पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और वरिष्ठ भाजपा नेता चंद्रेश्वर प्रसाद सिंह (सीपी सिंह) फिर चुनाव मैदान में हैं। वह झारखंड बनने से पहले 1996 से रांची सीट से विधायक हैं और तब से कभी चुनाव नहीं हारे। सीपी सिंह के सामने झारखंड मुक्ति मोर्चा ने अपने मौजूदा राज्यसभा सांसद महुआ माजी को उतारा है। पिछले चुनाव में दोनों आमने-सामने थे लेकिन उस बार सीपी सिंह ने महुआ को 5904 मत से हरा दिया था।
राजा पीटर: रांची जिले की तमाड़ विधानसभा सीट पर भी खास बनी हुई है। तत्कालीन मुख्यमंत्री शिबू सोरेन को हराने वाले राजा पीटर यहां से फिर चुनाव मैदान में हैं। पूर्व मंत्री राजा पीटर उर्फ गोपाल कृष्ण पातर 2009 में शिबू सोरेन को तमाड़ विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में हराकर पहली बार चर्चा में आए थे। इस हार के बाद शिबू सोरेन को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ गया था। 2019 के विधानसभा चुनाव में तमाड़ सीट पर झामुमो के विकास मुंडा ने जीत हासिल की थी। विकास ने आजसू पार्टी के राम दुर्लाव सिंह मुंडा को 30971 वोट से हराया था। इस बार एनडीए की घटक दल जदयू की तरफ से राजा पीटर प्रत्याशी हैं। तमाड़ में पीटर के सामने झारखंड मुक्ति मोर्चा के मौजूदा विधायक विकास सिंह मुंडा हैं।
नीलकंठ सिंह मुंडा: दक्षिण छोटानागपुर क्षेत्र की खूंटी विधानसभा सीट भी खास है। यहां भाजपा ने अपने वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री नीलकंठ सिंह मुंडा को उम्मीदवार बनाया है। झारखंड मुक्ति मोर्चा की तरफ से राम सूर्य मुंडा मैदान में हैं। नीलकंठ खूंटी सीट से पांच बार के विधायक हैं। वे झारखंड सरकार में संसदीय कार्य और ग्रामीण विकास मंत्री रह चुके हैं। 2019 के चुनाव में खूंटी सीट पर भाजपा के नीलकंठ सिंह मुंडा ने झारखंड मुक्ति मोर्चा के सुशील पाहन को 26327 मत से हराया था।
रामेश्वर उरांव vs नीरू भगत: लोहरदगा विधानसभा सीट भी हमेशा की तरह चर्चा में है और यहां के मुकाबले पर सबकी नजरें होंगी। लोहरदगा में दिग्गज नेताओं के बीच मुकाबला होता रहा है। कांग्रेस ने एक बार फिर एक बार फिर डॉ. रामेश्वर उरांव को टिकट दिया है। वहीं विपक्ष की तरफ से आजसू पार्टी ने पूर्व विधायक कमल किशोर भगत की पत्नी नीरू शांति भगत पर भरोसा जताया है। 2019 में कांग्रेस के रामेश्वर उरांव ने भाजपा के सुखदेव भगत को 30150 मत से शिकस्त दी थी।