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पंजाब में किसान आंदोलन: भाजपा-आप की बढ़ी चिंता, कांग्रेस-अकाली दल को ग्रामीण वोट बैंक में सेंध की उम्मीद

Fri, 04 Sep 2026 09:15 AM IST
Nivedita रिंपी गुप्ता, अमर उजाला, पटियाला
रिंपी गुप्ता, अमर उजाला, पटियाला Published by: Nivedita Updated Fri, 04 Sep 2026 09:15 AM IST
सार

2020-21 के किसान आंदोलन की राजनीतिक छाया पंजाब में भाजपा पर लंबे समय तक रही। अब भाजपा पंजाब में अपना आधार बढ़ाने में जुटी है। ऐसे में ग्रामीण पंजाब में स्वीकार्यता बढ़ाना उसके लिए बड़ी चुनौती है।

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Farmers Protest in Punjab BJP AAP Congress Akali Dal election 2027
किसान आंदोलन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

विधानसभा चुनाव से पहले पंजाब में एक बार फिर किसान आंदोलन गर्मा गया है। एमएसपी की कानूनी गारंटी, कर्ज माफी, अमेरिका के साथ व्यापार समझौता रद्द करने और ग्रामीण मजदूरों के लिए पेंशन समेत कई मांगों को लेकर किसान मोहाली-चंडीगढ़ सीमा पर धरना दे रहे हैं।
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आंदोलन का सीधा असर भाजपा पर पड़ सकता है लेकिन इस बार आम आदमी पार्टी भी इससे अछूती नहीं है। कांग्रेस और अकाली दल के लिए यह किसानों के बीच खोई जमीन वापस पाने का मौका बन सकता है।
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भाजपा के लिए ग्रामीण पंजाब में स्वीकार्यता की परीक्षा
2020-21 के किसान आंदोलन की राजनीतिक छाया पंजाब में भाजपा पर लंबे समय तक रही। तीन कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन में किसान संगठनों ने भाजपा के विरोध में अभियान चलाया था। 2022 के विधानसभा चुनाव में संयुक्त किसान मोर्चा ने भी भाजपा के खिलाफ वोट की अपील की थी। अब भाजपा पंजाब में अपना आधार बढ़ाने में जुटी है। पार्टी 2027 में सभी 117 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने की बात कह रही है। ऐसे में ग्रामीण पंजाब में स्वीकार्यता बढ़ाना उसके लिए बड़ी चुनौती है।
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अगर आंदोलन के कारण केंद्र और भाजपा के खिलाफ माहौल फिर मजबूत हुआ तो मालवा और दोआबा की ग्रामीण सीटों पर असर पड़ सकता है। किसान संगठनों की सक्रियता वाले इलाकों में भाजपा उम्मीदवारों को विरोध और सवालों का सामना करना पड़ सकता है। चुनौती सिर्फ किसान वोट की नहीं बल्कि पूरे ग्रामीण माहौल की है।

आप को नाराजगी दूर करने और कांग्रेस-अकाली दल को जमीन मजबूत करने का मौका
2020-21 में आप ने किसान आंदोलन का समर्थन किया था। 2022 में पार्टी ने 92 सीटें जीतकर सरकार बनाई। अब किसान शंभू और खनौरी मोर्चों पर मार्च 2025 में हुई पुलिस कार्रवाई और मांगें पूरी न होने को लेकर मान सरकार से नाराज हैं।

किसान नेता सरवन सिंह पंधेर का आरोप है कि मोर्चों से गायब ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और अन्य सामान का मुआवजा पंजाब सरकार ने नहीं दिया। एमएसपी कर्ज मुआवजा फसल विविधीकरण और कृषि लागत से जुड़ी मांगों का संबंध राज्य की नीतियों से भी है। ऐसे में आप विधायकों को गांवों में सवालों का सामना करना पड़ सकता है।

कांग्रेस के लिए आंदोलन केंद्र की भाजपा सरकार और पंजाब की आप सरकार दोनों को घेरने का अवसर है। हालांकि केवल समर्थन का बयान पर्याप्त नहीं होगा। किसानों के बीच प्रभाव बढ़ाने के लिए उसे मांगों को मजबूती से उठाना होगा।

कृषि कानूनों के मुद्दे पर भाजपा से गठबंधन तोड़ने वाला अकाली दल भी किसानों के बीच अपनी पुरानी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर सकता है। आंदोलन लंबा खिंचा तो उसे ग्रामीण पंजाब में वापसी का अवसर मिल सकता है।

राजनीतिक मामलों के विशेषज्ञ प्रोफेसर बलविंदर सिंह टिवाणा के अनुसार किसान आंदोलन का असर भाजपा और आप पर पड़ सकता है क्योंकि किसानों की मांगें केंद्र और राज्य दोनों सरकारों से जुड़ी हैं। मांगें पूरी न होने से दोनों के खिलाफ नाराजगी है। कांग्रेस और अकाली दल सक्रियता से किसानों के समर्थन में आते हैं और उनकी मांगों को उठाते हैं तो दोनों पार्टियां किसानों के बीच अपनी पैठ दोबारा मजबूत कर सकती हैं।
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