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Election: बीजेडी के दो विधायकों ने गंवाई सदस्या, पार्टी छोड़ने पर दल-बदल कानून के तहत कार्रवाई

Thu, 11 Apr 2024 04:26 PM IST
मेघा झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: मेघा झा Updated Thu, 11 Apr 2024 04:26 PM IST
सार

ओडिशा विधानसभा अध्यक्ष प्रमिला मलिक ने दल-बदल विरोधी कानून के तहत दोनों विधायकों को सदन के सदस्य के लिए भी अयोग्य घोषित किया है।

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Election: Two BJD MLAs lost membership, action under anti-defection law if they leave the party
ओडिशा विधानसभा (फाइल फोटो) - फोटो : odishaassembly.nic.in

विस्तार

बीजू जनता दल ओडिशा (बीजेडी) को छोड़ने वाले विधायक अरविंद ढाली और प्रेमानंद नायक की अब विधानसभा सीट भी गई ओडिशा विधानसभा अध्यक्ष प्रमिला मलिक ने दल-बदल विरोधी कानून के तहत दोनों विधायकों को सदन के सदस्य के लिए भी अयोग्य घोषित किया है।
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बीजेडी के दोनों विधायक अरविंद ढाली और प्रेमानंद नायक पार्टी से इस्तीफा देकर विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए थे। जिसके बाद से प्रशांत कुमार मुदुली ने 18 मार्च को एक याचिका दायर कर दोनों विधायकों का अयोग्य घोषित करने की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि दोनों ने अपनी इच्छानुसार ही सदस्यता छोड़ी है। इस पर सुनवाई के लिए दोनों विधायकों को नोटिस भी भेजा गया। लेकिन दोनों की विधायक उपस्थित नहीं हुए। हालांकि दोनों की विधायकों ने कहा है कि विधानसभा से अयोग्य कर देने से भी आगामी चुनाव पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा।
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यहां से थे विधायक, अब यहां के उम्मीदवार
जयदेव विधायक अरविंद ढाली शनिवार 2 मार्च को बीजेडी से इस्तीफा देकर रविवार 3 मार्च को भाजपा में शामिल हो गए थे। अब वे जयदेव विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के उम्मीदरवार हैं। वहीं 9 फरवरी को तेलकोई विधायक प्रेमानंद नायक ने भी इस्तीफा दे दिया था। साथ ही दोनों ने पार्टी की प्राथमिक सदस्या से भी इस्तीफा दे दिया था। अब तक नायक को किसी क्षेत्र से उम्मीदवार नामित नहीं किया गया है।
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खाली हो गई जयदेव और तेलकोई की एक-एक सीट
विधानसभा सचिवालय ने एक बयान जारी करते हुए कहा कि खुर्दा जिले के जयदेव की सीट अरविंद ढाली के बाद और केंझार जिले के तेलकोई की सीट प्रेमानंद नायक के इस्तीफा देने के बाद खाली हो गई हैं। क्योंकि दोनों को विधानसभा से अयोग्य घोषित कर दिया है।


क्या है दल-बदल विरोधी कानून
सदन सदस्यों (संसद सदस्य और राज्य विधानमंडल सदस्य) द्वारा बार-बार दल-बदल पर अंकुश लगाने के लिए दल-बदल विरोधी कानून (संविधान की दसवीं अनुसूची में शामिल) लागू किया गया था। वर्ष 1985 में 52वें संशोधन अधिनियम के तहत से संविधान में शामिल किया गया।
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