फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त

क्या है असम का बोडो समझौता? 54 साल बाद सुलझा ये पूरा मामला

Sat, 08 Feb 2020 01:58 PM IST
Garima Garg एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: Garima Garg Updated Sat, 08 Feb 2020 01:58 PM IST
विज्ञापन
what is bodo agreement? check the timeline here
क्या है बोडो संमझौता - फोटो : अमर उजाला

भारत सरकार और बोडो समुदाय के बीच समझौता 27 जनवरी को हुआ, जिसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को पहली बार कोकराझार पहुंचे। लोगों ने स्थानीय परंपरा के मुताबिक पीएम मोदी का स्वागत किया। साथ ही उनका समझौते के लिए धन्यवाद भी किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सात फरवरी को ट्वीट पर कहा था कि आज जब बोडो क्षेत्र में, नई उम्मीदों, नए सपनों, नए हौसले का संचार हुआ है, तो आप सभी की जिम्मेदारी और बढ़ गई है। मुझे पूरा विश्वास है कि Bodo Territorial Council अब यहां के हर समाज को साथ लेकर, विकास का एक नया मॉडल विकसित करेगी।



आखिर क्या है असम का बोडो समझौता? कब से चल रहा है ये मामला? इन सभी सवालों के जवाब मिलेंगे यहां? पढ़ते हैं आगे...

what is bodo agreement? check the timeline here
क्या है बोडो संझौता - फोटो : ani
  • 1966-67- प्लेन ट्राइबल्स काउंसिल ऑफ असम ( PTCA- Plain Tribals Council of Assam) के तहत अलग बोडो राज्य ‘बोडोलैंड’ की मांग उठाई गई। बता दें, यह एक राजनीतिक संगठन था।
  • 1979- असम में आंदोलन शुरू हुआ और मुद्दा था अवैध प्रवासी।
  • 1985- साल 1979 में शुरू हुए आंदोलन का अंत 1985 में हुआ। इस आंदोलन का अंत तब हुआ जब राजीव गांधी की केंद्र सरकार को ऑल असम स्टूडेंट यूनियन ( AASU) और असम सरकार के साथ समझौता करना पड़ा। इसके लिए राजीव गांधी ने दोनों को बिठाकर एक असम एकॉर्ड पर हस्ताक्षर किए।
  • 1986- रंजन दैमारी ने अक्टूबर में बोडो सिक्योरिटी फोर्स ( BDSF) नाम से एक उग्रवादी संगठन बनाया। बता दें, आगे चलकर इसका नाम नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड ( NDFB) रखा गया। 
what is bodo agreement? check the timeline here
क्या है बोडो संझौता - फोटो : ani
  • 1987- इस साल नए सिरे से इस मुद्दे को ऑल बोडो स्टूडेंट्स यूनियन ( ABSU) द्वारा उठाया गया। जिसके लिए ABSU के नेता उपेंद्रनाथ ब्रह्मा ने  Divide Assam fifty-fifty नारा दिया। 
  • 1990-  बोडो उग्रवादियों को भगाने के लिए इस दशक में भारत सेना का सहारा लिया गया। इसी कारण बोडो उग्रवादियों को असम छोड़कर भूटान जाना पड़ा। यहां बोडो उग्रवादियों से लड़ने के लिए कूटनीति बनाई गई, भारत की फौज और रॉयल भूटान आर्मी एक साथ हो गए।
  • 2000- NDFB के खिलाफ से भारत की फौज और रॉयल भूटान आर्मी ने अनेक जॉइंट ऑपरेशन चलाए।
  • 2008- असम में नौ जगहों पर धमाके हुए, जिसमें 88 निर्दोष नागरिक मारे गए। NDFB इन धमाकों के बाद गोबिंदा बासुमातारी गुट और दैमारी गुट दो गुटों में बंट गया।
  • इस मामले पर अब 11 साल बाद यानी 2019 में सीबीआई कोर्ट का गठन किया और फैसला सुनाया। सीबीआई कोर्ट के जज ने NDFB के चीफ रंजन दैमारी समेत 9 लोगों को उम्र कैद की सजा सुनाई।
विज्ञापन
विज्ञापन
what is bodo agreement? check the timeline here
क्या है बोडो संमझौता - फोटो : ani
  • 2009- गोबिंदा के NDFB-P (National Democratic Front of Boroland - Progressive) ने सरकार से बातचीत शुरू की।
  • 2010- दैमारी को बांग्लादेश में न केवल पकड़ा गया बल्कि उसे भारत के हवाले कर दिया गया।
  • 2013-बेल पर रिहा होने के बाद दैमारी ने भी सरकार से बात शुरू की।
  • 2012- NDFB से एक और हिस्सा निकला। NDFB-R से इंग्ती कठार सोंग्बिजित से नाता तोड़ा और NDFB-S (National Democratic Front of Bodoland (Songbijit) बनाया।
  • NDFB-S ने भारत सरकार से दूरी बनाई और उनसे बातचीत का विरोध किया।
  • 2012- इस साल बोडो-मुस्लिम दंगे हुए जिसमें सैकड़ों लोगों को अपना जान गंवानी पड़ी और लाखों की तादाद में लोग बेघर हुए। 
विज्ञापन
what is bodo agreement? check the timeline here
क्या है बोडो संमझौता - फोटो : ANI
  • 2014- इस साल फिर बोडो अलगाववादी गुटों ने आतंक मचाया और असम के कोकराझार और सोनितपुर में 30 से ज्यादा लोगों को मौत के घाट उतार दिया।
  • 2015- इस साल बी साओराईगवरा को सोंग्बिजित की जगह पर NDFB-S का अध्यक्ष बनाया गया।
  • 2019-  भारत सरकार ने 24 नवंबर को 5 साल के लिए NDFB पर प्रतिबंध बढ़ा दिया।
  • 2020- NDFB-S ने 11 जनवरी को भारत सरकार के सामने समर्पण की घोषणा की। 
  • 2020-  30 जनवरी को असम के प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड (एनडीएफबी) के सभी चार गुटों के 1615 उग्रवादियों ने आत्मसमर्पण किया।
  • 27 जनवरी को बोडो समझौता हुआ। इस पर गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि नौ संस्थानों ने साथ मिलकर ये समझौता किया है।

ये भी पढ़ें- कोरोनावायरस से पहले इन खतरनाक वायरसों ने दहलाई दुनिया, कुछ अब भी हैं लाइलाज

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें शिक्षा समाचार आदि से संबंधित ब्रेकिंग अपडेट।

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed