भारत सरकार और बोडो समुदाय के बीच समझौता 27 जनवरी को हुआ, जिसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को पहली बार कोकराझार पहुंचे। लोगों ने स्थानीय परंपरा के मुताबिक पीएम मोदी का स्वागत किया। साथ ही उनका समझौते के लिए धन्यवाद भी किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सात फरवरी को ट्वीट पर कहा था कि आज जब बोडो क्षेत्र में, नई उम्मीदों, नए सपनों, नए हौसले का संचार हुआ है, तो आप सभी की जिम्मेदारी और बढ़ गई है। मुझे पूरा विश्वास है कि Bodo Territorial Council अब यहां के हर समाज को साथ लेकर, विकास का एक नया मॉडल विकसित करेगी।
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क्या है असम का बोडो समझौता? 54 साल बाद सुलझा ये पूरा मामला
Sat, 08 Feb 2020 01:58 PM IST
Garima Garg
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
Published by: Garima Garg
Updated Sat, 08 Feb 2020 01:58 PM IST
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क्या है बोडो संमझौता
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क्या है बोडो संझौता
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- 1966-67- प्लेन ट्राइबल्स काउंसिल ऑफ असम ( PTCA- Plain Tribals Council of Assam) के तहत अलग बोडो राज्य ‘बोडोलैंड’ की मांग उठाई गई। बता दें, यह एक राजनीतिक संगठन था।
- 1979- असम में आंदोलन शुरू हुआ और मुद्दा था अवैध प्रवासी।
- 1985- साल 1979 में शुरू हुए आंदोलन का अंत 1985 में हुआ। इस आंदोलन का अंत तब हुआ जब राजीव गांधी की केंद्र सरकार को ऑल असम स्टूडेंट यूनियन ( AASU) और असम सरकार के साथ समझौता करना पड़ा। इसके लिए राजीव गांधी ने दोनों को बिठाकर एक असम एकॉर्ड पर हस्ताक्षर किए।
- 1986- रंजन दैमारी ने अक्टूबर में बोडो सिक्योरिटी फोर्स ( BDSF) नाम से एक उग्रवादी संगठन बनाया। बता दें, आगे चलकर इसका नाम नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड ( NDFB) रखा गया।
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- 1987- इस साल नए सिरे से इस मुद्दे को ऑल बोडो स्टूडेंट्स यूनियन ( ABSU) द्वारा उठाया गया। जिसके लिए ABSU के नेता उपेंद्रनाथ ब्रह्मा ने Divide Assam fifty-fifty नारा दिया।
- 1990- बोडो उग्रवादियों को भगाने के लिए इस दशक में भारत सेना का सहारा लिया गया। इसी कारण बोडो उग्रवादियों को असम छोड़कर भूटान जाना पड़ा। यहां बोडो उग्रवादियों से लड़ने के लिए कूटनीति बनाई गई, भारत की फौज और रॉयल भूटान आर्मी एक साथ हो गए।
- 2000- NDFB के खिलाफ से भारत की फौज और रॉयल भूटान आर्मी ने अनेक जॉइंट ऑपरेशन चलाए।
- 2008- असम में नौ जगहों पर धमाके हुए, जिसमें 88 निर्दोष नागरिक मारे गए। NDFB इन धमाकों के बाद गोबिंदा बासुमातारी गुट और दैमारी गुट दो गुटों में बंट गया।
- इस मामले पर अब 11 साल बाद यानी 2019 में सीबीआई कोर्ट का गठन किया और फैसला सुनाया। सीबीआई कोर्ट के जज ने NDFB के चीफ रंजन दैमारी समेत 9 लोगों को उम्र कैद की सजा सुनाई।
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- 2009- गोबिंदा के NDFB-P (National Democratic Front of Boroland - Progressive) ने सरकार से बातचीत शुरू की।
- 2010- दैमारी को बांग्लादेश में न केवल पकड़ा गया बल्कि उसे भारत के हवाले कर दिया गया।
- 2013-बेल पर रिहा होने के बाद दैमारी ने भी सरकार से बात शुरू की।
- 2012- NDFB से एक और हिस्सा निकला। NDFB-R से इंग्ती कठार सोंग्बिजित से नाता तोड़ा और NDFB-S (National Democratic Front of Bodoland (Songbijit) बनाया।
- NDFB-S ने भारत सरकार से दूरी बनाई और उनसे बातचीत का विरोध किया।
- 2012- इस साल बोडो-मुस्लिम दंगे हुए जिसमें सैकड़ों लोगों को अपना जान गंवानी पड़ी और लाखों की तादाद में लोग बेघर हुए।
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- 2014- इस साल फिर बोडो अलगाववादी गुटों ने आतंक मचाया और असम के कोकराझार और सोनितपुर में 30 से ज्यादा लोगों को मौत के घाट उतार दिया।
- 2015- इस साल बी साओराईगवरा को सोंग्बिजित की जगह पर NDFB-S का अध्यक्ष बनाया गया।
- 2019- भारत सरकार ने 24 नवंबर को 5 साल के लिए NDFB पर प्रतिबंध बढ़ा दिया।
- 2020- NDFB-S ने 11 जनवरी को भारत सरकार के सामने समर्पण की घोषणा की।
- 2020- 30 जनवरी को असम के प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड (एनडीएफबी) के सभी चार गुटों के 1615 उग्रवादियों ने आत्मसमर्पण किया।
- 27 जनवरी को बोडो समझौता हुआ। इस पर गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि नौ संस्थानों ने साथ मिलकर ये समझौता किया है।
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